लेखक परिचय

दानसिंह देवांगन

दानसिंह देवांगन

बीएससी गणित, एमएम भाषा विज्ञान में गोल्ड मेडेलिस्ट और बीजेएमसी तक आपकी शिक्षा हुई है। विगत दस सालों से पत्रकारिता से जुड़े हुए हैं। जनसत्ता, दैनिक भास्कर, देशबंधु, नवभारत और जनमत टीवी से काफी समय तक जुड़े रहे। छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद पर बेबाकी से राय देने के लिए जाने जाते हैं। संप्रति आप दैनिक स्वदेश, रायपुर के संपादक हैं।

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कलमाड़ी की नजर में देश का कोई मायने नहीं

-दानसिंह देवांगन

जब से कामनवेल्थ गेम्स में भ्रष्टाचार का खुलासा होना शुरू हुआ है। देश का हर व्यक्ति सहम सा गया है। उन्हें समझ ही नहीं आ रहा है कि उनकी खून-पसीने की कमाई को कलमाड़ी एंड कंपनी ने कैसे अपनी तिजोरियों में बंद करने का प्लान बनाया। आज देश का बच्चा-बच्चा जानने लगा है कि कामनवेल्थ गेम्स में किस तरह का भ्रष्टाचार हो रहा है। उसके बावजूद सुरेश कलमाड़ी ने यह कहकर देश को शर्मसार कर दिया कि यदि सोनिया गांधी चाहेंगी तभी वे इस्तीफा देंगे, अन्यथा वे यूं ही देश के 110 करोड़ लोगों का खून चूसते रहेंगे। उनका यह ऐलान देश को हिला देने वाला है। उनका इशारा साफ है कि देश से यादा महत्वपूर्ण सोनिया गांधी है। जब तक सोनिया गांधी का वरदहस्त उन्हें प्राप्त है, मीडिया हो या विपक्ष कलमाड़ी का कोई बाल भी बांका नहीं कर सकता।

इस मुद्दे पर रोज लोकसभा और रायसभा में हंगामा हो रहा है, लेकिन न तो प्रधानमंत्री को इसकी चिंता है और न ही सोनिया गांधी को कोई फर्क पड़ता है। यही वजह है कि आयोजन समिति से जुड़े चार पदाधिकारियों को बाहर का रास्ता दिखाकर कलमाड़ी को पाक-साफ दिखाने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन हकीकत कुछ और ही है। कलमाड़ी कोई छोटा-मोटा आदमी नहीं है, बल्कि वे पश्चिम भारत में मारूति और बजाज वाहनों की सबसे बड़ी एजेंसी के मालिक हैं। वे खेल संघों को उद्योग की तरह चलाते हैं।

कामनवेल्थ गेम्स कलमाड़ी एंड कंपनी के लिए कमाई का एक बढ़िया जरिया बन गया था। आयोजन समिति के कोषाध्यक्ष इसके प्रत्यक्ष उदाहरण हैं, जिन्होंने टेनिस स्टेडियम में सिंथेटिक कोर्ट बिछाने का कार्य अपने ही पुत्र की कंपनी को दे दिया था। उन्हें भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते इस्तीफा देना पड़ा।

वो तो भला हो मानसूनी बारिश का, जिसकी वजह से स्टेडियम का छत टपकने लगा और शुरू हुआ भ्रष्टाचार और घोटालों के राजफाश होने का सिलसिला। दिल्ली में यदि जमकर बारिश नहीं होती, तो कामनवेल्थ गेम्स से जुड़े भ्रष्ट लोगों की पोल ही नहीं खुल पाती। केंद्रीय सत्ताधीशों के संरक्षण में पल रहे भ्रष्टाचारियों का पेट इतना बड़ा है कि अरबों रूपए डकार जाने के बाद भी उनके मुंह उफ तक नहीं निकलता। अधिकांश खेल संघों में अभी भी सालों से राजनीतिज्ञ काबिज हैं। कलमाड़ी खुद कांग्रेसी नेता हैं और पिछले 20 सालों से एथलेटिक फेडरेशन पर काबिज हैं वहीं 14 सालों से ओलिपिंक एसोसिएशन के अध्यक्ष पद पर कुंडली मारकर बैठे हुए हैं। इस देश में जब हर पांच साल में जनप्रतिनधि बदले जाने का नियम है। तो फिर उन्हें इतने सालों से आम आदमी का खून चूसने के लिए कैसे छोड़ दिया गया,यह समझ से परे है।

