लेख

चित्रण चितेरा कर गया !

चित्रण चितेरा कर गया, है भाव अपने ले गया; कुछ दे गया सा लग रहा, गा के वो गोमन रम गया ! गोपन में रस रच चल दिया, द्रष्टा रहे वृष्टि किया; चित की दशा समझा किया, बुधि की विधा को वर दिया ! वह व्याप्ति की बौछार में, संतृप्ति के अँकुर बोया; आलोक से निज लोक का, रास्ता दिखाया चल दिया ! रिश्ते बनाना जानता, किस्से में ना वह उलझता; अपनी ही द्युति द्रुति ढालता,