लेखक परिचय

संजीव कुमार सिन्‍हा

संजीव कुमार सिन्‍हा

2 जनवरी, 1978 को पुपरी, बिहार में जन्म। दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक कला और गुरू जंभेश्वर विश्वविद्यालय से जनसंचार में स्नातकोत्तर की डिग्रियां हासिल कीं। दर्जन भर पुस्तकों का संपादन। राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर नियमित लेखन। पेंटिंग का शौक। छात्र आंदोलन में एक दशक तक सक्रिय। जनांदोलनों में बराबर भागीदारी। मोबाइल न. 9868964804 संप्रति: संपादक, प्रवक्‍ता डॉट कॉम

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स्वस्थ बहस ही लोकतंत्र का प्राण होती है। ‘प्रवक्‍ता डॉट कॉम‘ पर हुए विचार-विमर्शों में हमने हमेशा आम आदमी की आवाजों को प्रमुख स्‍थान दिया है। हमने कहा है, ‘प्रवक्‍ता डॉट कॉम’ का मतलब ‘आवाज आपकी’। ‘प्रवक्‍ता’ पर हम एक नया स्‍तंभ ‘परिचर्चा प्रारंभ कर रहे हैं। यहां आप समसामयिक प्रश्‍नों पर अपने विचार व्यक्त कर सकते हैं। आपसे निवेदन है कि अश्लील, असंसदीय, अपमानजनक संदेश लिखने से बचें और विचारशील बहस को आगे बढाएं।

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे ने मराठी मानुष के नाम पर महाराष्ट्र में रह रहे ग़ैर-मराठियों के ख़िलाफ़ पिछले कुछ समय से अभियान चला रखा है।

हम यहां मनसे प्रमुख राज ठाकरे का बयान प्रकाशित कर रहे हैं-

नए अकादमिक सत्र की शुरुआत होने जा रही है और हम इन शिक्षण संस्थानों पर ऩजर रखेंगे। हम जानते हैं कि उत्तर-प्रदेश और बिहार के ये प्रभावी छात्र अहंकारी व्यवहार करते हैं और छेड़छाड़ आदि में लिप्त रहते हैं। अगर उनका रवैया नहीं बदला तो उन्हें सबक सिखाया जाएगा। (महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के कार्यकर्ताओं ने बिहार और उत्तर प्रदेश के छात्रों को कई इलाकों में घेर-घेर कर मारा। परीक्षा केंद्रों में घुसकर भी छात्रों की पिटाई और उन्हें वहां से भगा दिया।) छात्रों की पिटाई जायज है और पार्टी का यह अभियान जारी रहेगा।

उत्तर भारतीयों को महाराष्ट्र की संस्कृति से खिलवाड़ नहीं करने देंगे। बिहार से आए लोग ‘छठ का ड्रामा’ करके मुंबई में वर्चस्व स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। महाराष्ट्र में सिर्फ महाराष्ट्र दिवस मनाया जाएगा।

महाराष्ट्र के निवासी होने के बावजूद फिल्‍म अभिनेता अमिताभ बच्‍चन ने राज्य के लिए ख़ास कुछ नहीं किया। जब उन्हें (अमिताभ को) चुनाव लड़ना था तो वह इलाहाबाद चले गए। उन्होंने मुंबई से चुनाव क्यों नहीं लड़ा? यहाँ तक कि ब्रांड अंबेसडर बनने के लिए भी उन्होंने उत्तर प्रदेश को ही चुना। (सुपरस्टार अमिताभ बच्चन के घर पर राज ठाकरे के गुंडों ने हुड़दंग मचाया।)

भाषा बोलना, लिखना और पढ़ना आने से ही केवल काम नहीं चलेगा। मुंबई में उसे ही नौकरी दी जानी चाहिए जो इस राज्य में जन्मे हैं।

हिंदी राष्ट्रभाषा नहीं है। उसे केवल आधिकारिक भाषा का दर्जा प्राप्त है। संविधान में ये कहीं नहीं लिखा है कि हिन्दी राष्ट्रभाषा है फिर इसे लेकर इतना बवाल क्यों मचाया जा रहा है।  किसी की हिम्मत कैसे हो जाती है कि वो महाराष्ट्र में हिंदी में शपथ ले। (राज ठाकरे की धमकी के बावजूद विधानसभा में हिंदी में शपथ लेने पर समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आजमी को महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के एक विधायक राम कदम ने थप्पड़ मार दिया। उनके साथ हाथापाई की गई और उनपर लात-घूंसे भी बरसाए गए। राज ने विधानसभा में हिन्दी में शपथ लेने पर सपा विधायक अबू आजमी से हाथापाई करने वाले अपने विधायकों की पीठ थपथपाई।)

