आदि पत्रकार देवर्षि नारद

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12 मई पर विशेष:- मृत्युंजय दीक्षित सृष्टिकर्ता प्रजापति ब्रहमा के मापस पुत्र पारद। महान तपस्वी तेजस्वी सम्पूर्ण वेदान्त शास़्त्र के ज्ञाता तथा समस्त विद्वाओं में पारंगत नारद। ब्रहमतेज से संपन्न हैं। नारद जी क महान कृतित्व व व्यक्तित्व पर जितनी भी उपमाएं लिखी जायें बेहद कम हैं। देवर्षि नारद ने अपने धर्मबल से परमात्मा का… Read more »

1857 की क्रान्ति का नायक धनसिंह गुर्जर कोतवाल

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कोतवाल धनसिंह ने इन आजादी के दीवानों की सेना का रामराम करके स्वागत किया और उनसे पूछा कि क्या चाहते हो? उसने अपनी ओर से लोगों से कहा कि-‘मारो फिरंगी को और देश को आजाद कराओ।’ हनुमान की जय बोलकर इन सिरफिरे देशभक्तों की सेना कोतवाल धनसिंह के घोड़े के पीछे-2 चल दी, वह पुलिस जो इनके विशाल दल को रोकने के लिए तैनात थी, वह भी अपने कोतवाल के पीछे पीछे चल पड़ी। इन्होंने पहला धावा मेरठ की नई जेल पर बोल दिया। इन्होंने जेल से 839 कैदियों को मुक्त कराया और वे भी मुक्त होकर स्वतंत्रता सेनानियों के इस दल के साथ मिल गए और अंग्रेेजों की मेरठ जेल तोड़ दी । वहां से यह भीड़ मेरठ शहर और सिविल लाइन में घुस गई और अंग्रेज अधिकारियों के बंगलों को आग लगाना और उन्हें मारना शुरू कर दिया।

माहिष्‍मती के समृद्ध इतिहास को कौन नहीं बूझना चाहता

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उस समय मुस्‍लिम थे ही कहां? और जब मुस्‍लिम थे ही नहीं तो फिल्‍म में मुस्‍लिम किरदार कैसे घुसाया जाता? घुसा भी दिया जाता तो शायद वामपंथी इस बात पर सिर पीटते कि मुस्‍लिमों को बदनाम करने के लिए इतिहास से छेड़छाड़ की गई है क्‍योंकि मुस्‍लिम शासकों का किरदार प्रशंसा के योग्‍य सिर्फ अपवाद स्‍वरूप ही मिलता है।

कविवर टैगोर : कुछ विवाद – कुछ प्रवाद

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  रवीन्द्र नाथ टैगोर (7 मई 1861–7 अगस्त 1941), जिन्हें आधुनिक भारत में “ गुरुदेव “ का सम्मान मिला, ऐसे महाकवि, जिन्हें साहित्य का नोबल पुरस्कार मिला, विश्व के एकमात्र ऐसे कवि जिनके लिखे गीतों को दो भिन्न देशों में “राष्ट्रगान “ का सम्मान मिला, बहु-आयामी व्यक्तित्व के ऐसे धनी जो हर आयाम में शिखर… Read more »

हिंदू – इस्लामिक पूजा गृह

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डा. राधेश्याम द्विवेदी प्रारम्भिक इतिहास :-हिंद इस्लामिक वास्तुकला का प्रारंभ 12वीं शताब्दी के अंत में भारत पर विदेशी कब्ज़े से हुआ। मुसलमानों को सासानी और बिज़ेन्टाइन साम्राज्यों से विभिन्न योजनाओं का खज़ाना विरासत में मिला । सुरूचिपूर्ण इमारतों होने के कारण उन्होंने जिस भी देश पर कब्ज़ा किया, वहां की स्थानीय वास्तुकला को अपने अनुकूल… Read more »

बुढ़िया का ताल: ताल भी,एत्माद्खान का मण्डप निवास भी

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डा. राधेश्याम द्विवेदी आगरा की भूमि मुगलकालीन राजाओं,बेगमों उच्च पदस्थ लोगों तथा साधु महात्माओं के स्मारकों, महलों ,बाग बगीचों व बगीचियों से भरी पड़ी है।मुगल पूर्व बागों में कैलाश, रेनुकता, सूरकुटी, बृथला व बुढ़िया का ताल आदि प्रमुख हैं। मुगलकालीन बागों की एक लम्बी श्रृंखला यहां देखने को मिलती है।ये मुख्यतः तीन प्रकार के होते… Read more »

