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    Homeसाहित्‍यकविताआँगन का आमरूद

    आँगन का आमरूद

    प्रभुनाथ शुक्ल

    मैं
    तुम्हारे आँगन का आमरूद हूँ
    तभी तो मैं महफूज़ हूँ
    तुमने
    मेरा बेइंतहा ख्याल रखा
    मुसीबतों से मुझे संभाल रखा

    मैं
    छोटा सा नन्हा एक बीज था
    कोई न मेरा अस्तित्व था
    तुमने
    मुझे उम्मीद से धरती में डाला
    अंकुरित हुआ तो मुझे पाला

    मैं
    खुद को कभी मरने नहीं दिया
    सपनों को टूटने नहीं दिया
    तुमने
    मेरे हौसले को बढ़ाया
    और संजीदगी से जिलाया

    मैं
    अब उम्मीदों के साथ खड़ा हूँ
    एक बीज से नन्हा सा पौधा हूँ
    तुमने
    मुझे सींचा और ताप से भी बचाया
    अब मैं तुम्हारी उमीदों का पेड़ हूँ

    प्रभुनाथ शुक्ल
    प्रभुनाथ शुक्ल
    लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं

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