चीनी वस्तुओं पर भारी पड़ी देशभक्ति

देश में पूर्व से ही कई संस्थाओं ने विदेशी सामानों का विरोध किया है और आज भी कर रहे हैं। महात्मा गांधी भी पूरी तरह से विदेशी वस्तुओं के विरोध में रहे। यहां तक कि हमारे देश में स्वतंत्रता से पूर्व देश भाव के प्रकटीकरण के लिए विदेशी वस्तुओं की होली जलाई थी, ऐसा केवल इसलिए किया गया ताकि देश में स्वदेशी का भाव प्रकट हो सके, लेकिन आज हम क्या कर रहे हैं। स्वयं ही विदेशी सामान खरीदकर उनको आमंत्रित कर रहे हैं। यह बात सही है कि कोई देश भारत में व्यापार करके भारत का भला नहीं कर सकता, इस व्यापार के माध्यम से वह अपने आपको ही मजबूत करता है।

buycott-chinese-productसुरेश हिन्दुस्थानी

वर्तमान में हमारे देश में जिस प्रकार का वातावरण दिखाई दे रहा है, उसका प्रभाव देश के बाजार पर भी परिलक्षित होता दिखाई दे रहा है। भारत में प्रतिदिन घुसपैठ की योजना बनाकर अशांति पैदा करने वाले पाकिस्तान के प्रति चीन का दया भाव भारत के नागरिकों को अखर रहा है। इसी कारण से वर्तमान में चीन द्वारा निर्मित वस्तुओं के बहिष्कार की मांग देश के कौने कौने में जोर शोर से उठ रही है। इस बहिष्कार की मांग का व्यापक प्रभाव भी बाजार पर दिखने लगा है। जहां बाजार में चीनी वस्तुओं के प्रति कम लगाव दिखाई दे रहा है, वहीं देश का आम जनमानस भी चीनी वस्तुओं के प्रति कम रुचि दिखा रहा है। सुना यह भी जा रहा है कि इससे चीन के आर्थिक विशेषज्ञों ने नए सिरे से सोचने पर मजबूर कर दिया है।

हमारे देश में जितने भी महापुरुष हुए हैं, उनके जीवन में कुछ न कुछ ऐसा घटित हुआ है, जिससे देश भाव का साक्षात प्रकटीकरण हुआ है और उससे पूरे देश की जनता ने प्रेरणा प्राप्त की। उसी प्रेरणा से हमारे देश का युवा आज भी आप्लावित है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने मन से कभी भी अंग्रेजों की दासता स्वीकार नहीं की। बचपन से ही उनके मन में भारत के प्रति अप्रतिम तादात्म्य रहा। उसी के फलस्वरुप उन्होंने अंगे्रजों की महारानी के जन्म दिवस पर वितरित की जाने वाली मिठाई को एक कौने में फेंक दिया। बचपन की अवस्था में प्रस्फुटित यह भाव उनके जीवन में हमेशा दिखाई दिया। इसी प्रकार के जीवन से प्रेरणा लेकर देशवासियों के रोम-रोम में भारत की भक्ति का प्राकट्य होता रहता है। हालांकि इस दिशा में हमारे में कई राष्ट्रवादी संगठन राष्ट्रीय भावना को जगाने का अभूतपूर्व कार्य कर रहे हैं और करना भी चाहिए। क्योंकि वर्तमान में देश में कई प्रकार की विसंगतियों का प्रादुर्भाव हुआ है। जिनको मात्र देश भाव के प्रकटीकरण से ही दूर किया जा सकता है।

वर्तमान में पड़ौसी देश पाकिस्तान का पूरी तरह से साथ निभा रहे चीन का भारत के बाजारों पर अधिकतम कब्जा है। यहां तक कि बिना चीनी वस्तुओं के हमारे देश में दीवाली के दिए भी नहीं जलाए जाते। इस सबके बाद भी प्रसन्न करने वाली बात यह कही जा सकती है कि विगत मात्र दस दिनों में चीनी सामान की खरीददारी करने वाले लोगों की संख्या में 25 प्रतिशत तक की गिरावट देखी जा रही है। इस गिरावट को देखते हुए फिलहाल चीन ने अपनी नीतियों में तैयारी करने की योजना बनाई है। चीन चाहता है कि उसके लिए भारत का बाजार बंद नहीं होना चाहिए। इसके विपरीत भारत के लोगों में देश भाव के उभार के चलते बिना गारंटी और अविश्वसनीय चीनी सामान के प्रति लगाव कम होता जा रहा है। चीन ने जिस प्रकार से पाकिस्तान का साथ दिया है, उससे यह हश्र होना स्वाभाविक ही था। पहले चीन को लगता था कि भारत की जनता मूर्ख है, जो हमारे सामान को खरीदती है। लेकिन चीन को झटका उस समय लगा, जब भारत की जनता ने देशभक्ति का परिचय देते हुए चीनी सामानों को कुछ सीमा तक खरीदना ही बंद कर दिया। इसके बाद भी हमारा देशवासियों से मात्र इतना ही अनुरोध है कि जब सभी राष्ट्र अपनी राष्ट्रीयता के साथ दुनिया में खड़े हैं, उेसे में हम भारत के नागरिकों को भी खड़ा होना होगा। इस दीपावली पर देश भाव का प्रकटीकरण करें और चीनी सामान का पूरी तरह से परित्याग करें। ऐसा करने से चीन पूरी तरह से टूट जाएगा और वह भारत के सामने नतमस्तक होगा, यह तय है।

