कविता कविता – लड़ाई July 31, 2012 / July 30, 2012 by मोतीलाल | Leave a Comment मोतीलाल अधिक समय तक हम जिँदा रहने की जिजीविषा मेँ नहीँ देख पाते मुट्ठियोँ मेँ उगे पसीने को और यहीँ से फुटना शुरू होतेँ हैँ तमाम टकराहटोँ के काँटेँ यहीँ से शुरू होता है धरती और आकाश का अंतर चाहे आकाश कितना भी फैला हो और हो उसमेँ ताकत धरती को ढंक लेने की […] Read more » poem by motilal कविता - लड़ाई
कविता कविता:शांति की खोज July 30, 2012 / July 30, 2012 by बलबीर राणा | Leave a Comment बलबीर राणा शांति खोजता रहा धरती के ओर चोर भटकता रहा कहाँ है शांति कहीं तो मिलेगी इस चाह में जीवन कटता रहा समुद्र की गहराई में गोता लगाता रहा झील की शालीनता को निहारता रहा चट्टाने चडता रहा घाटियाँ उतरता रहा पगडंडियों में संभालता रहा रेगिस्तानी में धंसता रहा कीचड़ में फिसलता […] Read more » kavita by balbir rana कविता:शांति की खोज
कविता कविता:दीया अंतिम आस का July 29, 2012 / July 29, 2012 by दिनेश गुप्ता 'दिन' | 4 Comments on कविता:दीया अंतिम आस का दिनेश गुप्ता ‘दिन’ दीया अंतिम आस का, प्याला अंतिम प्यास का वक्त नहीं अब, हास परिहास उपहास का कदम बढाकर मंजिल छू लूँ, हाथ उठाकर आसमाँ पहर अंतिम रात का, इंतज़ार प्रभात का बस एक बार उठ जाऊँ, उठकर संभल जाऊँ दोनों हाथ उठाकर, फिर एक बार तिरंगा लहराऊँ दुआ अंतिम रब से, कण […] Read more » कविता:दीया अंतिम आस का
कविता कविता:चोराहे पर खड़ा हूँ-बलबीर राणा July 26, 2012 / July 26, 2012 by बलबीर राणा | Leave a Comment किधर जाऊं चोराहे पर खड़ा हूँ सुगम मार्ग कोई सूझता नहीं सरल राह कोई दिखता नहीं कौन है हमसफ़र आवाज कोई देता नहीं किधर जाऊं चोराहे पर खड़ा हूँ इस पार और भीड़ भडाका उस पार सूनापन एक और शमशान डरावन एक और गर्त में जाने का दर डर लगता किधर जाऊं चोराहे पर […] Read more » :चोराहे पर खड़ा हूँ-बलबीर राणा poem by balbir rana कविता:चोराहे पर खड़ा हूँ कविता:चोराहे पर खड़ा हूँ-बलबीर राणा
कविता कविता:अमानुष बना कैसे July 25, 2012 / July 25, 2012 by बलबीर राणा | 1 Comment on कविता:अमानुष बना कैसे बलबीर राणा मा ने प्यार दिया पिता ने दुलार भाई ने साथ दिया बहन ने आभार अमानुष बना कैसे समाज ने एकतादी जाती ने अपनापन धर्म ने सतमार्ग दिया वेद पुराण कुरान बाईबल ने मानवता फिर अमानुष बना कैसे रीfत रिवाजों ने अनुसरण दिया इतिहास ने पुनरावृति गुरु ने ज्ञान दिया ग्रंथों […] Read more » poem by balbir rana कविता:अमानुष बना कैसे
कविता कविता:अडिग सैनिक July 24, 2012 / July 24, 2012 by बलबीर राणा | 1 Comment on कविता:अडिग सैनिक बलबीर राणा बर्फीले तूफान के आगे अघोरजंगलके बीच समुद्री लहरों के साथ , पर्वतकी चोटियों पर अडिग खड़ा हूँ मा की ममता से दूर पिता के छांव से सुदूर पत्नी के सानिंध्य के बिना पुत्र मोह से अलग अडिग खड़ा हूँ दुश्मन की तिरछी निगाहों के सामने देश विद्रोहियों के बीच दुनिया समाज […] Read more » कविता:अडिग सैनिक
कविता बीनू भटनागर की कविताएं July 21, 2012 / July 21, 2012 by बीनू भटनागर | 1 Comment on बीनू भटनागर की कविताएं कंचनचंघा प्रथम आरुषि सूर्य की, कंचनचंघा पर पड़ी तो, चाँदी के पर्वत को, सोने का कर गई। सूर्योदय का दृश्य देख, टाइगर हिल पर खड़े हम, ठंड व तेज़ हवा के प्रकोप को, सहज ही सह गये। विश्व की तृतीय ऊँची चोटी, पवित्र चोटी पर उदित सूर्य सुनहरी उजाला देखकर, मंत्रमुग्ध हम रह गये। एक […] Read more » poems by binu bhatnagar कवितायें दार्जिलंग और गैंगटौक से
कविता कविता: कविता या खबर-मोतीलाल July 21, 2012 / July 21, 2012 by मोतीलाल | Leave a Comment यह कविता कैसे हो सकती है उस खौफजदा पल का जब दस मजबूत हाथ दो कच्ची जांघोँ को चीर डाल रहे थे और छूटते खून की गंध तुम्हारे ड्राइंगरुम मेँ नहीँ पहुंच पा रही थी हाँ अखबार के पन्ने दूसरे दिन उस गंदे रक्त से जरुर सना दिखा आखरी पन्ने के आखरी काँलम मेँ […] Read more » poem by motilal कविता: कविता या खबर-मोतीलाल
कविता कविता:वृक्ष बगावत कर देंगे July 18, 2012 / July 18, 2012 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment प्रभुदयाल श्रीवास्तव वृक्ष बगावत कर देंगे पर्यावरण प्रदूषण के यदि नहीं सुधारे गये हाल तो वृक्ष बगावत कर देंगे जल भी कर देगा हड़ताल | पेड़ पेड़ डाली डाली के अंग भंग करते जाते बहुमंजिलीं बना इमारत काट काट वन, इतराते आम नीम पीपल के देवता भर भर आहें चुपचुप हैं जंगल अब मैदान बन […] Read more » poem by Prabhudayal Srivastav कविता:वृक्ष बगावत कर देंगे
कविता कविता:आरक्षण की वेदी पर…-बीनू भटनागर July 15, 2012 by बीनू भटनागर | 9 Comments on कविता:आरक्षण की वेदी पर…-बीनू भटनागर आरक्षण के मुद्दे पर, यों तो सब दल साथ खड़े हैं, इतनी छीना झपटी देखकर, हम तो शर्मसार खड़े हैं। संसद तो बन गया अखाड़ा, कुश्ती देखो, देखो दंगल, सारे पहलवान खड़े हैं। जाति आधारित आरक्षण का, अब कोई आधार नहीं है, इसके चलते जिनके पू्र्वज, ऊँची कुर्सी पा चुके हैं, उन्हीं के वंशज […] Read more » poem by binu bhastnagar कविता:आरक्षण की वेदी पर कविता:आरक्षण की वेदी पर...-बीनू भटनागर कविता:बीनू भटनागर
कविता ……और फिर तुम्हारी याद ! July 12, 2012 / July 12, 2012 by विजय कुमार सप्पाती | 1 Comment on ……और फिर तुम्हारी याद ! ……और फिर तुम्हारी याद ! एक छोटा सा धुप का टुकड़ा अचानक ही फटा हुआ आकाश बेहिसाब बरसती बारिश की कुछ बूंदे और तुम्हारे जिस्म की सोंघी सुगंध ……और फिर तुम्हारी याद ! उजले चाँद की बैचेनी अनजान तारो की जगमगाहट बहती नदी का रुकना और रुके हुए जीवन का बहना ……और फिर […] Read more » poem by vijay ji
कविता कविता:वर्षा रानी July 11, 2012 / July 11, 2012 by प्रो ए. डी. खत्री | Leave a Comment डा. ए. डी.खत्री वर्षा रानी काले काले बदल आये लगता हैं जल लेकर आये धरती प्यासी , लोग हैं प्यासे कब से बैठे आस लगाये . बदरा बरसो रिमझिम – रिमझिम कृषक की चिंता दूर करो तुम बोएं बीज खेत लहलहाएं और अधिक न देर करो तुम . वर्षा रानी तुम हो देवी […] Read more » poem by khatri ji