-मिलन सिन्हा- Communal Politics1

 

लो, आ गया फिर चुनाव !

न जाने इस बार

किस -किस की डूबेगी नाव

इसी सोच में पड़े नेतागण

घूमेंगे अब गांव-गांव

पहले जहां यदा-कदा ही

पड़ते थे उनके पांव

लो, आ गया फिर चुनाव !

 

आज जब कि बाजार में

कई चीजों का बना है अभाव

और जो मिल भी रही है

उनका चढ़ा हुआ है भाव

तब हमारे गांवों-गलियों में

नेताओं का नहीं रहेगा अभाव

लो, आ गया फिर चुनाव !

 

खेलेंगे हर खेल, चलेंगे हर दांव

बदलते रहेंगे अपना हावभाव

पर चुनाव समाप्त होते ही

बदल जायेगा उनका स्वभाव

और फिर ख़त्म हो जाएगा

जनता से उनका कथित लगाव

लो, आ गया फिर चुनाव !

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