व्यंग्य साहित्य फिल्म वालों से नाराज कोटेश्वर …!! June 4, 2016 by तारकेश कुमार ओझा | Leave a Comment तारकेश कुमार ओझा जिंदगी मुझे शुरू से डराती रही है। इसके थपेड़ों को सहते – सहते जब मैं निढाल होकर नींद की गोद में जाता हूं, तो डरावने सपने मुझे फिर परेशान करने लगते हैं। जन्मजात बीमारी की तरह यह समस्या मुझे बचपन से परेशान करती आई है। होश संभालने के साथ ही मैं इस […] Read more » कोटेश्वर फिल्म वालों से नाराज
व्यंग्य साहित्य हम मिले, तुम मिले…. May 29, 2016 by विजय कुमार | Leave a Comment चिरदुखी शर्मा जी प्रायः दुखी ही रहते हैं; पर जब कभी वे खुश होते हैं, तो यह खुशी ‘इश्क और मुश्क’ की तरह छिपाए नहीं छिपती। उनकी कंजूसी के बारे में पूरा मोहल्ला जानता है; पर कल वे न जाने कहां से ढेर सारी बूंदी ले आये और सबको बांटने लगे। उनके घर के पास […] Read more » satirical article on third front तुम मिले.... हम मिले
व्यंग्य साहित्य स्टाम्प पेपर वाली निष्ठा May 28, 2016 by विजय कुमार | Leave a Comment आप चाहे कुछ भी कहें साहब, पर मैं हर क्षेत्र में नये विचार और प्रयोगों का पक्षधर हूं। भले ही पुरातनपंथियों को मेरी बात पसंद न आये; पर मैं अपने विचारों पर जितना दृढ़ कल था, उतना ही आज हूं और कल भी रहूंगा। असल में कल शाम को पार्क में इसी विषय पर चर्चा […] Read more » स्टाम्प पेपर वाली निष्ठा
व्यंग्य साहित्य कांग्रेस मुक्त भारत दल May 22, 2016 by विजय कुमार | Leave a Comment कोई भारत को धार्मिक देश कहता है, तो कोई सांस्कृतिक। कोई इसे अर्थप्रधान बताता है, तो कोई बलप्रधान। कोई सांप और सपेरों का देश कहता है, तो कोई ज्ञानियों का; पर मेरी विनम्र राय इस बारे में बहुत स्पष्ट है कि ‘मेरा भारत महान’ एक राजनीति प्रधान देश है। यहां कितने राजनीतिक दल हैं, शायद […] Read more » Featured कांग्रेस मुक्त भारत दल
व्यंग्य साहित्य अंक के लगाकर पंख , डिग्री मारे डंक May 14, 2016 by अमित शर्मा (CA) | Leave a Comment अच्छी शिक्षा-दीक्षा प्राप्त करना प्रत्येक नागरिक का सविंधान प्रदत्त अधिकार है , हालांकी आज के माहौल में शिक्षा प्राप्त करने के प्रयासों और उन प्रयासों से प्राप्त सफलता को देखते हुए लगता है की सविंधान निर्माताओं ने “राइट टू एजुकेशन” देकर सविंधान को ना केवल नीरस होने से बचाया है बल्कि आने वाली पीढ़ियों को […] Read more » अंक के लगाकर पंख डिग्री मारे डंक
व्यंग्य साहित्य मियाँ ये आशिकी इज्जत बिगाड़ देती है” May 11, 2016 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment क्यूँ रे अज्जू!!!!!! क्या हो रिया है आजकल काॅलेज में, क्या माहौल बना है!! अज्जू:- पीके भाई, काॅलेज का तो तुम पूछो ही मत अभी, अजब माहौल बना बैठा है आजकल तो!! पीके:- क्यूँ भाई ऐसा क्या गज्जब हुआ जा रहा है, क्या छात्र वात्र स्ट्राइक विस्ट्राइक कर बैठे है क्या?? अज्जू:- अरे नही नही […] Read more » मियाँ ये आशिकी इज्जत बिगाड़ देती है"
राजनीति व्यंग्य साहित्य रंज लीडर को बहुत है मगर… May 8, 2016 by विजय कुमार | Leave a Comment किसी राजनीतिक विश्लेषक ने कहा है कि दिल्ली का रास्ता लखनऊ से होकर जाता है; पर काफी समय से कांग्रेस के लिए लखनऊ के ही रास्ते बंद है। ऐसे में अपने बलबूते पर वह दिल्ली कैसे पहुंचे ? जीवन-मरण जैसा यह बड़ा प्रश्न मैडम जी के सामने है। वे कई साल से कोशिश में हैं […] Read more » Featured रंज लीडर को बहुत है मगर...