अगर महाराष्‍ट्र अलग राष्‍ट्र बन जाए तो इसके लिए हम जिम्‍मेदार नहीं होगे।

भाजपा का कहना है कि महाराष्ट्र में जो कुछ हो रहा है, वह कांग्रेस की घृणित विभाजनकारी राजनीति का खेल है। वह महाराष्ट्र का सामाजिक तानाबाना छिन्न-भिन्न कर प्रदेश को अराजकता के माहौल में झोंकना चाहती है। भाजपा का मानना है कि दरअसल कांग्रेस राज ठाकरे को मोहरा बनाकर मराठी वोटों को बांटने के साथ गैर मराठी वोटों को आंतकित कर हड़पना चाहती है।

कांग्रेस राज ठाकरे को हीरो बनाकर अपने पैर पर कुल्हाड़ी मार रही है। गौरतलब है कि 70 के दशक में बाल ठाकरे ने जब दक्षिण भारतीयों के खिलाफ अभियान चलाया था तब भी कांग्रेस का हाथ उनकी पीठ पर था और अब राज ठाकरे तथा उनके समर्थकों ने समूचे महाराष्ट्र में जो हिंसात्मक अभियान चलाया है उसे भी वहां की कांग्रेस सरकार के रवैये ने बल प्रदान किया है।

शिव सेना का कहना है कि राज ठाकरे का अंजाम जिन्ना जैसा ही होगा। जिन्ना ने देश तोड़ा और राज ठाकरे मराठी समाज को तोड़ रहे हैं। राज मराठियों को कांग्रेस की सुपारी लेकर तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। राज ठाकरे और उनके कार्यकर्ता “चूहा” हैं।

‘प्रवक्‍ता डॉट कॉम’ का मानना है कि राष्ट्र का निर्माण एक भूमि, एक जन और एक संस्कृति पर टिका होता है। समस्त भारत एक राष्ट्र है। राज ठाकरे अलगाववादी भावना भड़का रहे हैं। क्षेत्रवाद, राष्‍ट्रवाद के लिए चुनौती है। संकीर्ण स्‍वार्थों के लिए राष्‍ट्रीय अस्मिता को चुनौती देना खतरनाक है। राष्ट्रभाषा का अपमान खुली गद्दारी है और ऐसी गद्दारी के लिए कड़ी सजा दी जानी चाहिए।

