दीपावली : अभिनन्दन गीत

    सखि जगमग दीवाली है आई, महिनवा कार्तिक का।
     देखो झूम झूम नाचे है मनवा, महिनवा कार्तिक का।।
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    अमावस की रात में अँधेरा था छाया,
    दीपों  की  ज्योति ने  उसको भगाया,
    जैसे भू  पर आकाश उतर आया, महिनवा कार्तिक का।।
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    लिपे  पुते घर  सजे  सजाए,
    फुलझड़ी पटाके हैं शोर मचाए,
    सजी घर घर में दीपों की माल, महिनवा कार्तिक का।।
         *
     खील-बताशे के ढेर लगे हैं,
     मेवे मिठाई भी ख़ूब सजे हैं,
     जैसे ख़ुशियों की आई बारात, महिनवा कार्तिक का।।
         *
     घर घर में गणपति-पूजन हुआ है,
     लक्ष्मी  का  आह्वान  हुआ  है ,
     गूँजी मंत्रों की पावन गुंजार, महिनवा कार्तिक का।।
          *
     बहिना ने भाई के टीका किया है,
     भाई  ने  भी  उपहार  दिया  है,
     आज प्रेमरस बरसै अँगनवा, महिनवा कार्तिक का।।
          *
      सखि जगमग दीवाली है आई, महिनवा कार्तिक का।
      सखि सबको है आज बधाई, महिनवा कार्तिक का।।
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                                   — शकुन्तला बहादुर

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