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    Homeसाहित्‍यकवितादेश की दशा के दर्शन

    देश की दशा के दर्शन

    चारो तरफ हाहाकार मचा है,
    दुखो का दौर अभी बाकी हैं।
    अभी तो केवल ट्रेलर देखा है,
    पूरी फिल्म देखना बाकी हैं।।

    अस्पतालों का है बुरा हाल,
    डॉक्टर नर्स नहीं मिलते हैं।
    जरूरी दवाओं की बात छोड़ो
    मास्क दस्ताने नहीं मिलते हैं।

    बढ़ते जा रहे रोज है मरीज,
    लाखो में संख्या है पहुंच गई।
    कैसे होगा इनका अब इलाज,
    ये समस्या अब गंभीर हो गई।

    खुल गई पोलपट्टी नेताओ की
    जो मीठे मीठे भाषण देते थे ।
    जनता को नए स्वप्न दिखाकर
    केवल अपनी ही जेबे भरते थे

    एक तरफ कोरोना फैला है,
    दूसरी तरफ बाढ़ आईं है।
    कर न सकी प्रबन्ध सरकारें,
    ये कैसी मुसीबत अब आई है।

    दिखा रहा है आंखे चीन एक तरफ,
    दूसरी तरफ पाक आतंकी है भेज रहा।
    दोनों से राेंज मुठभेड़ होती हैं
    परिणाम कुछ न निकल रहा।

    कहीं हो रही कुर्सी के लिए खींचतान,
    कहीं झूठे सच्चे दावे पेश हो रहे।
    कहीं लेे रहे है होटलों मै मज़े,
    कहीं लोग भूखे हैं मर रहे।।

    इससे ज्यादा क्या और लिखे रस्तोगी,
    जो देखा सुना वह अब लिख रहा।
    अब तो भगवान मालिक इस देश का,
    जो मुसीबतों के दौर से गुजर रहा।।

    रस्तोगी और क्या कराए देश के दर्शन,
    जो देख रहा है वह देश के दर्पण में।
    दर्पण कभी भी झूठ नही बोलता
    जो आया सामने उसके अर्पण में।।

    आर के रस्तोगी

    आर के रस्तोगी
    आर के रस्तोगी
    जन्म हिंडन नदी के किनारे बसे ग्राम सुराना जो कि गाज़ियाबाद जिले में है एक वैश्य परिवार में हुआ | इनकी शुरू की शिक्षा तीसरी कक्षा तक गोंव में हुई | बाद में डैकेती पड़ने के कारण इनका सारा परिवार मेरठ में आ गया वही पर इनकी शिक्षा पूरी हुई |प्रारम्भ से ही श्री रस्तोगी जी पढने लिखने में काफी होशियार ओर होनहार छात्र रहे और काव्य रचना करते रहे |आप डबल पोस्ट ग्रेजुएट (अर्थशास्त्र व कामर्स) में है तथा सी ए आई आई बी भी है जो बैंकिंग क्षेत्र में सबसे उच्चतम डिग्री है | हिंदी में विशेष रूचि रखते है ओर पिछले तीस वर्षो से लिख रहे है | ये व्यंगात्मक शैली में देश की परीस्थितियो पर कभी भी लिखने से नहीं चूकते | ये लन्दन भी रहे और वहाँ पर भी बैंको से सम्बंधित लेख लिखते रहे थे| आप भारतीय स्टेट बैंक से मुख्य प्रबन्धक पद से रिटायर हुए है | बैंक में भी हाउस मैगजीन के सम्पादक रहे और बैंक की बुक ऑफ़ इंस्ट्रक्शन का हिंदी में अनुवाद किया जो एक कठिन कार्य था| संपर्क : 9971006425

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