राजनीति व्यंग्य वायु सेना चीफ का सीबीआई जाना! May 4, 2016 by हरि शंकर व्यास | Leave a Comment अपन को रिटायर वायु सेना चीफ एसपी त्यागी का सीबीआई दफ्तर जाना अच्छा नहीं लगा! पैदल, कंधे पर एक बैग लटकाए, सीबीआई बिल्डिंग में जाते एसपी त्यागी की जो टीवी फुटेज देखी तो मन खिन्न हुआ। जो शख्स भारत की वायुसेना का प्रमुख रहा, जिसने लाखों सैनिकों को लीडरशीप दी उसका व्यक्तित्व-कृतित्व, उसकी गरिमा, प्रतिष्ठा […] Read more » Featured अगस्ता वेस्टलैंड एसपी त्यागी वायु सेना चीफ सीबीआई
व्यंग्य साहित्य चने के पेड़ पे…!! April 28, 2016 by तारकेश कुमार ओझा | Leave a Comment तारकेश कुमार ओझा दुनिया में कई चीजें दिखाई पहले पड़ती है , लेकिन समझ बाद में आती है। बचपन में गांव जाने पर चने के पेड़ तो खूब देखे। लेकिन इस पर चढ़ने या चढ़ाने का मतलब बड़ी देर से समझ आया।इसी तरह हेलीकाप्टर से घूम – घूम कर जनसभा को संबोधित करने , राजप्रसाद […] Read more » चने के पेड़
व्यंग्य साहित्य ईमानदार राजनीती पर भारी बेईमान मौसम April 23, 2016 by अमित शर्मा (CA) | 3 Comments on ईमानदार राजनीती पर भारी बेईमान मौसम आजकल गर्मी और आईपीएल के साथ साथ “सम-विषम” (ऑड-इवन) और पुतले लगाए जाने का भी मौसम हैं ताकि कलेजे से बीड़ी जला सकने वाले इस मौसम में चौके-छक्के , सुनी सड़के और अपने पंसदीदा पुतले देखकर आपकी रूह को बिना “रूह -अफजा” पिए ही ठंडक पहुँचे। इसी मौसम में “गतिमान एक्सप्रेस” भी लांच हो चुकी हैं लेकिन […] Read more » ईमानदार राजनीती बेईमान मौसम
व्यंग्य साहित्य किसी की सफलता , किसी की सजा…!! April 22, 2016 by तारकेश कुमार ओझा | Leave a Comment तारकेश कुमार ओझा उस दिन मैं दोपहर के भोजन के दौरान टेलीविजन पर चैनल सर्च कर रहा था। अचानक सिर पर हथौड़ा मारने की तरह एक एंकर का कानफाड़ू आवाज सुनाई दिया। देखिए … मुंबई का छोरा – कैसे बना क्रिकेट का भगवान। फलां कैसे पहुंचा जमीन से आसमान पर। और वह उम्दा खिलाड़ी कैसे […] Read more »
व्यंग्य साहित्य बाबा हँस रहे थे… April 18, 2016 by अमित राजपूत | Leave a Comment ∙ अमित राजपूत बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के पैदाईश की 125वीं सालगिरह पर मैं दिल्ली में ही था। अन्य लोगों की तरह मेरे लिए भी आज यह एक भरपूर छुट्टी का ही दिन है। लेकिन आज भी मुझे आकाशवाणी की शक्ल देखनी ही पड़ी। ख़ुदा का ख़ैर है कि आज रिपोर्ट बनाने से बचा […] Read more » Featured अंबेडकर जयंती बाबा हँस रहे थे...