 सबके आदर्श हैं भगवान परशुराम

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राष्ट्रकवि दिनकर ने सन् 1962 ई. में चीनी आक्रमण के समय देश को ‘परशुराम की प्रतीक्षा’ शीर्षक से ओजस्वी काव्यकृति देकर सही रास्ता चुनने की प्रेरणा दी थी। युगचारण ने अपने दायित्व का सही-सही निर्वाह किया, किन्तु राजसत्ता की कुटिल और अंधी स्वार्थपूर्ण लालसा ने हमारे तत्कालीन नेतृत्व के बहरे कानों में उसकी पुकार ही नहीं आने दी। पाँच दशक बीत गये। इस बीच एक ओर साहित्य में परशुराम के प्रतीकार्थ को लेकर समय≤ पर प्रेरणाप्रद रचनायें प्रकाश में आती रहीं और दूसरी ओर सहस्रबाहु की तरह विलासिता में डूबा हमारा नेतृत्व राष्ट्र-विरोधी षडयन्त्रों को देश के भीतर और बाहर–दोनों ओर पनपने का अवसर देता रहा। परशुराम पर केन्द्रित साहित्यिक रचनाओं के संदेश को व्यावहारिक स्तर पर स्वीकार करके हम साधारण जनजीवन और राष्ट्रीय गौरव की रक्षा कर सकते हैं।

अयोध्या से दक्षिण कोरिया का अटूट पौराणिक सम्बन्ध

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कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति किम देई जुंग और पूर्व प्रधानमंत्री हियो जियोंग और जोंग पिल किम कारक वंश से ही संबंध रखते थे। कारक वंश के लोगों ने उस पत्थर को भी सहेज कर रखा है जिसके विषय में यह कहा जाता है कि अयोध्या की राजकुमारी सुरीरत्ना अपनी समुद्र यात्रा के दौरान नाव का संतुलन बनाए रखने के लिए उसे रखकर लाई थी। किमहये शहर में राजकुमारी हौ की प्रतिमा भी है। कोरिया में रहने वाले कारक वंश के लोगों का एक समूह हर साल फरवरी-मार्च के दौरान राजकुमारी सुरीरत्ना की मातृभूमि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने अयोध्या आता है।

राष्ट्रभाषा ही आत्मीय संस्कृति की अस्मिता की जनक ।

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यूरोप के किसी देश में, यह फ्रांस हो या जर्मनी, स्पेन हो या पुर्तगाल, नीदरलैंड हो या पोलैंड । इन देशों में भारतवंशी जब आपस में मिलेंगे तो हिंदुस्तानी में वैसेही बातें करेंगे जिस तरह फ्रेंच से फ्रेंच और जर्मन से जर्मन बिना किसी हीनता ग्रंथि के आपस में संवाद करते हैं । भारतवंशियों को हिंदी भाषा परिवार की बोलियां उसी कोटि की हैं । जैसे फ्रेंच- जर्मन और डच भाषा परिवार की बोलियां । लेकिन यूरोप सहित विश्व के किसी भी देश में यदि कोई 15 – 20 वर्ष से रह रहा भारतीय किसी दूसरे भारतीय से मिलेगा तो वह अंग्रेजी में बातें करेगा। यह कहना अतिशयोक्ति न होगा कि यूरोप सहित अन्य देशों में भारतीयों के कारण हीअंग्रेजी बसर कर रही है ,उस देश के आम नागरिकों के कारण नहीं।

सिकंदर लोदी बारादरी पर मरियम उज-जमानी का मकबरा

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शाहजहां ने अपनी प्रेमिका मुमताज के लिए ताजमहल बनवाया, तो वहीं शाहजहां के पिता जहांगीर ने अपनी मां की याद में एक भव्य स्मारक बनवाया। नेशनल हाईवे दो पर अकबर टॉम्ब से महज 500 मीटर की दूरी पर यह मथुरा सड़क पर बायीं ओर तथा अकबर का मकबरा, सिकंदरा से पश्चिम की ओर मरियम का मकबरा स्थित है। मरियम उज-जमानी की मृत्यु 1622 में हुई और उसके बेटे जहांगीर ने उनके नाम पर इस महल का निर्माण करवाया था। यह महल अकबर के मकबरे के करीब ज्योति नगर में तंतपुर रोड पर स्थित है। पहले इस महल का निर्माण पर्दे में रहने वाली शाही औरतों के आवास के रूप में किया गया था। इस महल के प्रांगण के चारों ओर कई सारे कमरे बने हुए हैं।