31 Responses to “परिचर्चा : राज ठाकरे की राजनीति के बारे में आप क्‍या कहते हैं?”

  1. Dr. Ashok Kumar Tiwari

    मैंने इन देशद्रोहियों को इनके घर में ललकारा है ठाकरे जैसे लोगों को उनके बिल में ही बर्बाद कर देंगे अगर आप सब साथ हैं तो :- …………………………………मैं भारत के गुजरात राज्य के अहमदाबाद से लिख रहा हूँ यहाँ जामनगर जिले में रिलायंस की आइल रिफायनरी है जहाँ इम्प्लाई के साथ बहुत बुरा सलूक होता है , देश औरराष्ट्र भाषा हिंदी के खिलाफ खुलेआम बोला जाता है, समझाने पर मुझे नौकरी से भी हटा दिया गया है , आशा है आप इसे न्यूज़ में छापकर दिखायेंगे डिटेल इस प्रकारहै :- Please see on this news sight :-http://www.newsvision.biz/index.php?id=213&page=national&nws=1657
    ” हिन्दीदिवस की कोटि-कोटि शुभकामनाएँ” :- आज से लगभग दो साल पहले( १४-९-१०)रिलायंस पेट्रोलियम जामनगर ( गुजरात)के के.डी.अम्बानी विद्या मंदिर केप्राचार्य श्री एस.सुन्दरम ने प्रातःकालीनसभा में सभी के सामने कहा था “कौन बोलता है हिन्दी राष्ट्रभाषा है, बच्चों हिन्दी टीचर आपको मूर्ख बनाते हैं ऐसा संविधान में कहीं नहीं लिखा है.” हिन्दी मीटिंग में मैंनेइसके लिए निवेदनकिया था कि ऐसी बातें बच्चोंके सामने कहने से वो भाषा सीखने पर कम ध्यान देंगे. फलस्वरूप आज मैं रिलायंस स्कूल से बेइज्जत करके निकाल दिया गया हूँ तथा राष्ट्र भाषा के प्रति अपशब्द कहने वाले वहीं हैं.,जंग का ऐलान हो गया है,आप सबकी सहायता चाहिए, ऐसे ही मार्ग दर्शन व सहयोग देते रहिये तो निश्चित जीत हमारी होगी !!!!!
    मुझे ये लोग पहले ही गलत इल्जाम लगाकर निकाल दिए हैं-(मै क्लास-१०के फर्स्टटर्म की बोर्ड परीक्षा में परीक्षक था, मैंने हिन्दी एच.ओ.डी.के ओर्डर को स्वीकार करके बोर्ड पेपर के कारण प्राचार्य से क्न्फर्मेसन चाहा था पर उसे ये डिनाई ऑफ़ ड्यूटी कहकर मुझे निकाल दिए हैं जिस पर निष्पक्ष जाँच होतो मैं निर्दोष हूँ पर ये ऐसा नहीं कर रहे हैं ) , मैंने गुजरात हाई कोर्ट में केस किया है , जिसकी सूचना व नोटिस इन लोगों को जा चुकी है पर ये कोर्ट को भी महत्व नहीं देते हैं, महामहिम राष्ट्रपति महोदया तथा प्रधानमंत्री भारत सरकार के कार्यालय से चीफ सेक्रेटरी गुजरात को तत्संबंधित पत्र भी आया है, पर ये उसे भी नहीं मान रहे हैं .(हमारा परिवार हिंदी विरोधी मानसिकता का शिकार हो रहा है, मेरे बच्चों तक को प्रताड़ित किया जा रहा है –
    छात्र -छात्राओं के प्रति भी इनका व्यवहार निर्दयतापूर्ण रहा है यही कारण है कि १० वीं कक्षा के बाद अच्छे बच्चे विद्यालय छोड़कर चले जाते हैं, जिस समय मेरे पुत्र की प्री बोर्ड परीक्षा थी – मुझे सस्पेंड किया गया, फिर महीनों रुके रहे जैसे ही बोर्ड परीक्षा 2011 शुरू हुई मेरी इन्क्वायरी भी शुरू करवा दिए, उसके पेपर के पहले इन्क्वायरी तिथि रख करके उसे डिस्टर्ब करने का प्रयास किये, इन्टरनेट कनेक्सन भी कटवा दिया जिससे वो अच्छी तैयारी नहीं कर सका और परीक्षा ख़त्म होते ही रोते हुए अहमदाबाद आ गया. मैं १०-अ का अध्यापक था उन बच्चों का भी नुक्सान हुआ है जिनको मैं पढ़iता था . मेरी पत्नी तथा बच्ची को जेंट्स सेक्युरिटी भेजकर – भेजकर प्रताड़ित करवाते रहे और नौकरी छोड़ने पर मजबूर कर दिए .) कृपया मदद करें). इस पर आपकी सहायता चाहिए जिससे रिलायंस और के०डी० अम्बानीस्कूल वाले भी मानवाधिकार का पालन करना सीख जाएँ कृपया मदद करके हमें अनुग्रहीत करें. बहुत – बहुत धन्यवाद .
    प्रार्थी :

    ( डॉ.अशोक कुमारतिवारी )
    हिंदी पी० जी०टी०, के० डी०अम्बानी विद्या मंदिर, रिलायंसटाउनशिप, जामनगर(गुजरात )- ३६११४२, दिनांक-7-5-12, वर्तमान पत्राचारका पता :- डॉ.अशोक कुमारतिवारी, पी -२०१.इन्द्रप्रस्थ टॉवर, निकट – हिमालयामाल, ड्राइव इन रोड, अहमदाबाद – ३८००५२, संपर्क-९४२८०७५६७४,८१२८४६५०९२,ईमेल-Dr.ashokkumartiwari@gmail.com, ashokktiwari07@yahoo.co.in

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  2. Jeet Bhargava

    दो बाते:
    एक तो राज ठाकरे की कई बातो में दम होता है.