हमारे यहां सांस्कृतिक रुप से यह कहावत प्रचलित है कि दीपावली पर जब तक मिट्टी का दीपक नहीं जलाया जाएगा, तब तक दीपावली अधूरी ही मानी जाएगी। मां लक्ष्मी के समक्ष के समक्ष पुरातन काल से चली आ रही मिट्टी के दीपक जलाने की परंपरा ऋषि मुनियों द्वारा प्रारंभ की गई शाश्वत परंपरा का हिस्सा है, सब जानते हैं कि शाश्वत परंपराओं में कभी बदलाव नहीं किया जा सकता, लेकिन हमने अपने जीवन में सभी विधि विधानों का संक्षिप्तीकरण कर दिया। पूजा पद्धति का संक्षिप्तीकरण करना किसी भी प्रकार से सही नहीं है। मंत्र शक्ति भी केवल तभी काम करती है, तब पूजा पूरे विधि विधान से हो। विधान से पूजा करने के लिए विद्युतीय दीपक नहीं, बल्कि मिट्टी के दीपक जलाने की आवश्यकता है।

वर्तमान की चकाचौंध ने भले ही दीपावली का स्वरुप बिगाड़ दिया है, लेकिन हम आज भी शाश्वत परंपरा को नहीं भूले होंगे। हमें अच्छी प्रकार से पता है कि दीपावली कैसे मनाई जाती है। दीपावली पूरी तरह से स्वदेशी और भारतीय संस्कृति का प्रमुख त्यौहार है, इस त्यौहार पर हम विदेशी सामानों का उपयोग करके अपने साथ तो बेईमानी कर ही रहे हैं। साथ ही अपने देश के प्रति भी नाइंसाफी कर रहे हैं। हालांकि अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों के कारण केंद्र सरकार चीन के सामान के आयात को नहीं रोक सकती, पर हम लोग खुद चीन का सामान खरीदना बंद कर दें और स्वदेशी अपनाएं तो अपने आप चीन की अर्थव्यवस्था हिल जाएगी। उल्लेखनीय बात यह है कि चीन हमारे बाजारों में सामान बेचकर अपनी अर्थ व्यवस्था को मजबूत कर रहा है। वर्तमान में भारत देश चीन के लिए बहुत मददगार साबित हो रहा है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा बाजार है और चीन सहित दूसरे कई देश यहां अपना सामान बेचकर खुद को और अपने देश को मजबूत बना रहे हैं। इसलिए जब हम लोग चीन के सामान का बहिष्कार करेंगे तो चीन की अर्थव्यवस्था को बड़ा नुकसान होगा। यह करना इसलिए जरूरी है कि आज चीन पाकिस्तान का परोक्ष व अपरोक्ष रूप से सहयोग कर रहा है। कभी ब्रह्मपुत्र की सहायक नदी का पानी रोककर तो कभी पाकिस्तानी आतंकियों का समर्थन करके। इसलिए भारत की जनता को अब चीन को सबक सिखाने के लिए चीन के खिलाफ खड़ा होना चाहिए और चीनी सामानों का बहिष्कार करना चाहिए।

देश में पूर्व से ही कई संस्थाओं ने विदेशी सामानों का विरोध किया है और आज भी कर रहे हैं। महात्मा गांधी भी पूरी तरह से विदेशी वस्तुओं के विरोध में रहे। यहां तक कि हमारे देश में स्वतंत्रता से पूर्व देश भाव के प्रकटीकरण के लिए विदेशी वस्तुओं की होली जलाई थी, ऐसा केवल इसलिए किया गया ताकि देश में स्वदेशी का भाव प्रकट हो सके, लेकिन आज हम क्या कर रहे हैं। स्वयं ही विदेशी सामान खरीदकर उनको आमंत्रित कर रहे हैं। यह बात सही है कि कोई देश भारत में व्यापार करके भारत का भला नहीं कर सकता, इस व्यापार के माध्यम से वह अपने आपको ही मजबूत करता है। देश में स्वदेशी जागरण मंच के माध्यम से जनता को इस बात के लिए जागरुक करने का अभियान चलाया जा रहा है कि हम केवल स्वदेशी वस्तुओं का ही प्रयोग करें। विदेशी वस्तुओं के सामान खरीदने से हम अपने देश का कितना बड़ा नुकसान कर रहे हैं, यह हमें इस बात से पता चल जाएगा कि अंग्रेज हमारे देश में केवल व्यापारिक उद्देश्य लेकर आए थे। अंगे्रजों की ईस्ट इंडिया कंपनी ने अपना व्यापार बढ़ाकर भारत के बाजारों पर पूरी तरह से कब्जा कर लिया था और उसके बाद पूरे भारत को गुलाम बना लिया था। हमारे महापुरुषों ने स्वदेशी का भाव का प्रकटीकरण करके देशवासियों में भावना जगाई और अंग्रेजों की गुलामी से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त किया।

अब जरा सोचें कि जब एक ईस्ट इंडिया कंपनी बाजार पर कब्जा करके भारत को गुलाम बना सकती है तब आज तो कई विदेशी कंपनी भारत के बाजार पर हाबी हैं। विदेशी सामान नहीं खरीदने के प्रति हम सभी को जाग्रत होना होगा और अपने देश को मजबूत बनाने की दिशा में स्वदेशी सामान की खरीद को बढ़ावा देना होगा। इससे जहां हमारा पैसा विदेश में जाने से रुकेगा, वहीं हमारे देश में लघु उद्योग के माध्यम से व्यवसाय करने वाले भी अपनी दीपावली भी मना सकेंगे।

1 thought on “चीनी वस्तुओं पर भारी पड़ी देशभक्ति

  1. ऐसी कोई बात नजर नहीं आती है.. यह केवल शगूफा छोड़ रखा है राजनीतिक लाभ के लिए. जो लोग घटिया माल लेकर भी खुश रहे वे अब क्या बोलेंगे.. केवल राजनीति का भौंडापन बोल रहा है.

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