कविता देवों से वंदन पाना …………. March 26, 2011 / December 14, 2011 by शैलेन्द्र सक्सेना "अध्यात्म" | 3 Comments on देवों से वंदन पाना …………. देवों से वंदन पाना …………. अब होते अत्याचारों पर मिलकर ये हुँकार भरो कहाँ छिपे हो घर मैं बेठे निकलो और संहार करो आतंकी अफजल , कसाब को और नहीं जीने दो अब घुस जाओ जेलों मैं मित्रो आओ मिलकर वार करो कोन है हिटलर ? कोन है हुस्नी ? किसका नाम है गद्दाफी ? […] Read more »
कविता जिन्दगी की कहानी March 24, 2011 / December 14, 2011 by उमेश कुमार यादव | 4 Comments on जिन्दगी की कहानी जिन्दगी की कहानी जिन्दगी के रंग में जिन्दगी के संग में उमेश कुमार यादव नये नये ढंग में नये नये रुप में संगी मिलते रहे मौसम खीलते रहे मौसमों के खेल में जिन्दगी गुज़र गई संवर जाये जिन्दगी इस होड़ में लगे रहे जिन्दगी सम्भली नहीं और जिन्दगी निकल गई । जिन्दगी की आस में […] Read more »
कविता जनकवि मनमोहन की 6 कविताएं March 21, 2011 / December 14, 2011 by जगदीश्वर चतुर्वेदी | 1 Comment on जनकवि मनमोहन की 6 कविताएं जिन्होंने मरने से इन्कार किया जिन्होंने मरने से इन्कार किया जिन्होंने मरने से इन्कार किया और जिन्हें मार कर गाड़ दिया गया वे मौका लगते ही चुपके से लौट आते हैं और ख़ामोशी से हमारे कामों में शरीक हो जाते हैं कभी-कभी तो हम घंटों बातें करते हैं या साथ साथ रोते हैं खा खाकर […] Read more »
कविता मिली कुंए में भांग आज फिर होली में March 18, 2011 / December 14, 2011 by पंडित सुरेश नीरव | 2 Comments on मिली कुंए में भांग आज फिर होली में मिली कुंए में भांग आ ज फिर होली में काम हुए सब रॉंग आज फिर होली में सजी-धजी मुर्गी की देख अदाओं को दी मुर्गे ने बांग आज फिर होली में करे भांगड़ा भांग उछल कर भेजे में नहीं जमीं पर टांग आज फिर होली में फटी-फटाई पेंट […] Read more »
कविता लड़ाई चलेगी लंबी इस बार … March 8, 2011 / December 15, 2011 by राजीव दुबे | 7 Comments on लड़ाई चलेगी लंबी इस बार … अब यह उजाड़ एक टीस बन कर उतर गया है अंदर, देखी नहीं जाती यह बदहाली हमसे… ऐ वक्त तू दिखा ले – जो भी दिखाना हो तुझे, हम भी जिद्द पर हैं – लड़ाई चलेगी लंबी इस बार, हमारी जीत तक … । जो तुम सोचते हो कि – यह देश है ठंडा […] Read more » Quarrel लड़ाई
कविता मेरी तड़त का मतलब March 2, 2011 / December 15, 2011 by डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश' | 3 Comments on मेरी तड़त का मतलब मेरा शरीर मेरा है| जैसे चाहूँ, जिसको सौंपूँ! हो कौन तुम- मुझ पर लगाम लगाने वाले? जब तुम नहीं हो मेरे मुझसे अपनी होने की- आशा करते क्यों हो? पहले तुम तो होकर दिखाओ समर्पित और वफादार, मैं भी पतिव्रता, समर्पित और प्राणप्रिय- बनकर दिखाऊंगी| अन्यथा- मुझसे अपनी होने की- आशा करते क्यों हो? तुम्हारी […] Read more » मेरी तड़त मेरी तड़त का मतलब
कविता गीत / अब तो जागो जवानी तुम्हें है क़सम February 22, 2011 / December 15, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 2 Comments on गीत / अब तो जागो जवानी तुम्हें है क़सम है परीक्षा को देखो घड़ी आ गयी , अब तो जागो जवानी तुम्हें है क़सम। भावनाओं का बढ़ है प्रदूषण रहा, आए दिन अब सुलगने लगे हैं शहर। जड़ जमाती ही जातीं दुरभिसन्धियाँ, और फैला रही हैं नसों में ज़हर। साज़िशों में घिरी यह धरा छोड़कर, यों न भागो जवानी तुम्हें है क़सम। लाख चौकस […] Read more » song गीत
कविता कविता / गुस्सा गधे को आ गया February 20, 2011 / December 15, 2011 by पंडित सुरेश नीरव | 3 Comments on कविता / गुस्सा गधे को आ गया कौन है जो फस्ल सारी इस चमन की खा गया बात उल्लू ने कही गुस्सा गधे को आ गया प्यार कहते हैं किसे है कौन से जादू का नाम आंख करती है इशारे दिल का हो जाता है काम बारहवें बच्चे से अपनी तेरहवीं करवा गया बात उल्लू ने कही गुस्सा गधे को आ गया […] Read more » poem कविता
कविता सात प्रेम कविताएँ February 14, 2011 / December 15, 2011 by सतीश सिंह | 4 Comments on सात प्रेम कविताएँ 1 चुपके से मैं तो चाहता था सदा शिशु बना रहना इसीलिए मैंने कभी नहीं बुलाया जवानी को फिर भी वह चली आई चुपके से जैसे चला आता है प्रेम हमारे जीवन में अनजाने ही चुपके से 2 प्रथम प्रेम इंसान को कितना कुछ बदल देता है प्रथम प्रेम उमंग और उत्साह लिए लौट जाता […] Read more » Love Poems प्रेम कविताएँ
कविता अनामिका घटक की कविता – नि:शब्द February 13, 2011 / December 15, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 1 Comment on अनामिका घटक की कविता – नि:शब्द खामोश हम तुम बात ज़िन्दगी से आँखों ने कुछ कहा धड़कन सुन रही है धरती से अम्बर तक नि:शब्द संगीत है मौसम की शोखियाँ भी आज चुप-चुप सी है गीत भी दिल से होंठ तक न आ पाए बात दिल की दिल में ही रह जाए जिस्मों की खुशबू ने पवन महकाया है खामोशी को […] Read more » poem नि:शब्द
कविता नवगीत/तूफ़ान सड़क पर February 12, 2011 / December 15, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 1 Comment on नवगीत/तूफ़ान सड़क पर -रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’ जब देश लूटता राजा कोई करे कहाँ शिकायत , संसद में बैठे दागी एकजुट हो करें हिमायत ; बेहयाई नहीं टूटती , रोज़ उठें तूफ़ान सड़क पर । दूरदर्शनी बने हुए इस दौर के भोण्डे तुक्कड़, सरस्वती के सब बेटे हैं घूमते बनकर फक्कड़ ; अपमान का गरल पी रहा ग़ालिब का […] Read more » song
कविता कविता/ तलाश February 5, 2011 / December 15, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 1 Comment on कविता/ तलाश पाकिस्तान व चीन का हर बड़ा शहर अब हमारी तरकश की मार की पहुंच में है हमारे देश में हर साल उग आते हैं अनेकों अरबपति सासंदों की आय हो जाती है हर साल दोगुना एक अम्बानी अपनी पत्नी को उसके जन्म दिन पर भेंट दे देता है एक उड़नखटोला…….. चन्द्रमा पर पानी की गम्भीर […] Read more » poem कविता/ तलाश