    दूसरा वह तब ही भड़कता है, जब उसे भड़काने के लिए संजय निरुपम, कृपाशंकर सिंग, अबू आजमी, लालू, राहुल गेंदी, जैसे घोल हिन्दू विरोधी बयानबाजी करते हैं.

    महाराष्ट्र में मराठी-उत्तर भारतीय हिन्दू वोटो में विभाजन की नीयत के साथ ये सेकुलर नेता बार-बार बेवजह राज ठाकरे को भड़काते हैं. और अपना उल्लू सीधा करते हैं. जबकि राजठाकरे की पार्टी में कई उत्तरभारतीय लोग बड़े पदों पर हैं.

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  3. पप्पू मिश्र

    दरअसल राज ठाकरे की राजनीति उस मुद्दे पर टिकी है, जिसे हमारे निठल्ले राजनेताओं ने
    कभी सोचा ही नहीं। यदि बिहार और उत्तरप्रदेश का अपेक्षित विकास होता, तो भला यहां के लोग मुंबई क्यों जाते। एक शहर का इंफ्रास्ट्रक्चर किस तरह किस तरह बढ़ती भीड़ के चलते
    डांवाडोल हो जाता है। आप मुंबई जा कर देख सकते हैं। बिल्कुल सच है कि मुंबई भारतीयों की है। लेकिन सबसे पहले पटना पटनावासियों का है, दरभंगा के संसाधनों पर दरभंगा के लोगों का अधिकार है। गाजीपुर के संसाधनों पर गाजीपुर के लोगों का अधिकार है। इलाहाबाद के संसाधनों पर सर्वप्रथम इलाहाबादियों का अधिकार है। उसी प्रकार मुंबई पर पहला अधिकार मुंबई वालों का होना चाहिए। आर्थिक संदर्भ में इसके फायदे भी हैं। यदि यूपी के लोग यूपी में रोजगार नहीं पाते तो इसमें मुंबई के लोगों का दोष न होकर यूपी और बिहार के नेताओं का दोष है वहां की जनता को उनसे हिसाब मांगना चाहिए। भला आप ही बताइए यदि प्रवासन रुक जाए तो परिवहन की समस्या खत्म हो जाएगी। फिर यूपी और बिहार से चार हजार की नौकरी करने मुंबई या दूसरे महानगरों का रुख करने वाले लोगों की बचत कितनी हो पाती है। क्या वो अपने बच्चों को भली भांती पढा सकते हैं।

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  4. VIJAY SONI ADVOCATE

    होठों पे सच्चाई रहती है ,जहाँ दिल में सफाई रहती है ,
    हम उस देश के वासी हैं ,हम उस देश के वासी हैं –
    जिस देश में गंगा बहती है …जिस देश में गंगा बहती है …जिस देश में गंगा बहती है …

    सभी ठाकरे बंधुओं को ये सोच जागृत करनी चाहिए ..हिंदुस्तान और हिन्दू एक रहें चाहे देश के किसी भी प्रदेश का वासी हो ,ये याद रखें की …हम उस देश के वासी हैं ..जिस देश में गंगा बहती है ..जिस देश में गंगा बहती है …विजय सोनी अधिवक्ता दुर्ग छत्तीसगढ़

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    • Dr. Ashok Kumar Tiwari

      आपने बहुत सही कहा है आप वकील हैं कृपया बताएँ क्या गुजरात की इन राष्ट्रविरोधी घटनाओं पर याचिका दायर हो सकती है :- ………………………………………………..मैं भारत के गुजरात राज्य के अहमदाबाद से लिख रहा हूँ यहाँ जामनगर जिले में रिलायंस की आइल रिफायनरी है जहाँ इम्प्लाई के साथ बहुत बुरा सलूक होता है , देश औरराष्ट्र भाषा हिंदी के खिलाफ खुलेआम बोला जाता है, समझाने पर मुझे नौकरी से भी हटा दिया गया है , आशा है आप इसे न्यूज़ में छापकर दिखायेंगे डिटेल इस प्रकारहै :- Please see on this news sight :-http://www.newsvision.biz/index.php?id=213&page=national&nws=1657
      ” हिन्दीदिवस की कोटि-कोटि शुभकामनाएँ” :- आज से लगभग दो साल पहले( १४-९-१०)रिलायंस पेट्रोलियम जामनगर ( गुजरात)के के.डी.अम्बानी विद्या मंदिर केप्राचार्य श्री एस.सुन्दरम ने प्रातःकालीनसभा में सभी के सामने कहा था “कौन बोलता है हिन्दी राष्ट्रभाषा है, बच्चों हिन्दी टीचर आपको मूर्ख बनाते हैं ऐसा संविधान में कहीं नहीं लिखा है.” हिन्दी मीटिंग में मैंनेइसके लिए निवेदनकिया था कि ऐसी बातें बच्चोंके सामने कहने से वो भाषा सीखने पर कम ध्यान देंगे. फलस्वरूप आज मैं रिलायंस स्कूल से बेइज्जत करके निकाल दिया गया हूँ तथा राष्ट्र भाषा के प्रति अपशब्द कहने वाले वहीं हैं.,जंग का ऐलान हो गया है,आप सबकी सहायता चाहिए, ऐसे ही मार्ग दर्शन व सहयोग देते रहिये तो निश्चित जीत हमारी होगी !!!!!
      मुझे ये लोग पहले ही गलत इल्जाम लगाकर निकाल दिए हैं-(मै क्लास-१०के फर्स्टटर्म की बोर्ड परीक्षा में परीक्षक था, मैंने हिन्दी एच.ओ.डी.के ओर्डर को स्वीकार करके बोर्ड पेपर के कारण प्राचार्य से क्न्फर्मेसन चाहा था पर उसे ये डिनाई ऑफ़ ड्यूटी कहकर मुझे निकाल दिए हैं जिस पर निष्पक्ष जाँच होतो मैं निर्दोष हूँ पर ये ऐसा नहीं कर रहे हैं ) , मैंने गुजरात हाई कोर्ट में केस किया है , जिसकी सूचना व नोटिस इन लोगों को जा चुकी है पर ये कोर्ट को भी महत्व नहीं देते हैं, महामहिम राष्ट्रपति महोदया तथा प्रधानमंत्री भारत सरकार के कार्यालय से चीफ सेक्रेटरी गुजरात को तत्संबंधित पत्र भी आया है, पर ये उसे भी नहीं मान रहे हैं .(हमारा परिवार हिंदी विरोधी मानसिकता का शिकार हो रहा है, मेरे बच्चों तक को प्रताड़ित किया जा रहा है –
      छात्र -छात्राओं के प्रति भी इनका व्यवहार निर्दयतापूर्ण रहा है यही कारण है कि १० वीं कक्षा के बाद अच्छे बच्चे विद्यालय छोड़कर चले जाते हैं, जिस समय मेरे पुत्र की प्री बोर्ड परीक्षा थी – मुझे सस्पेंड किया गया, फिर महीनों रुके रहे जैसे ही बोर्ड परीक्षा 2011 शुरू हुई मेरी इन्क्वायरी भी शुरू करवा दिए, उसके पेपर के पहले इन्क्वायरी तिथि रख करके उसे डिस्टर्ब करने का प्रयास किये, इन्टरनेट कनेक्सन भी कटवा दिया जिससे वो अच्छी तैयारी नहीं कर सका और परीक्षा ख़त्म होते ही रोते हुए अहमदाबाद आ गया. मैं १०-अ का अध्यापक था उन बच्चों का भी नुक्सान हुआ है जिनको मैं पढ़iता था . मेरी पत्नी तथा बच्ची को जेंट्स सेक्युरिटी भेजकर – भेजकर प्रताड़ित करवाते रहे और नौकरी छोड़ने पर मजबूर कर दिए .) कृपया मदद करें). इस पर आपकी सहायता चाहिए जिससे रिलायंस और के०डी० अम्बानीस्कूल वाले भी मानवाधिकार का पालन करना सीख जाएँ कृपया मदद करके हमें अनुग्रहीत करें. बहुत – बहुत धन्यवाद .
      प्रार्थी :

      ( डॉ.अशोक कुमारतिवारी )
      हिंदी पी० जी०टी०, के० डी०अम्बानी विद्या मंदिर, रिलायंसटाउनशिप, जामनगर(गुजरात )- ३६११४२, दिनांक-7-5-12, वर्तमान पत्राचारका पता :- डॉ.अशोक कुमारतिवारी, पी -२०१.इन्द्रप्रस्थ टॉवर, निकट – हिमालयामाल, ड्राइव इन रोड, अहमदाबाद – ३८००५२, संपर्क-९४२८०७५६७४,८१२८४६५०९२,ईमेल-Dr.ashokkumartiwari@gmail.com, ashokktiwari07@yahoo.co.in
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      देवेंद्र सिंह नेगी and 2 others like this..
      देवेंद्र सिंह नेगी :-
      राष्ट्रभाषा हिंदी के प्रति आपकी निष्ठा, लग्न एवं अगाध प्रेम की भावना और समर्पण वन्दनीय है । आप हिंदी में लिख रहे है निश्चित रूप से हिंदी के प्रति आपका प्रेम प्रशंसनीय और अतुलनीय है। आपका हिन्दी लेख/संदेश/पोस्ट बहुत ही ज्ञानवर्धक, बहुत ही रोचक,सार्थक और विश्लेष्णात्मक है ! मातृ-भाषा के प्रति सम्मान प्रकट करने वाला आपका ये सुंदर आलेख पढ़कर बहुत अच्छा लगा । राष्ट्र भाषा हिंदी में लिखने वालों को और हिंदी भाषा का सम्मान करने वालों को मेरा हार्दिक आभार ।
      “हिन्दी हमारी राष्ट्रभाषा/मातृभाषा है”, “हिन्दी अपनाओ”
      “हिन्दी हैं हम, वतन है हिन्दोस्तान हमारा”
      जापान, चीन, रूस जैसे विकसित देशों ने अपनी मातृभाषा को महत्त्व दिया है और निरन्तर प्रगतिमान हैं।
      वन्दे मातरम
      10 hours ago • Unlike • 1.
      देवेंद्र सिंह नेगी : सर मैंने भी अभी इसी साल अपना बी. टेक किया है ,और मै इंग्लिश भी जानता हूँ लेकिन मै हमेशा हिंदी को प्राथमिकता देता हूँ ….
      10 hours ago • Unlike • 2.
      DrAshok Kumar Tiwari : धन्यवाद मित्र राष्ट्रभाषा की इस लड़ाई में आप जैसे मित्रों के भरोसे ही खड़ा हूँ …..साथी हाथ बढ़ाना साथी…………
      10 hours ago • Unlike • 2.
      Prashant Singh :-
      अशोक जी हमें बहुत ही अच्छा लगा की आपने अपने आत्म सम्मान को नही गंवाया , ना ही उनके आगे झुके ! यह बहुत ही प्रसंसनीय है . हम आपके साथ है . आपकी लड़ाई में भी साथ है …उनको सम्बिधान का ज्ञान नहीं है ..लेकिन उनको सायद ये तो पता ही होगा की साल मे एक दिन हिन्दी दिवस मनाया जाता है …..! लेकिन क्यों मनाया जाता है उनको ये नहीं पता …? कोई बात नहीं …हम बतायेंगे उनको ..क्या किसी दिन बंगला या इंग्लिश या गुजरती या मराठी या तमिल या कन्नड़ आदि जितनी भी हमारी मात्रि भाषा / राज्य भाषा है उसको मनाया जाता है .??????????? नहीं …तो क्यों ????? ….अब बात करते है उनकी उनका स्कूल कितने एकड़ में है …और उनको जब मान्यता दी गई तो उसकी शर्ते क्या थी ….? वों कितने गरीब बचो को पढते है ..आदि आदि आपप वंहा एक आरटीई डालकर पता करिये वों आपके घर तक आपको लेने आयेंगे …पुरे सम्मान के साथ ….जय हिंद ..जय हिंदू जय हिन्दुस्तान
      10 hours ago • Unlike • 1.
      C.l. Chumber : Very bad for them .
      10 hours ago via mobile • Like.
      DrAshok Kumar Tiwari : धन्यवाद मित्रों आप सब के भरोसे ही सभी कष्टों को सह रहा हूँ कोटि- कोटि धन्यवाद………………………………………
      10 hours ago • Unlike • 2 Rohit Kumar like this..
      Rohit Kumar: Sir apko salute karta hu
      अपील :-
      प्रेस रिलीज़ नोट्स :-
      “मै हिन्दीविरोधी मानसिकता का शिकार हुआ हूँ ” केवल मै ही नहीं मेरी पत्नी भी हिंदी टीचर हैं
      प्रिंसिपल सुन्दरम ने१४ सितम्बर ( हिंदीदिवस ) के दिनबच्चों को सामनेकहा था ” कौन बोलताहै हिंदी राष्ट्र भाषाहै,हिंदी टीचरबच्चों को मूर्खबनाते हैं.” इस परमैंने हिंदी मीटिंगमें निवेदन कियाक़ि बच्चों केसामने ऐसी बातकहने से वोहिंदी नहीं पढेंगेतभी से प्रिंसिपल सुन्दरम पीछेपड़े हैं , इसकेपहले भी ए१११२ से हिंदीविषयहटा दिए हैं जिसकेलिए सुश्री रूपलसिपानी को परेशानी हुईतथा रियाकार नेतो स्कूल हीछोड़कर हिंदी पढ़ा,हिंदी रामायण औरमहाभारत की डी. व़ी.डी. का ओर्डरही कैंसिल करदिए, किसी पुरानेहिंदी टीचर कोपरमोसन न देकरआलोक के सम्बन्धी कुलकर्णी कोआब्जर्वेसन समय में हीपरमोसन दिए, मुझेगलत तरह सेएच ओ डीपद से हटाएपर किसी सीनियरलेडी टीचर कोमौका न देकरभरत को एचओ डी बनाएजो बिना किसीअनुभव के हीगलत तरह सेटी जी टीबनाए गए थे,वास्तव में प्रिंसिपल सुन्दरम खुदबी एड नहींहै इसलिए अपनेआसपास एच.ओ.डी. – कोआर्डिनेटर सभीकम पढ़े लिखेकी टीम बनारहे हैं, कृपयासबकी डिग्रियां चेककरवा लें . प्रिंसिपल सुन्दरम केआने के बादसे अब तकलगभग ६० पुरानेपढ़े लिखे अच्छेटीचर स्कूल छोड़करचले गए हैंइसलिए सीनियर केबच्चे भी विद्यालय छोड़करजा रहे हैं,उनसे भी जानकारी लेनीचाहिए .मेरे साथबहुत अन्याय हुआहै,२३ जुलाई की शाम को जिस तरह श्रीएच बी त्रिवेदी,श्रीएस सुन्दरम, श्री आलोक कुमार ने सेकुरिटी को लेकर जबरदस्ती रिजाइनलिखवाने की कोशिश मेंमेरे साथ मारपीटकी तथा उसकेबाद अकेली मेरीपत्नी और बच्चीको प्रताड़ित करनाजारी रखे हैं.:-मै चाहकर भी उनको बचा नहीं पा रहा हूँपर इतने अपमानके बाद शायदमै जीवित नरह पाऊं पर न तो मैं कायर हूँ नही दोषी मेरे साथ षड्यंत्र किया गया है : –
      कृपया मेरी मदद करें तथा इस सच्चाई को जनता के सामने लायें, न्यूज में छापें, तत्संबंधित किसी भी प्रकार का दायित्व मेरा होगा.
      विनीत : –

