कविता हुंकार September 17, 2011 / December 6, 2011 by हिमकर श्याम | Leave a Comment हिमकर श्याम जब भी देनी चाही किसी ने आवाज वह हंसा- एक तीखी हंसी यूं देना चाहते हो तुम आवाज किसे ? यूं दे पाओगे कभी आवाज व्यवस्था को क्या ऐसी होती है आवाज बदलाव की यह नहीं है आवाज १२१ करोड़ आवाम की देखना, एक दिन तमाम प्रयासों छटपटाहटों और आक्रोशों के बावजूद […] Read more » हुंकार
कविता कश्मीरी (विस्थापित) कविता September 17, 2011 / December 6, 2011 by कुंदन लाल चौधरी | Leave a Comment बंदिनी देवी हम निराश हो रहे हैं देवी ज्येष्ठा कि हमारी भूमिकाएं उलट गई हैं और अब हमारी बारी है तुम्हारी रक्षा करने की मूर्तिचोरों और मूर्तिभंजकों की दुष्ट योजनाओं को विफल करने की जो हमारी भूमि पर मंडरा रहे हैं। हमने तुम्हारे लिए बाड़ बना दिया है और अब हमें खिड़की-दर्शन से […] Read more » kashmir कश्मीरी (विस्थापित) कविताएं
कविता हिन्दी के प्रचार-प्रसार में संचार माध्यमों की भूमिका September 15, 2011 / December 6, 2011 by राजेश करमहे | Leave a Comment राजेश करमहे अक्षर अविनाशी, शब्द ब्रह्म, ध्वनि सृष्टि का स्पंदन, धन्य हो हिन्दी भाषा, नागरी तुझको नमन. वसुधा कुटुम्ब, अतिथि ईश्वर, परहित जीवन समिधा अर्पण, समृद्ध हो हिन्दी संस्कृति, भारती तेरा चरण वंदन. सर्वधर्म समभाव युक्त धर्मनिरपेक्ष जीवन दर्शन, धन्य हो भारतमाता, भारतवासी तुझे नमन. सुनता रहा है विश्व जिसे, करता नत […] Read more » hindi संचार माध्यम
कविता हिन्दी के प्रचार-प्रसार में संचार माध्यमों की भूमिका September 14, 2011 / December 6, 2011 by राजेश करमहे | Leave a Comment राजेश करमहे अक्षर अविनाशी, शब्द ब्रह्म, ध्वनि सृष्टि का स्पंदन, धन्य हो हिन्दी भाषा, नागरी तुझको नमन. वसुधा कुटुम्ब, अतिथि ईश्वर, परहित जीवन समिधा अर्पण, समृद्ध हो हिन्दी संस्कृति, भारती तेरा चरण वंदन. सर्वधर्म समभाव युक्त धर्मनिरपेक्ष जीवन दर्शन, धन्य हो भारतमाता, भारतवासी तुझे नमन. सुनता रहा है विश्व जिसे, करता नत […] Read more » Hindi Language नागरी हिंदी
कविता हिन्दी दिवस …(14 सितम्बर पर विशेष) September 12, 2011 / December 6, 2011 by जगमोहन ठाकन | Leave a Comment जग मोहन ठाकन बिन्दी-बिन्दी खरोंच रहा हूँ अपना ही मुख नोंच रहा हूँ जितना सोचूं उतना उलझूं, उलझ-उलझ कर सोच रहा हूँ । तुम भी सोचो,मैं भी सोचूं, आओ मिलकर सारे सोचें- अपने ही घर विवश हुई क्यों हिन्दी ‘‘दिवस‘‘ मनाने को ?? माता छोड़ विमाता पूजें, छोड़ आसमा छाता पूजें , दूर कहीं से […] Read more » Hindi Diwas हिन्दी दिवस
कविता आर. सिंह की कविता / कविता का अन्त September 6, 2011 / December 6, 2011 by आर. सिंह | 3 Comments on आर. सिंह की कविता / कविता का अन्त मेरी बेटी, कहती है मुझसे. डैडी लिखते तो हैं आप. एक तरह से अच्छा ही लिखते हैं. भाषा पर पकड भी अच्छी है आपकी. पर, पर क्या मेरी बेटी? साफ साफ कहो मुझसे. क्या कमी दिखती है तुमको मेरे लेखन में? डैडी, निराशा झलकती आपकी रचनाओं में. निराश नजर आते हैं आपके पात्र. लगता है […] Read more »
