लेखक परिचय

विजय कुमार

विजय कुमार

स्वतंत्र वेब लेखक व ब्लॉगर

राजनीति का कोढ़ : वंशवाद

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कल शर्मा जी मेरे घर आये, तो हाथ में मिठाई का डिब्बा था। उसका लेबल बता रहा था कि ये ‘नेहरू चौक’ वाले खानदानी ‘जवाहर हलवाई’ की दुकान से ली गयी है। डिब्बे में बस एक ही बरफी बची थी। उन्होंने वह मुझे देकर डिब्बा मेज पर रख दिया। – लो वर्मा, मुंह मीठा करो।… Read more »

   परबुद्ध सम्मेलन 

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मैं दोपहर बाद की चाय जरा फुरसत से पीता हूं। कल जब मैंने यह नेक काम शुरू किया ही था कि शर्मा जी का फोन आ गया। – वर्मा, पांच बजे जरा ठीक-ठाक कपड़े पहन कर तैयार रहना। दाढ़ी भी बना लेना। एक खास जगह चलना है। वहां से रात को खाना खाकर ही लौटेंगे।… Read more »



कूड़ाघर बनता भारत

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दिल्ली से उ.प्र. में प्रवेश करते समय गाजीपुर में बना कूड़े का पहाड़ सबको दिखता है। उड़ती हुई चीलें, कौए और कूड़े में से अपने काम की चीजें तलाशते बच्चे वहां हर दिन ही दिखायी देते हैं। ये बच्चे ऐसी चीजें बटोरते हैं, जो कबाड़ी के पास बिक सकें। कचरे के सड़ने से गैस बनती… Read more »

पैसे और परिवार में संतुलन जरूरी

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इन दिनों मीडिया में इंटरनेट के माध्यम से स्मार्ट फोन या कम्प्यूटर पर खेले जाने वाले खेल ‘ब्लू व्हेल’ की बहुत चर्चा हो रही है। इसने अब तक भारत में कई बच्चों की जान ले ली है। इस हिंसक खेल में बच्चों को 50 दिन में 50 कठिन काम करने होते हैं। इन्हें करते हुए… Read more »

कैसी और कितनी उच्च शिक्षा

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शिक्षा पर बात करने का हक यों तो शिक्षाविदों को ही है; पर कभी-कभी कुछ प्रसंग बाकी लोगों को भी सोचने को बाध्य कर देते हैं। गत 19 अगस्त, 2017 को ‘उत्कल एक्सप्रेस’ के 14 डिब्बे उ.प्र. के खतौली नगर में पटरी से उतर गये। इस दुर्घटना में 23 लोगों की मृत्यु हुई और सैकड़ों… Read more »

  सस्ता घुटना बदल   

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भारत सरकार ने दिल के बाद अब घुटनों की सर्जरी भी सस्ती कर दी है। इससे उन लाखों बुजुर्गों को लाभ होगा, जो कई साल से घुटना बदलवाना चाहते थे; पर शर्मा जी को लग रहा है कि इसके पीछे सरकार का कोई छिपा एजेंडा जरूर है। कल जब मैं उनके साथ चाय पी रहा… Read more »

पेशेवर कांग्रेस  

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  पिछले रविवार को शर्मा जी मिले, तो बहुत खुश थे। खुशी ऐसे छलक रही थी, जैसे उबलने के बाद दूध बरतन से बाहर छलकने लगता है। उनके मुखारविन्द से बार-बार एक फिल्मी गीत प्रस्फुटित हो रहा था, ‘‘दुख भरे दिन बीते रे भैया, अब सुख आयो रे..।’’ – शर्मा जी, क्या परिवार में कोई… Read more »

पारदर्शी चंदा, मुसीबत का धंधा   

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जब से वित्त मंत्री अरुण जेतली ने राजनीतिक चंदे को पारदर्शी बनाने की बात कही है, तब से कई दलों की नींद हराम है। यद्यपि जेतली ने अभी बस कहा ही है; पर सब जानते हैं कि जेतली ने कहा है, तो सरकार अंदरखाने जरूर कुछ तैयारी कर रही होगी। विपक्ष (और अधिकांश सत्तापक्ष) वालों… Read more »

हां, भगवान है   

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अब पटना में देखो। वहां विपक्ष से अधिक बखेड़ा सत्ता पक्ष में ही चल रहा है। पहलवान हर दिन लंगोट लहराते हैं; पर बांधते और लड़ते नहीं। लालू जी का निश्चय है कि उनके घर का हर सदस्य उनकी भ्रष्ट परम्परा को निभाएगा। उन्होंने चारा खाया था, तो बच्चे प्लॉट, मॉल और फार्म हाउस खा रहे हैं। आखिर स्मार्ट फोन और लैपटॉप वाली पीढ़ी अब भी घास और चारा ही खाएगी क्या ? उधर नीतीश कुमार अपने सुशासन मार्का कम्बल से दुखी हैं। पता नहीं उन्होंने कम्बल को पकड़ रखा है या कम्बल ने उन्हें। इस चक्कर में शासन भी ठप्प है और प्रशासन भी। फिर भी हर साल की तरह वहां बाढ़ आ रही है। इससे सिद्ध होता है कि भगवान का अस्तित्व जरूर हैं।

राहुल बाबा का गीता ज्ञान  

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मेरी राय है कि इसके बाद वे रामायण, महाभारत, वेद, पुराण और स्मृतियों का भी अध्ययन करें। अच्छा हो वे श्री गुरुग्रंथ साहब, बाइबल, कुरान, त्रिपिटक और जैनागम ग्रंथ भी पढ़ें। इससे उन्हें भारत में प्रचलित विभिन्न धर्म, पंथ, सम्प्रदाय और मजहबों के बारे में पता लगेगा। इस जन्म की तो मैं नहीं जानता, पर शायद इससे उनका अगला जन्म सुधर जाए।