मुझे लगता है कि इस मामले में केंद्र सरकार भी उतना ही दोषी है, जितना कलमाड़ी एंड कंपनी। यदि ऐसा नहीं होता तो देश में खेलों के देखरेख के लिए सांसदों की उच्चस्तरीय समिति बनाने की मांग केंद्र सरकार नहीं ठुकराती और न ही कलमाड़ी गरजकर ये कह पाते कि उन्हें सोनिया गांधी या प्रधानमंत्री कहेंगे तभी इस्तीफा देंगे। मेरा मानना है कि अब वक्त आ गया है कि जब भ्रष्टाचार को भी हत्या के बराबर या उससे बड़ा अपराध मानकर दोषियों को फांसी की सजा देने का प्रावधान करना चाहिए। भ्रष्टाचार को हमारे देश में हल्के से लिया जाता है। इसकी सबसे बड़ी वजह भ्रष्टाचारियों के लिए कोई ठोस कानून का न होना है। जब एक व्यक्ति की हत्या करने पर फांसी की सजा का प्रावधान है तो कई लोगों का जीवन बरबाद करने वाले भ्रष्टाचारियों को महज कुछ सालों की सजा क्यों। यदि भ्रष्टाचार की वजह से कलमाड़ी के चार साथियों को बाहर का रास्ता दिखाया गया है तो सोनिया गांधी या प्रधानमंत्री को चाहिए कि वे इन भ्रष्टाचारियों के लीडर को न सिर्फ ओलंपिक संघ से हटाएं, बल्कि उनके खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच भी कराएं, ताकि 110 करोड़ भारतीयों के साथ न्याय हो सके, अन्यथा यह मान लिया जाएगा कि इस खेल में उनकी भी भागीदारी है।

9 Responses to “देश से बड़ी है सोनिया!”

  1. मिहिरभोज

    और किसी की तो नहीं कहता पर मनोज जी आप मेरे खाते मैं ७०००० करोङ रूपये जमा करवाईये तो इससे भी कम समय मैं याने इन्होने तो एक महिना नहीं बल्कि १० लिए तो मैं पांच साल मैं ऐसा आयोजन करवा सकता हूं…

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  2. manoj shrma

    परम सम्माननीय समस्त लेखक गड क्या आप मे से कोई भी पैसे के दम पर ही सही १ माह के अन्दर मात्र रास्ट्रीय स्तर के ऐसे खेल के आयोजन करने की छमता रखते है….?यहाँ प्रवक्ता में बैठ कर लोगो पर किछ्ड उछालने के बजाये आवो देश को सुधारने के लिए अपने स्तर पर कुछ कर दिखाए ……….मै आप सभी महानुभाव का प्रतिक्छा कर रहा हु और देखता हु मेरे ओर कितने हाथ आगे आते है …..
    आप सभी देश भक्तो के इंतजार में …

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  3. दानसिंह देवांगन

    dansingh dewangan

    श्रीरामजी मैंने सोनिया गाँधी को भ्रस्ताचारी नहीं कहा. आपने लेख पड़ा नहीं लगता है. कलमानी ने अपने बयान में कहा की सोनिया गाँधी यदि चाहंगे तभी मै इस्तिफा दूंगा. ये क्या दर्शाता है. सोनिया के कहने पर ही क्यों इस्तिफा दोगे भैया. यदि आप भ्रष्टाचारी नहीं है तो सोनिया के कहने पर क्यों पद छोड़ोगे. और यदि अपने गेम्स में कुछ काला पीला किया है तो ये पैसे सोनिया की तिजोरी से नहीं आया है. ये पैसा हमारे और आपके जेब से आया है. तो जब इतना आरोप लगा रहा है तो खुद पद से हट कर निष्पक्ष जांच की मांग खुद क्यों नहीं करते है.

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  4. श्रीराम तिवारी

    shriram tiwari

    अनिल सहगल जी के सुझाव पर देश की तमाम शांतिप्रिय और इमानदार जनता को गौर फरमाना चाहिए .इस प्रस्ताव को यदि संसद में लाया जाता है की भृष्ट अधिकारी .नेता या पूंजीपति को सजाये मौत दी जाए ;तो एक हजार साल तक वह प्रस्ताव पास नहीं होगा .क्योंकि कुएं में भंग पड़ी है .जिसकी पूंछ उठाओ ;मादा नज़र आता है .फिर प्रश्न बरकरार है की देश की अस्मिता को स्थापित करने का विकल्प क्या है ? सजाये मौत तो चीन;एवं सयुदी अरब .तथा कुछ तानाशाही व्यवस्थों में हो सकता है ;किन्तु भारत अनेक राष्ट्र्यीताओं की मिलन भूमि है .कोई पूर्व की और इश्वर को नमन करता है कोई पश्चिम की और .यहाँ की नदियाँ का बहाव भी विपरीत दिशाओं में याने कुछ पूरब की और तो कुछ पश्चिम की और बहतीं हैं . गंगा और यमुना या नर्मदा गोदावरी के पानी तक में ब्भिन्नता दृष्टिगोचर होती है .यहाँ एक कोष पर भाषा .दोकोस पर पानी और तीन कोस पर जीवन शैली बदल जाया करती है ;अतेव भारतीय सांस्कृतिक बहुलतावाद को लोकतांत्रिक व्यवस्था में ही सामान रूप से पुष्पित पल्लवित किया जा सकता है .भृष्टाचार को ख़त्म करने के दो ही रास्ते हैं .पहला -संपत्ति का वैयक्तिक अधिकार समाप्त हो ;अर्थात जो कुछ भी है सब देश का -कोम का .दूसरा-सजाये मौत चीन में तो दोनों ही एक साथ लागू हैं .वहां निर्दोष को सजा मिले ऐसा नहीं होता .भारत में वर्तमान न्याय व्यवस्था सेधान्तिक रूप से आदर्श और व्यवहार में ताकतवर की पक्षधरता के लिए प्रसिद्द है .

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  5. श्रीराम तिवारी

    shriram tiwari

    देश से बड़ा कोई नहीं .जो भी देश से विश्वासघात करेगा उसका हश्र -धोवी का कुत्ता ;न घर का न घाट का -ही होगा .यदि आप देशभक्त हैं तो देश के क़ानून पर कम से कम आप तो विश्वास रखें .आपकी न्याय पालिका पर भरोसा करें .सरकार के ईमानदार प्रधानमंत्री पर भरोसा करें .आप कलमाड़ी के बहाने सोनिया गाँधी तक पहुँच गए क्या गलत किया है ;सोनिया गाँधी ने ?उनके खिलाफ सबूत जुटाएं और इसी प्रवक्ता .कॉम पर जाहिर करें .और यदि नहीं हैं कोई प्रमाण तो अपना अधकचरा जन -मानस के बीच में फैलाने से बाज आयें .श्रीमती सोनिया गाँधी .का न तो में समर्थक हूँ और न ही कोंग्रेस जैसी भृष्ट पार्टी का सदस्य हूँ .किन्तु न्याय के साथ हूँ .इस हेतु इस प्रस्तुत आलेख में वर्णित निराशाजनक तस्वीर के वरक्स यह दावा करता हूँ की राष्ट्रमंडल खेल भारत में अच्छी तरह सम्पन्न होंगे .दुनिया में मेरे भारत का सर ऊँचा होगा .जो भृष्ट हैं उन्हें देश की जनता स्वयम पहचान लेती है .ठिकाने भी लगा देती है .

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  6. डॉ. राजेश कपूर

    Dr. Rajesh Kapoor

    दान सिंह देवांगन जी! ये आप क्या कह रहे हैं ? आपको नहीं पता की इस देश में अब एक ही चीज़ पवित्र, विवादों से परे और महान है. और वह है सोनिया जी व उनका परिवार. उनकी ओर संकेत करने का आपका साहस पता नहीं कैसे होगया ? भूल गए लगते हैं आप !सुब्रमण्यम स्वामी के शपथपत्रों का इस पवित्र नारी पर कोई असर हुआ. देश के एंटीक की इटली में बिक्री, ईसाई धर्मातरण के आरोप, अनगिनत मौकों पर देश के हितों के सौदे, बोफर्ज़, प्रधानमंत्री पद की लालसा, मोदी जी के विरुद्ध असभ्य व असंसदीय भाषा का प्रयोग आदि-आदि बहुत कुछ. पर इतने महान व्यक्तित्व के घड़े पर कोई बूंद नहीं ठहरने दी सोनिया जी के जरखरीद मीडिया ने. फिर आप का साहस कैसे हो गया? सारा देश तो नहीं पर हमारा पूरा कांग्रेसी कुनबा व राष्ट्रीय मीडिया उनकी महानताओं पर कुर्बान है. चाँद में दाग हो सकता है पर इन देवी जी में नहीं. अतः ज़रा संभलकर कर, सोच कर.

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  7. shishir chandra

    devangan ji aap ke saath main bhi khada hoon. yah desh ka durbhagya hai ki sonia gandhi desh ke saare faisle karti hai. bhrastacharion ko kadi se kadi saja ka pravdhan hona chahie.

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  8. श्रीराम तिवारी

    shriram tiwari

    खेल आयोजनों से आज तक कोई भी आयोजन करता देश किसी भी आर्थिक या सामाजिक प्रतिक्रांति का शिकार नहीं हुआ -इतिहास साक्षी है की जिस देश ने जितने ज्यादा कुशल खिलाड़ी ;कुशल वैज्ञनिक ;कुशल राजनीतिग्य तथा कुशल श्रमिक तैयार किये ;वह उतना ही उन्नति के शिखर पर आगे बढ़ता गया .रूस चीन .अमरीका जापान इंग्लॅण्ड या जर्मनी कोई भी विकसित राष्ट्र हो या इथोपिया मंगोलिया जैसे निर्धन राष्ट्र हो ;खेलों ने सभी को सुसभ्य तथा सुसंस्कृत किया है ;भारत में भी खेल को क्रन्तिकरी ढंग से आयोजित किया जाना चाहिए ;इसके लिए करोड़ों युवा बेरोजगारोंकी फौज इस देश में है .उत्तम कोटि की आवो हवा इस देश में हैं ;खाने को इतना अन्न उत्पादन किया है इस देश के किसानो ने की रखने की जगह नहीं है .रुपयों की भी कोई कमी नहीं -अकेले सवा लाख करोड़ तो सिर्फ फ़ोकट में स्पेक्ट्रम {आसमान में तरंगो की आवाजाही } नीलामी में हासिल हुआ है .देश के कुछ पूंजीपतियों को वेळ आउट पैकेज में जितनी छुट दी गई उसके दशमांश में खेल आयोजन निपटा या जा सकता है .दुनिया भर में कहा जा रहा है की भारत और चीन इस शताब्दी की प्रमुख आर्थिक शक्तियां होंगी .चीन ने न केवल अर्थ व्यवस्था में अपितु खेलों में भी अपने झंडे कब -कब कहाँ -कहाँ ‘गाड़े ; सभी को बेहतर मालुम है .ओलम्पिक की उसकी बेमिसाल झांकी संसार में असर छोड़ गई .हमें अभी शुरुआत करनी है .दोनों मोर्चे फतह करने हैं .अर्थ व्यवस्था की स्थिति को हम चीन के रास्ते ही उपर ला सकते हैं .खेलों के बारे में जो चीन ने शिद्दत से हासिल किया वह भी भारत को उसी रास्ते पाना होगा .राह कठिन है किन्तु असम्भव नहीं .

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  9. Anil Sehgal

    भ्रष्ट्राचार देश का सबसे बड़ा अपराध है तो सबसे बड़ी सजा, कतल की तरह, मौत का प्रावधान अब कर ही देना उचित होगा .

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