वहां बिना बात भी बात हुई ।


सुन्दर गुलाब सुन्दर गुलाब का फूल 
जो देखे जाए पल में खुद को ही भूल ।

चलो चूल्हा आ गया गैस भी आएगी 
नहीं आया कुछ अश्रुगेस तो आएगी ।
न जानपहचान न कोई मुरव्वत है
‌किसी बेगैरत से किस कोे मुहब्बत है ।
पडौसी ऐसा तो दुश्मन किसे कह दूं
उसे जिहाद से ही नहीं फुर्सत है ।
वो दिन को रात रात को दिन कहता
उसे झूठ बोलने में बड़ी महारत है ।
ऐसे माहौल में जिन्दा अगर आदमी 
बस कि ऊपर वाले की इनायत है ।
हंस के देख लिया मेरी तरफ भी 
मुझ पै आप की बड़ी इनायत है ।
न मुल्ला मौलवी बचेगा न काफिर 
आने वाली एक दिन तो क़यामत है ।
न आना न जाना न मिलना जुलना
यही आजकल सब की 

वो क्या ज़िन्दगी है ज़िन्दगी सुधेश
न जिस में किस्सा है न हिकायत है ।

Leave a Reply

%d bloggers like this: