लेखक परिचय

गौतम चौधरी

गौतम चौधरी

लेखक युवा पत्रकार हैं एवं एक समाचार एजेंसी से जुडे हुए हैं।

Posted On by &filed under राजनीति.


गौतम चौधरी

बाबा रामदेव के द्वारा किया गया कथित एतिहासिक अनशन का बडा बुरा हश्र हुआ है। रात के अंधेरे में बाबा को गिरफ्तार कर लिया गया। रामलीला मैदान को खाली कराने के लिए अर्धसैनिक बल एवं दंगा निरोधक दस्ते भेजे गये। समर्थकों पर लठियां बरसाई गयी। ध्यान और भगवान की भक्ति कर रहे श्रध्दालुओं को बुरी तरह पीटा गया। सुवह तक तो पता ही नहीं था कि आखिर बाबा को कहां ले जाया गया लेकिन दिन के 10 बजे के बाद वे देहरादून के जौलीग्रांड हवाई अड्डा पर देखे गये। जानकारी मिली है कि दिल्ली पुलिस ने बाबा के खिलाफ कई अरोप लगाये हैं। बाबा पर आरोप है कि वे सरकारी काम में बाधा पहुंचा रहे थे। उन्होंने दंगा भडकाने का प्रयास किया और सरकारी संपति को क्षति पहुंचाई है। आजकल मैं चण्डीगढ में अपनी संवाद समिति का काम देख रहा हूं। शनिवार को बाबा के समर्थकों के द्वारा उपवास और धराना स्थल पर भी गया था। बडी शांति थी। कार्यक्रम के संयोजक आर0 आर0 पासी लोगों से गुस्सा और आक्रोश थूक देने की बात कर रहे थे। लेकिन कहीं से कोई आवेश धरना स्थल पर नहीं दिखा। गुजरात, मध्य प्रदेश, छतीसगढ, बिहार, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड आदि राज्यों से मैं लगातार संपर्क में हूं। इन प्रांतों के बुध्दिजीवियों और पत्रकार, संवाददाताओं से भी जुडा हुआ हूं। यही नहीं दिल्ली में खुद मेरी संवाद समिति के संवाददाता गोविन्द चौधरी बाबा के कार्यक्रम को कवर कर रहे हैं। किसी ने नहीं कहा कि बाबा का आन्दोलन उतेजक था। बावजूद बाबा को खदेड दिया गया। इसे क्या कहा जये? लगातार लोकतंत्र की दुहाई देने वाली सरकार अगर अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन कर रही जनता पर लठियां बरसाती है तो भारत को एक लोकतांत्रिक देश कहा जाना बेईमानी नहीं तो और क्या है। आखिर रात के अंधेरे में सरकार और प्रशासन को कैसे खबर लग गयी कि बाबा दंगा भडकाने का काम कर रहे हैं? आष्चर्य की बात यह है कि दंगा भडकाने वाले बाबा के आगवानी में सुवह सरकार के चार केन्द्रीय मंत्री दिल्ली हवाई अड्डा पहुंच गये थे। बाबा पर अगला आरोप है कि उन्होंने सरकारी संपत्ति को नुक्षान पहुंचाया हैं। पंडाल बाबा के समर्थकों का, पंडाल में आग लगाने का काम प्रषान ने किया, आषू गैसे के गोले पुलिस ने दागे, पुलिस ने बाबा को गिरफ्तार कर लिया और उनके समर्थकों को बुरी तरत पीटा गया। फिर भी प्रषासन कह रही है कि बाबा ने सरकारी संपत्ति को नुक्षान पहुंचाया है। यह भी बात समझ से परे है कि आखिर रात में सरकार का ऐसा कौन सा काम चल रहा था जिसे बाबा और बाबा समर्थकों ने नहीं होने दिया। ऐसे कुछ मौलिक प्रष्न है जो सरकार और प्रषासन को कठघरे में खडा करता है।

भले बाबा यह मान कर चल रहे होगे कि धरना और अनशन शांतिपूर्ण संपन्न होगा लेकिन संकेत बता रहा था कि बाबा के साथ कुछ बुरा होने वाला है। इस स्थिति के लिए बाबा खुद जिम्मेबार हैं। अगर बाबा भी अन्ना हजारे की तरह संयुक्त प्रगतिषील गठबंधन अध्यक्ष सोनिया गांधी को केन्द्र में रखकर वार्ता करते तो बाबा को मखमली रास्ता प्रदान किया जाता लेकिन बाबा सोनिया और सोनिया गिरोह को खारिज कर प्रधानमंत्री डॉ0 मनमोहन सिंह को महत्व देने की कोषिश की जिसका खमियाजा बाबा को भुगतना पड रहा है। सोनिया के व्यक्तित्व का अध्यन करने वालो का मानना है कि सोनिया जी अपने सामने किसी को बरदास्त नहीं कर सकती हैं। हो सकता है बाबा को इस बात का एहसाश नहीं हो लेकिन बाबा ने जब संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की अध्यक्ष सोनिया को बाईपास कर प्रधानमंत्री डॉ0 मनमोहन सिंह को महत्व देना प्रारंभ किया तभी सोनिया गुट ने तय कर लिया होगा कि अब बाबा को छोडा नहीं नहीं जाएगा।

सोनिया ही नहीं सोनिया जी का पूरा गिरोह हिन्दू संतो को ठिकाना लगाने में लगा है। सोनिया जी और उनके प्रधान सिपहसलार मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विय सिंह हिन्दू संतों पर हल्ला बोले हुए हैं। बाबा ईसाई चर्च के भी टारगेट में हैं। जानकारी में रहे कि बाबा जैसे राफ साफ संतों को साधने के लिए ही मैडम मार्गेट अल्बा को उत्तराखंड की गवरनरी प्रदान की गयी है। बाबा ईसाई चर्च पर लगातार हमला बोल रहे हैं। इसलिए देश के अधिकतर संतों को बदनाम कर चुका ईसाई गिरोह अब बाबा के उपर हावी होना चाहता है। इस अभियान में भी ईसाई संगठनों ने संप्रग प्रमुख सोनिया को अपना हथियार बनाया है। सोनिया अपने से कुछ भी नहीं करती हैं। उनके सहयोगी के रूप में ईसाई चर्च ने तीन काडिनल बिठा रखे हैं। यहां दो बातों का उल्लेख करना जरूरी है। पहला कि ईसाई चर्च भारत के बहुसंख्यक हिन्दू और मुस्लमान दोनों को बदनाम कर ईसाई संप्रदाय को आदर्ष संप्रदाय साबित करने में लगा है। दूसरी बात यह है कि सोनिया जी अपनी संल्तनत सुरक्षित करना चाहती है। इधर प्रधानमंत्री डॉ0 मनमोहन सिंह को देश की चिंता है। लेकिन सोनिया और चर्च को इस बात से कोई लेना देना नहीं है। वे अपने स्वार्थ में लगे हैं। जिसका खामियाजा देश को भुगतना पड रहा है। सोनिया और उनके गुट के लोगों को प्रधानमंत्री डॉ0 मनमोहन सिंह की मजबूती खल रही है। इसलिए सोनिया जी डॉ0 सिंह को कोई मौका ही नहीं देना चाहती हैं। लेकिन आजकल देश की जनता समझने लगी है।

याद रहे अन्ना का डील खुद सोनिया जी ने किया था। अन्ना के अनशन के समय केन्द्रीय मंत्री सिब्बल, डॉ0 मनमोहन सिंह के प्रतिनिधि नहीं अपितु संप्रग अध्यक्ष सोनिया जी का प्रतिनिधि बनकर अन्ना हजारे के पास गये थे। तब अन्ना का आन्दोलन निष्कंटक संपन्न हुआ लेकिन बाबा ने अपने रास्तों में खुद कांटा बो लिया। अगर वे सोनिया का दामन थामे होते, जिसके लिए चार केन्द्रीय मंत्री उनकी आगवानी करने पहुंचे थे तो बाबा आज शांतिपूर्ण अनशन तोड रहे होते लेकिल बाबा का हठयोग सोनिया जी को ठीक नहीं लगा जिसका प्रतिफल सबके सामने हैं।

इस आन्दोलन का क्या हश्र हुआ या आगे क्या होगा यह तो अभी नहीं बताया जा सकता है लेकिन बाबा के आन्दोलन ने दो बातों की स्थापना कर दी है एक तो यह कि दस जनपथ और प्रधानमंत्री के बीच गतिरोध है और वह गतिरोध ताकत को लेकर है। दूसरी बात यह कि बाबा रामदेव का आन्दोलन ही सही मायने में जनता का आन्दोलन है। क्योंकि इससे सरकार घबराइ हुई है। हो सकता है बाबा के आन्दोलन को भी फिक्स करने का प्रयास किया गया होगा लेकिन बाबा का आन्दोलन फिक्स नहीं हो पाया और अब बात आगे निकल चुकी है। इधर अन्ना हजारे और उनके संगठन ने भी बाबा का समर्थन किया है जिससे यह साबित हो गया है कि सारे लोगों को यह लगने लगा है कि बाबा के साथ पूरा देश खडा है। अब एक बात यह होनी चाहिए कि देश के अंदर आन्दोलन को सोखने वाली ताकत को चिंहित कर उसको बेनकाब किया जाये। जबतक ऐसा नहीं होगा जबतक सोनिया जैसों को ईसाई चर्च अपना हथियार बनाता रहेगा।

2 Responses to “सोनिया और मनमोहन के बीच फंसे बाबा रामदेव”

  1. gabru

    ईसाई चर्च भारत के बहुसंख्यक हिन्दू और मुस्लमान दोनों को बदनाम कर ईसाई संप्रदाय को आदर्ष संप्रदाय साबित करने में लगा है।

    Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *