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    Homeसाहित्‍यकविताआशाओं के रंग

    आशाओं के रंग


    बने विजेता वो सदा, ऐसा मुझे यकीन ।
    आँखों में आकाश हो, पांवों तले जमीन ।।

    तू भी पायेगा कभी, फूलों की सौगात ।
    धुन अपनी मत छोड़ना, सुधरेंगे हालात ।।

    बीते कल को भूलकर, चुग डालें सब शूल ।
    बोयें हम नवभोर पर, सुंदर-सुरभित फूल ।।

    तूफानों से मत डरो, कर लो पैनी धार ।
    नाविक बैठे घाट पर, कब उतरें हैं पार ।।

    छाले पांवों में पड़े, मान न लेना हार ।
    काँटों में ही है छुपा, फूलों का उपहार ।।

    भँवर सभी जो भूलकर, ले ताकत पहचान ।
    पार करे मझदार वो, सपनों का जलयान ।।

    तरकश में हो हौंसला, कोशिश के हो तीर ।
    साथ जुड़ी उम्मीद हो, दे पर्वत को चीर ।।

    नए दौर में हम करें, फिर से नया प्रयास ।
    शब्द कलम से जो लिखें, बन जाये इतिहास ।।

    आसमान को चीरकर, भरते वही उड़ान ।
    जवां हौसलों में सदा, होती जिनके जान ।।

    उठो चलो, आगे बढ़ो, भूलो दुःख की बात ।
    आशाओं के रंग से, भर लो फिर ज़ज़्बात ।।

    छोड़े राह पहाड़ भी, नदियाँ मोड़ें धार ।
    छू लेती आकाश को, मन से उठी हुँकार ।।

    हँसकर सहते जो सदा, हर मौसम की मार ।
    उड़े वही आकाश में, अपने पंख पसार ।।

    हँसकर साथी गाइये, जीवन का ये गीत ।
    दुःख सरगम-सा जब लगे, मानो अपनी जीत ।।

    सुख-दुःख जीवन की रही, बहुत पुरानी रीत ।
    जी लें, जी भर जिंदगी, हार मिले या जीत ।।

    खुद से ही कोई यहाँ, बनता नहीं कबीर ।
    सहनी पड़ती हैं उसे, जाने कितनी पीर ।।

    डॉ. सत्यवान सौरभ
    डॉ. सत्यवान सौरभ
    रिसर्च स्कॉलर इन पोलिटिकल साइंस, दिल्ली यूनिवर्सिटी, कवि,स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार

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