कविता कहने को मैं दलित हूँ पर अब दौलत की महारानी हूँ January 24, 2019 / January 24, 2019 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment कहने को मैं दलित हूँ पर अब दौलत की महारानी हूँ भले ही मेरे आगे पीछे नहीं,अपने घर की पटरानी हूँ भले ही मैं सदा कुवांरी रहूँ,पर ब्याहों से तो अच्छी हूँशादी करके क्या मिलेगा,मैं बिन ब्याह लेती मस्ती हूँ रूप रंग है ऐसा मेरा,सब नेता लोग मुझ पर मरते हैमैं अपनी पार्टी की नेता हूँ,सब […] Read more »
कविता जिसने उसका चीर हरण किया,उसी को मित्र बनाया है January 22, 2019 / January 23, 2019 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment जिसने उसका चीर हरण किया,उसी को मित्र बनाया है डूब मरो चुल्लू भर पानी में,उसको जरा शर्म न हाया है जो अपना सम्मान न बचा सकी,औरो का क्या बचायेगी सत्ता की लोलुपता के कारण, अपना सब कुछ गवायेगी गेस्ट हाउस की घटना को,कुर्सी के लिये उसने भुला दिया जिन हाथो ने अपमान किया था,उन्ही हाथो […] Read more » जिसने उसका चीर हरण किया
कविता मैं अध्यापिका कहलाती हूँ January 22, 2019 by डॉ कविता कपूर | Leave a Comment क्यों कहूँ मैं कि सुबह का अलार्म मुझे सोने नहीं देता ? जबकि वह तो सूर्य देव के स्वागत में मुझसे गुस्ताखी होने नहीं देता। प्रथम किरण पर सवार भोर, करती है मुझे आत्म विभोर, सुबह की वह भागदौड़, रसोई के कामों की होड़, रोज एक नई स्पर्धा को जन्म देती है, जिसमें अक्सर […] Read more »
साहित्य इन्सान ही बनना । January 22, 2019 by अजय एहसास | Leave a Comment सबका ही सम्मान तू करना ,नहीं कभी अपमान तू करना हिंदू मुस्लिम बाद में बनना ,पहले तू इन्सान ही बनना ।तकलीफ़े न देना किसी को,कभी किसी को दुखी न करना तकलीफों को सदा समझकर,साथ निभा इन्सान ही बनना ।बैर की आग बुझाना यारों,नफरत की न खेती करना ,अमन चैन खुशहाली लाकरआप सदा इन्सान ही बनना ।नहीं कभी […] Read more »
कविता जीवन बस इक धोखा है। January 22, 2019 / January 22, 2019 by अजय एहसास | Leave a Comment दुनिया की उलझन में पड़कर, सब ताने बाने बदल गये हम तो वैसे के वैसे रहे, पर दोस्त पुराने बदल गये। ये बात नही परिवर्तन की, ये तो सब समय का झोंका है बस मौत ही सच्चा साथी है, ये जीवन बस इक धोखा है।। इक सुख पाने की चाहत में , कितना सारे दुख […] Read more »
कविता वो बैठे फेसबुक खोले January 21, 2019 / January 21, 2019 by अजय एहसास | Leave a Comment नभ चाहें धरती डोले, वो बैठें फेसबुक खोलेउंगली करें होले होले,वो बैठें फेसबुक खोले!दुनिया भर के दोस्त बना दे, ये इण्टरनेट साइट, गीदड़ भी है यहाँ गरजते होकर इकदम टाइट।हैलो हाय बोलते रहते, हाउ आर यू कहते ,सुन्दरियों को देख एक पे सौ रिकवेस्ट हैं करते।हो स्वीकार थैंक्स बोले, वो बैठें फेसबुक खोले।उनकी एक पोस्ट […] Read more »
व्यंग्य साहित्य एहसास की अभिलाषा January 17, 2019 / January 17, 2019 by अजय एहसास | Leave a Comment तुम पुष्प से सुकुमार हो, तलवार की भी धार हो।तुम ही भविष्य हो देश का, मजधार मे पतवार हो।माँ भारती को मान दो, और बड़ो को सम्मान दो।जो दुष्टता करते यहाँ, उन दुष्टों को अपमान दो।कर्तव्य पथ पर बढ़ चलो, और जीत सिर पर मढ़ चलो।जो सतजनों को सताता हो, दुष्टों से जंग भी लड़ […] Read more » - एहसास की अभिलाषा
कविता पास वो मेरे इतने है कि दूरियों का अहसास नहीं January 16, 2019 / January 16, 2019 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment पास वो मेरे इतने है कि,दूरियों का अहसास नहीं कुछ बोलना चाहती हूँ,पर बोलने का साहस नहीं कहने को बहुत कुछ कह सकती,पर अभी समय नहींजुबान पर ताले पड़े है,पर वह चाबी मेरे पास नहीं जिन्दगी काट लेते है सभी,पर हमने काटी है ऐसे रोकर भी हँसते रहे,क्या ये कोई बात खास नहीं वो कौन सी दुश्मनी […] Read more » दूरियों का अहसास
कविता तिल की महिमा January 16, 2019 / January 16, 2019 by आर के रस्तोगी | Leave a Comment तिल गुड पर चिपक जाये,तो वह गजक हो जायेअगर तिल गाल पर हो ,सुन्दरता अजब हो जाये तिल करते करते जिन्दगी कम कम होती जायेतिल करते करते रोग अधिक भयानक हो जाये तेल तिलों से निकलत और किसी ने कंभी नाहिजिन तिलों में तेल नहीं वे तिल सूखे कहिलाय जिस अंग पर तिल है उसकी […] Read more » तिल की महिमा
कविता आर्त्त गैया की पुकार January 15, 2019 / January 15, 2019 by आलोक पाण्डेय | Leave a Comment _________________ कंपित ! कत्ल की धार खडी ,आर्त्त गायें कह रही –यह देश कैसा है जहाँ हर क्षण गैया कट रही !आर्त्त में प्रतिपल धरा, वीरों की छाती फट रहीयह धरा कैसी है जहाँ हर क्षण ‘अवध्या’ कट रही |आज सांप्रदायिकता के जहर में मार मुझको घोल रहा,सम्मान को तु भूल ,मुझे कसाई को तू […] Read more » cows calling to protect themselves गैया
कविता वहां बिना बात भी बात हुई । January 11, 2019 / January 11, 2019 by डॉ. सुधेश | Leave a Comment सुन्दर गुलाब सुन्दर गुलाब का फूल जो देखे जाए पल में खुद को ही भूल । चलो चूल्हा आ गया गैस भी आएगी नहीं आया कुछ अश्रुगेस तो आएगी ।न जानपहचान न कोई मुरव्वत हैकिसी बेगैरत से किस कोे मुहब्बत है ।पडौसी ऐसा तो दुश्मन किसे कह दूंउसे जिहाद से ही नहीं फुर्सत है ।वो दिन को […] Read more »
कहानी साहित्य शव का छलावा January 9, 2019 by जगदीश यादव | Leave a Comment रहस्य कथा जगदीश यादव श्मशान साधना कई तरहों से की जाती है। इस साधना का गूढ़ रहस्य तो वही साधक समझ सकता है जो इसकी जानकारी रखता हो या फिर उसने श्मशान साधना की होगी। बहरहाल आज आपको जो बताने जा रहा हूं वह भी कम रोमांचक नही है। ‘तेलिया मशान’ साधना से साधक किसी भी […] Read more »