लेखक परिचय

तेजवानी गिरधर

तेजवानी गिरधर

अजमेर निवासी लेखक तेजवानी गिरधर दैनिक भास्कर में सिटी चीफ सहित अनेक दैनिक समाचार पत्रों में संपादकीय प्रभारी व संपादक रहे हैं। राजस्थान श्रमजीवी पत्रकार संघ के प्रदेश सचिव व जर्नलिस्ट एसोसिएशन ऑफ राजस्थान के अजमेर जिला अध्यक्ष रह चुके हैं। हाल ही अजमेर के इतिहास पर उनका एक ग्रंथ प्रकाशित हो चुका है। वर्तमान में अपना स्थानीय न्यूज वेब पोर्टल संचालित करने के अतिरिक्त नियमित ब्लॉग लेखन भी कर रहे हैं।

Posted On by &filed under राजनीति.


तेजवानी गिरधर

यह सही है कि 2जी स्पैक्ट्रम घोटाले के मामले में दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने वित्त मंत्री पी. चिदंबरम को पूर्व दूरसंचार मंत्री ए. राजा के साथ सह आरोपी बनाने की सुब्रह्मण्यम स्वामी की याचिका खारिज कर दी है और चिदंबरम को बड़ी भारी राहत मिल गई है, मगर खुद उनका यह कहना कि उन्होंने तो इस्तीफा तैयार कर रखा था, यह जाहिर करता है कि कहीं न कहीं उनमें अपराधबोध तो है ही। इसे ही तो कहते हैं चोर की दाढ़ी में तिनका। यदि वे इतने ही पाक साफ थे और उनकी कोई भूमिका नहीं थी, तो उन्हें ये लगा ही कैसे कि कोर्ट उन्हें सह आरोपी बना देगा और उन्हें इस्तीफा देना होगा। उन्होंने खुशी जताई कि कोर्ट ने उन्हें बेकसूर माना है, यानि कि वे तो मन ही मन अपने आपको कहीं न कहीं कसूरवार मान ही रहे थे, जबकि कोर्ट ने उन्हें बेकसूर करार दे दिया। अर्थात उन्हें यह तो लग रहा था कि उनसे कुछ न कुछ गलती हुई है, मगर कोर्ट उन्हें दोषी मान भी सकता है और नहीं भी। ऐसी अधरझूल की स्थिति उनकी कमजोर मानसिकता को उजागर करती है। तभी तो आरोप लगाने वाले भाजपा नेताओं पर उनका जवाबी नहीं हुआ, जबकि कपिल सिब्बल उझल पड़े।

इस मसले पर कपिल सिब्बल का भाजपा नेताओं से माफी मांगना निश्चित रूप से बचकाना बात है। यह ठीक है कि कोर्ट ने चिदंबरम को कसूरवार नहीं माना है, लेकिन मोटे तौर पर तो वे भी नैतिक रूप से जिम्मेदार थे ही। ऐसे में विपक्ष के नाते भाजपा का चिदंबरम पर हमले करना गलत कहां था? राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप चलते रहते हैं। सिद्ध तो कोर्ट को ही करना होता है। जाहिर तौर पर भाजपा को भी कोर्ट का फैसला मंजूर होगा ही। इस फैसले पर सिब्बल का खुशी में उछल कर भाजपा पर जवाबी हमला यह जता रहा है कि मानों उन्हें इस घोटाले पर कोई मलाल ही नहीं। क्या चिंदबरम को सह आरोपी न बनाने से इतने बड़े घोटाले के प्रति सरकार की जवाबदेही समाप्त हो जाती है? क्या कोर्ट ने ए. राजा को यूं ही जेल भेज दिया? क्या कोर्ट ने स्पैक्ट्रम के लाइसेंस यूं ही रद्द कर दिए? ऐसे ही अनेक ऐसे सवाल हैं, जिनका सिब्बल जैसे वरिष्ठ व तेज तर्रार वकील को देना आसान नहीं है।

6 Responses to “चिदंबरम की दाढ़ी में तिनका”

  1. इक़बाल हिंदुस्तानी

    iqbal hindustani

    सीवीसी वाले मामले में आप देख ही चुके हैं कि upa सर्कार कितनी बेशर्म और ढीट है इनको जब तक अदालत जेल नहीं भेज देती तब तक ये दोषी नहीं मानते. ऐसा वक्त करीब आ रहा है.

    Reply
  2. आर. सिंह

    R.Singh

    अभी मामला ख़त्म नहीं हुआ है.जस्टिस सैनी ने चिदंबरमके सम्बन्ध में जो टिप्पणी दी हैं,उसमे आगे के लिए अभी भी संभावनाएं हैं.उस टिप्पणी के आधार पर एक तो सुब्रह्मण्यम स्वामी अभी भी उनको उच्च या उच्चतम न्यायलय में घसीट सकते हैं.दूसरे उस टिप्पणी के आधार पर ए.राजा भी अपनी रिहाई की मांग कर सकते हैं.

    Reply
  3. Jeet Bhargava

    खूब. गिरधर जी सिर्फ तिनका नहीं, पूरी की पूरी दाढी ही भ्रष्टाचार की घास से भरी हुई है. जिस दिन आम जनता के वोट की माचिस जलेगी, ये भस्म हो जायेगी.
    खैर अभी तो सरकार के धुरंधर वकील नेता अपने कुतर्को से जनता को बेवकूफ बनाकर खुद को बहला रहे हैं.

    Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *