कविता बडबडाहट……गाँधीजी कि पुण्यतिथि पर मेरी दो कड़वी कविताएँ May 16, 2012 / May 16, 2012 by अनुराग अनंत | 1 Comment on बडबडाहट……गाँधीजी कि पुण्यतिथि पर मेरी दो कड़वी कविताएँ कई बार आदमी कुछ कहना चाहता है पर कुछ कह नहीं पाता,ये कुछ न कह पाना उसे बहुत कुछ कहने के लिए मथ देता है,उस वक़्त उस आदमी की स्तिथि त्रिसंकू की तरह होती है वो ”कुछ” और ”बहुत कुछ” के बीच ”कुछ नहीं” को नकार कर खुद से ”कुछ-कुछ” कहने लगता है |ये ”कुछ-कुछ” […] Read more » Death Anniversary of Gandhi Ji Gandhi Ji गाँधीजी गाँधीजी कि पुण्यतिथि
कविता कविता: जिन्दगी – लक्ष्मी नारायण लहरे May 16, 2012 / May 16, 2012 by लक्ष्मी नारायण लहरे कोसीर पत्रकार | Leave a Comment आपना पन कहें या दोस्ताना अजीब चाहत है इस जीवन में सिर्फ संघर्ष भरी राहें है अपनों के बीच भी हम अकेले है एक -दुसरे के प्रेम से बंध कर स्वार्थ भरी जीवन जी रहे है जिन्दगी ….. की जंग में भाई -भाई को नहीं समझता माँ -बाप को नही पहचानते स्वार्थ ,भरी जीवन जी […] Read more » कविता कविता - जिन्दगी जिन्दगी लक्ष्मी नारायण लहरे
कविता कविता:अपने ही कमरे मेँ– मोतीलाल May 13, 2012 / May 13, 2012 by मोतीलाल | Leave a Comment एक विस्मृत जर्जर कमरे मेँ मै गिर जाता हूँ और गुजरता हूँ नम तंतुओँ के बीच से नष्ट हो चुकी चीजोँ के बीच जैसे मवेशियाँ चरते होँ अपने चारागाह मेँ मैँ इस तीखे माहौल मेँ मरणासन्न गंधोँ की लहरोँ के सामने महसूसता हूँ उन हरे पत्तोँ की सरसराहट जो अंधेरे बरामदोँ मेँ कहीँ किसी […] Read more » poem by motilal कविता:अपने ही कमरे मेँ
कविता कविता-श्यामल सुमन May 12, 2012 by श्यामल सुमन | Leave a Comment श्यामल सुमन सेवा है साहित्य सुमन व्यापार नहीं लेखन में प्रतिबंध मुझे स्वीकार नहीं प्रायोजित रचना से कोई प्यार नहीं बच के रहना साहित्यिक दुकानों से जी कर लिखता हूँ कोई बीमार नहीं मठाधीश की आज यहाँ बन आई है कितने डर से करते हैं तकरार नहीं धन प्रभाव के बल पर […] Read more » कविता-श्यामल सुमन
कविता कविता-टिमकी बजी मदारी की-प्रभुदयाल श्रीवास्तव May 8, 2012 / May 8, 2012 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment वाहन पंचर हुआ,लिये मैं सड़क सड़क घूमा टिमकी बजी मदारी की मैं बंदर सा झूमा कहीं दूर तक पंचरवाला नहीं दिखाई दिया हर दुकान पर अतिक्रमण का ताला मिला जड़ा जीवन के हर लम्हें में कितने पंचर होते अपने कटे फटेपन को पल पल कंधे ढोते सूजे पैर फूल गये जैसे फूल गया तूमा […] Read more » poem by Prabhudayal Srivastav कविता-टिमकी बजी मदारी की-प्रभुदयाल श्रीवास्तव
कविता कविता ; बस दिल्ली का समाचार है – श्यामल सुमन April 29, 2012 / April 30, 2012 by श्यामल सुमन | 1 Comment on कविता ; बस दिल्ली का समाचार है – श्यामल सुमन श्यामल सुमन सबसे पहले हम पहुँचे। हो करके बेदम पहुँचे। हर चैनल में होड़ मची है, दिखलाने को गम पहुँचे। सब कहने का अधिकार है। चौथा-खम्भा क्यूँ बीमार है। गाँव में बेबस लोग तड़पते, बस दिल्ली का समाचार है। समाचार हालात बताते। लोगों के जज्बात बताते। अंधकार में चकाचौंध है, दिन को भी […] Read more » poem Poems कविता बस दिल्ली का समाचार है कविता