कविता शिक्षक दिवस पर विशेष कविता / स्वयं का कर फिर तू संधान September 5, 2011 / December 6, 2011 by डॉ. अरुण कुमार दवे | 1 Comment on शिक्षक दिवस पर विशेष कविता / स्वयं का कर फिर तू संधान डॉ. अरुण कुमार दवे हे जनमन के नायक , राष्ट्र के उन्नायक आपको शत शत नमन | आप देश और समाज की तरक्की के एकमात्र आधार है| आपकी महिमा अपरंपार है| हे गुरुवर ! हे आचार्य ! हे शिक्षक प्रवर! आप अपनी गरिमा को पुनर्प्रतिष्ठत करें ; माँ भारती की झोली सुख-समृद्धि से भरें| […] Read more » Teachers Day शिक्षक दिवस
कविता पिक्चर अभी बाकी है…..(कविता) August 31, 2011 / December 6, 2011 by मुकेश चन्द्र मिश्र | 3 Comments on पिक्चर अभी बाकी है…..(कविता) जनतंत्र की है जीत, मगर फिर भी सम्भलना । सरकार बदल देगी, इसे हार में वरना ।। गफलत अगर हुयी, तो पछताना पड़ेगा । इस भ्रष्टतंत्र को, सिर झुकाना पड़ेगा ।। तुडवाया था इन्होने ही, पिछला भी अनशन । पर देते रहे फिर भी, बारह दिन तक टेंशन ।। सड़कों पर देखी भीड़, […] Read more » Anna Hazare
कविता अभिषेक पुरोहित की कविता August 29, 2011 / December 7, 2011 by अभिषेक पुरोहित | 5 Comments on अभिषेक पुरोहित की कविता क्या जीवन! यंत्रवत चलते रहना ??? भौतिकी में दिन भर खपना, रात्रि में करना उसका चिंतन !! नश्वर-नष्ट होने वाली वस्तु के पीछे घूमते जाना यूं ही उम्र भर | अंत समय में कहना, गर्व से छोड़ा मैंने पीछे अपने, बंगा पुत्र-परिवार || जीवंत-चैतन्य खोजता जड़ को, महामाया के चक्र, पिसना है जीवन ? या […] Read more »
कविता कविता / जनलोकपाल बिल August 27, 2011 / December 7, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment पाला है हमने अब भी ये आज़ार किसलिए गद्दीनशीन अब भी हैं गद्दार किसलिए लगता है मुझको दाल में है काला कुछ जरूर डरती है लोकपाल से सरकार किसलिए ये लूटमार, रेप, घूस, कत्ल, घोटाले है संविधान इस कदर बीमार किसलिए खाते हैं कसम लाएंगे जनलोकपाल बिल हमको मिला है वोट का अधिकार किसलिए अब […] Read more » Janlokpal जनलोकपाल
कविता अन्ना जी अनशन तोड़ो August 27, 2011 / December 7, 2011 by मुकेश चन्द्र मिश्र | 1 Comment on अन्ना जी अनशन तोड़ो अन्ना जी अनशन तोड़ो अब नहीं देर हो जाएगी । अगर हुआ कुछ तुम्हे तो भारत में बर्बादी आएगी ।। अलख जगाई है जो तुमने आगे उसे बढाना है । मर जाएँ या मिट जाएँ जन लोकपाल बिल लाना है ।। चमड़ी मोटी बहुत हो गयी है काले अंग्रेजों की । इनको दिखलानी है ताकत […] Read more » Anna Hazare अन्ना हजारे कविता
कविता रेखा साव की कविता / हिन्दी August 26, 2011 / December 7, 2011 by प्रवक्ता ब्यूरो | 2 Comments on रेखा साव की कविता / हिन्दी शब्द शब्द संवेदना अक्षर अक्षर प्यार . हर सुख से संपन्न है हिन्दी का संसार . जिनकी रोटी पर लिखा है हिन्दी का नाम. हिन्दी उनके वास्ते शबद एक वे दाम. हिन्दी तो छोड़ी मगर बन न सके अंगरेज. एक मुखौटा ओढ़्कर क्योंकर रहे सहेज. मीरा केशव जायसी तुलसी सूर कबीर. किस भाषा की है […] Read more »