समाज बढ़ते कामकाजी जीवन के दबाव में बिखरते परिवार December 30, 2025 / December 30, 2025 by ललित गर्ग | Leave a Comment व्यस्ततम, घटनाबहुल एवं कामकाजी जिंदगी जीने के साथ परिवार के लिए वक्त निकालना आज के इंसान के लिए ज्यादा जरूरी हो गया है। परिवार से यह जुुड़ाव व्यक्ति को न केवल भावनात्मक रूप से, बल्कि शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य के लिहाज से भी खुशनुमा Read more » दबाव में बिखरते परिवार बिखरते परिवार
समाज नक्सली आतंक से पूर्ण मुक्ति की ओर लाल गलियारा December 29, 2025 / December 29, 2025 by प्रमोद भार्गव | Leave a Comment माओवादी अर्से से देश में एक ऐसी जहरीली विचारधारा रही है, जिसे नगरीय बौद्धिकों का समर्थन मिलता रहा है। ये बौद्धिक नक्सली संगठनों को आदिवासी समाज का हितचिंतक मानते रहे हैं, जबकि जो आदिवासी नक्सलियों के विरोध में रहे, उन्हें इनकी हिंसक क्रूरता का शिकार होना पड़ा है। बावजूद इसे दुर्भाग्य Read more » Red Corridor towards complete freedom from Naxalite terror नक्सली आतंक से पूर्ण मुक्ति
समाज वीर बाल दिवस: युवा भारत की प्रेरणा December 27, 2025 / December 27, 2025 by डा. शिवानी कटारा | Leave a Comment डा. शिवानी कटारा भारत का इतिहास केवल तिथियों और युद्धों का संकलन नहीं है, बल्कि वह मानवीय साहस, नैतिक दृढ़ता और आत्मबल की जीवंत परंपरा है। वीर बाल दिवस, जो प्रत्येक वर्ष 26 दिसंबर को मनाया जाता है, इसी परंपरा का एक अमर अध्याय है। यह दिवस सिखों के दसवें गुरु गुरु गोबिंद सिंह के […] Read more » युवा भारत की प्रेरणा वीर बाल दिवस
शख्सियत समाज त्याग और बलिदान के सच्चे प्रतीक गुरू गोबिंद सिंह December 27, 2025 / December 27, 2025 by योगेश कुमार गोयल | Leave a Comment गुरु गोबिंद सिंह जयंती (27 दिसंबर) पर विशेष– योगेश कुमार गोयलसिखों के 10वें गुरु गोबिंद सिंह जी का प्रकाश पर्व इस वर्ष 27 दिसंबर को मनाया जा रहा है। हिन्दू कैलेंडर के अनुसार गुरु गोबिंद सिंह का जन्म 1667 ई. में पौष माह की शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को 1723 विक्रम संवत् को पटना […] Read more » a true symbol of renunciation and sacrifice Guru Gobind Singh गुरु गोबिंद सिंह जयंती
समाज आरक्षण का वास्तविक लक्ष्य क्या है December 27, 2025 / December 27, 2025 by राजेश कुमार पासी | Leave a Comment अगर आप आज के दलित संगठनों की गतिविधियों का आकलन करेंगे तो पाएंगे कि वो किसी एक लक्ष्य को लेकर चल रहे है और हर संगठन किसी विशेष जाति या वर्ग से जुड़ा होता है । सम्पूर्ण समाज की लड़ाई कोई नहीं लड़ रहा है, सबके अपने-अपने स्वार्थ हैं । आजकल सभी राजनीतिक दल सबसे गरीब आदमी की बात करके अपनी राजनीतिक रोटियाँ सेंकते है । Read more » What is the real aim of reservation आरक्षण का वास्तविक लक्ष्य
समाज हर साल दो लाख लोगों के देश की नागरिकता छोड़ने के मायने December 27, 2025 / December 27, 2025 by राजेश जैन | Leave a Comment देश की नागरिकता छोड़ने वालों के ये आंकड़े केवल संख्या नहीं हैं बल्कि गहरे सामाजिक-आर्थिक और राजनीतिक संकेत हैं। जब संसद को बताया जाता है कि 2011 से 2024 के बीच 20.6 लाख भारतीय देश से कानूनी रिश्ता तोड़ चुके हैं तो सवाल स्वाभाविक है, आखिर ऐसा क्या बदल गया है? Read more » The meaning of two lakh people giving up their citizenship every year देश की नागरिकता छोड़ने के मायने
समाज भाई दूर, पड़ोसी नेड़े — आधुनिक जीवन में पड़ोसी संबंधों की प्रासंगिकता December 27, 2025 / December 27, 2025 by सुरेश गोयल धूप वाला | Leave a Comment आधुनिक और तथाकथित उन्नत जीवन-शैली में पड़ोसी संबंध लगातार कमजोर होते जा रहे हैं। महानगरों की ऊँची-ऊँची इमारतों में लोग वर्षों तक साथ रहते हैं, फिर भी एक-दूसरे का नाम तक नहीं जानते। ऊपर-नीचे या अगल-बगल की मंज़िलों में रहने वाले लोग केवल औपचारिक ‘नमस्ते’ तक सीमित रह गए हैं। Read more » पड़ोसी संबंधों की प्रासंगिकता
शख्सियत समाज गुुरु गोविन्द सिंहः हिन्दू धर्म और संस्कृति के रक्षक December 27, 2025 / December 27, 2025 by ललित गर्ग | Leave a Comment गुरु गोविंद सिंह जी का जन्म 22 दिसंबर 1666 को पटना साहिब (वर्तमान बिहार) में हुआ। उनके पिता गुरु तेग बहादुर जी सिखों के नौवें गुरु थे, जिन्होंने धार्मिक स्वतंत्रता और मानव अधिकारों की रक्षा के लिए अपना सर्वाेच्च बलिदान दिया। Read more » Guru Govind Singh: Protector of Hindu religion and culture गुुरु गोविन्द सिंह जयन्ती
समाज शहरों की ओर युवाओं का बढता पलायन चिंताजनक December 27, 2025 / December 27, 2025 by डॉ वीरेन्द्र भाटी मंगल | Leave a Comment हमारा देश एक कृषि प्रधान देश है जिसकी आत्मा आज भी गांवों में बसती है किंतु वर्तमान समय में ग्रामीण युवाओं का बड़े पैमाने पर शहरों की ओर पलायन एक गंभीर सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक समस्या बनता जा रहा है। रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, आधुनिक जीवनशैली और बेहतर भविष्य की तलाश में गांव का युवा शहरों की Read more » The increasing migration of youth to cities is a matter of concern.
शख्सियत समाज कविता, करुणा और कूटनीति का अद्भुत संगम थे अटल बिहारी वाजपेयी December 25, 2025 / December 30, 2025 by योगेश कुमार गोयल | Leave a Comment सही मायने में अटल जी भारतीय राजनीति के आकाश का ध्रुवतारा थे। उनकी शख्सियत ऐसी थी कि हर राजनीतिक दल में उनकी स्वीकार्यता रही। 2005 में जब वाजपेयी जी ने राजनीति से सन्यास लेने की घोषणा की थी, तब तत्कालीन प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह ने ही उन्हें ‘मौजूदा राजनीति का भीष्म पितामह’ की संज्ञा दी थी। Read more »
समाज ईश्वर के अस्तित्व पर बहस निरर्थक है December 23, 2025 / December 23, 2025 by राजेश कुमार पासी | Leave a Comment वास्तव में सच तो यह है कि कोई भी ईश्वर के अस्तित्व को सिद्ध नहीं कर सकता, तो दूसरी तरफ कोई भी ईश्वर का अस्तित्व न होने को भी सिद्ध नहीं कर सकता । जावेद अख्तर ने तर्क दिया है कि जो ईश्वर के होने का दावा करते हैं, उन्हें ही Read more » ईश्वर के अस्तित्व ईश्वर के अस्तित्व पर बहस निरर्थक
शख्सियत समाज अटल : राजनीति की कालिख में भी धवल December 23, 2025 / December 23, 2025 by डा. विनोद बब्बर | Leave a Comment अटल जी के ओजस्वी भाषण न केवल उनके अपने दल के कार्यकर्ता बल्कि आम जनमानस को बहुत प्रभावित करते थे। अटल जी के भाषण, शालीनता और शब्दों की गरिमा का ऐसा अद्भुत मिश्रण होता था कि विरोधी भी उनके कायल है। सांसद के रूप में अटल जी आरंभ से ही अपने भाषणों की तैयारी बङी गंभीरता के साथ करते थे। Read more » अटल बिहारी वाजपेयी