कविता कविता ; खबरों की अब यही खबर है – श्यामल सुमन April 29, 2012 / April 30, 2012 by श्यामल सुमन | 1 Comment on कविता ; खबरों की अब यही खबर है – श्यामल सुमन श्यामल सुमन देश की हालत बुरी अगर है संसद की भी कहाँ नजर है सूर्खी में प्रायोजित घटना खबरों की अब यही खबर है खुली आँख से सपना देखो कौन जगत में अपना देखो पहले तोप मुक़ाबिल था, अब अखबारों का छपना देखो चौबीस घंटे समाचार क्यों सुनते उसको बार बार क्यों इस […] Read more » poem Poems कविता खबरों की अब यही खबर है कविता
कविता गीत ; आई नदी घर्रात जाये – प्रभुदयाल श्रीवास्तव April 29, 2012 / April 30, 2012 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment प्रभुदयाल श्रीवास्तव आई नदी घर्रात जाये मझधारे में हाथी डुब्बन कूलों कूलों पुक्खन पुक्खन कीट जमा सीढ़ी पर ऐसा जैसे हो मटमैला मक्खन डूबे घाट घटोई बाबा मन मंदिर के भीतर धावा हुई क्रोध में पानी पानी उगले धुँआं सा लावा उसनींदी बर्रात जाये आई नदी घर्रात जाये| बजरे और शिकारे खोये चप्पू पाल डांड़ […] Read more » geet आई नदी घर्रात जाये गीत गीत
कविता गीत ; सड़ी डुकरियां ले गये चोर – प्रभुदयाल श्रीवास्तव April 29, 2012 / April 30, 2012 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | 7 Comments on गीत ; सड़ी डुकरियां ले गये चोर – प्रभुदयाल श्रीवास्तव प्रभुदयाल श्रीवास्तव इसी बात का का होता शोर सड़ी डुकरियां ले गये चोर| रजत पटल पर रंग सुनहरे करें आंकड़े बाजी बजा बजा डुगडुगी मदारी चिल्लाये आजादी भरी दुपहरिया जैसे ही वह रात रात चिल्लाया सभी जमूरों ने सहमति में ऊंचा हाथ उठाया उसी तरफ सबने ली करवट बैठा ऊंट जहां जिस ओर| सड़ी […] Read more » geet गीत सड़ी डुकरियां ले गये चोर गीत
कविता साहित्य कविता ; अखबारों का छपना देखा – श्यामल सुमन April 28, 2012 / April 28, 2012 by श्यामल सुमन | Leave a Comment श्यामल सुमन मुस्कानों में बात कहो चाहे दिन या रात कहो चाल चलो शतरंजी ऐसी शह दे कर के मात कहो जो कहते हैं राम नहीं उनको समझो काम नहीं याद कहाँ भूखे लोगों को उनका कोई नाम नहीं अखबारों का छपना देखा लगा भयानक सपना देखा कितना खोजा भीड़ में जाकर मगर […] Read more » poem Poems कविता कविता अखबारों का छपना देखा
कविता साहित्य कविता ; सुमन अंत में सो जाए – श्यामल सुमन April 28, 2012 / April 28, 2012 by श्यामल सुमन | Leave a Comment श्यामल सुमन कैसा उनका प्यार देख ले आँगन में दीवार देख ले दे बेहतर तकरीर प्यार पर घर में फिर तकरार देख ले दीप जलाते आँगन में मगर अंधेरा है मन में है आसान उन्हीं का जीवन प्यार खोज ले सौतन में अब के बच्चे आगे हैं रीति-रिवाज से भागे हैं संस्कार ही […] Read more » poem Poems कविता कविता सुमन अंत में सो जाए
कविता साहित्य कविता ; भाई से प्रतिघात करो – श्यामल सुमन April 28, 2012 / April 28, 2012 by श्यामल सुमन | Leave a Comment श्यामल सुमन मजबूरी का नाम न लो मजबूरों से काम न लो वक्त का पहिया घूम रहा है व्यर्थ कोई इल्जाम न लो धर्म, जगत – श्रृंगार है पर कुछ का व्यापार है धर्म सामने पर पीछे में मचा हुआ व्यभिचार है क्या जीना आसान है नीति नियम भगवान है न्याय कहाँ नैसर्गिक […] Read more » poem Poems कविता कविता भाई से प्रतिघात करो