      (डॉ.अशोक कुमार तिवारी),
      हिंदी पी.जी.टी., के.डी.अम्बानी विद्या मंदिर, जामनगर ( गुजरात), दिनांक- ०७-5-12 वर्तमान पत्राचार का पता :-
      पी -२०१. इन्द्रप्रस्थ टॉवर, निकट – हिमालया माल, ड्राइव इन रोड, अहमदाबाद – ३८० ०५२, संपर्क- ९४२८०७५६७४, ८१२८४६५०९२,
      ईमेल -Dr.ashokkumartiwari@gmail.com, ashokktiwari07@yahoo.co.in

      Reply
  5. Kailash Tiwari

    श्री राज ठाकरे के कृत्य देशद्रोह है . कश्मीर का अलगाव और मनसे में कोई अंतर नहीं है .अलगाववाद की विष बेल फेले इसके पहले ही उसे उखाड़ कर नष्ट कर देना चाहिए इस तरह के लोग सांफ है , उनके फनों को अपने जूतों की एडी से कुचलना होगा श्री राज ठाकरे पर देश द्रोह का मुकदमा लगाना चाहिए.
    कैलाश तिवारी भोपाल

    Reply
    • Dr. Ashok Kumar Tiwari

      बिल्कुल सच है इनके साथ आतंकवादियों जैसा सलूक होना ही चाहिए पर गुजरात में भी :- ……………….जहाँ स्कूल प्रिंसिपल बच्चों को माइक पर सिखाते हैं ‌-” हिंदी राष्ट्रभाषा नहीं है, बड़ों के पाँव छूना गुलामी की निशानी है…………”
      सच कहा मित्र आपने – पूरे देश का वही हाल है- गुजरात के रिलायंस टाउनशिप में आज(11-4-13) को हैदराबाद के मूल निवासी मि.अकबर नाम के के.डी.अम्बानी विद्या मंदिर में कार्यरत एक फिजिक्स टीचर ने आत्महत्या कर लिया है, पर रिलायंस वाले उसे हाइवे की दुर्घटना बनाने में लगे हैं, आसपास की जनतांत्रिक संस्थाएँ रिलायंस की हराम की कमाई को ड्कार के सो रही हैं। शिक्षक जैसे सम्मानित वर्ग के साथ जब ये हाल है तो आम कर्मचारी कैसे होंगे ? आप सहज ही अनुमान लगा सकते हैं ।पहले भी एक मैथ टीचर श्री मनोज परमार का ब्रेन हैमरेज स्कूल मीटिंग में ही हो गया थ। मैंने पहले ही सावधान किया था पर किसी ने ध्यान नहीं दिया और 30 साल के एक नौजवान को हम बचा नहीं पाए सब उस कत्लखाने में चले आते हैंकाश लोग लालच में न आते बात को समझ पाते………. पाकिस्तानी बार्डर के उस इलाके में जहाँ स्कूल प्रिंसिपल बच्चों को हिंदी दिवस के दिन माइक पर सिखाते हैं ‌-” हिंदी राष्ट्रभाषा नहीं है, बड़ों के पाँव छूना गुलामी की निशानी है, गाँधीजी पुराने हो गए उन्हें भूल जाओ, सभी टीचर अपनी डिग्रियाँ खरीद कर लाते हैं तथा आपके माँ-बाप भी डाँटें तो पुलिस में केस कर सकते हो।” असहमति जताने पर 11सालों तक स्थाई रूप में काम कर चुके आकाशवाणी राजकोट के वार्ताकार तथा सबसे पुराने योग्य-अनुभवी हिंदी शिक्षक/ शिक्षिकाओं व उनके परिवारों को बड़ी बेरहमी से प्रताड़ित करके निकाला जाता है। स्थानीय विधायकों, रिलायंस अधिकारियों के साथ-साथ धृतराष्ट्र की तरह अंधी राज्य सरकार भी बार-बार निवेदन के बावजूद भी कोई कार्यवाही नहीं करती है… हैं ना गाँधी जी के बंदर…और वे भी संसद की सबसे बड़ी कुर्सी के दावेदार ……… Contact For Detail :- 9428075674, dr.ashokkumartiwari@gmail.com

      Reply
  6. Radha

    Raaj thakre jaise insaan ko to sidha jail me daal diya jaana chcaiye, sabse bade deshdrohi to yahi hai jo ek bhasha ke naam par ek raajya ko desh se alag kar desh ki pehchan ko mitane par tule hue hain
    hamesha koi na koi bahanaa bana kar rajniti karte rahte hain, kabhi shahrukh kabhi amitabh in sabka naam lekar khud publicity paana chahte hain jisse inki gandi soch or rajniti ka pata chalta hai pata nahi
    sarkaar ne kyo abi tak inhe khula rakha hai
    inko to bina court k saja-a-kalapani de dena chahiye
    ye isi laayak hain

    Reply
  7. S. Vishvesh

    सिर्फ समझ का फेर है… क्या आप मुझे बता सकते हैं अपने वोट बैंक के वोट हथियाने के अलावा कोई भी राजनैतिक दल और कोई भी राजनेता कोई इमानदार रास्ता अपना रहा है. आपकी सोच आपकी अपनी नहीं है ये मीडिया द्वारा निर्मित है और जो मीडिया दिखा रहा है उसमे सच्चाई नहीं है. जरा अपने दिमाग को और खोलिए कांग्रेस एंड सपा की अपने वोट बैंक के लिए की जा रही राजनीती पर शोध कीजिये राज ठाकरे आपको इनलोगों के आगे बहुत छोटे लगेंगे.

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  8. ASHOK SINGH

    Dear Sir,

    Raj Thakare & Bal Thakare Bhartiye rajniti ka ganda khel hai, jo apne vote bank ki khatir logo ko aapas mein ladwa rahe hai. Kisi bhi bhasha,majhab yeh nahi sikhata hai ki log aapas mein jagda kare. Hum to Bharat jaise vishal desh mein rahte hai jaha har pradesh ki apni ek bhasha waha ka apna taur tarika hai. Agar Raj Thakare & Bal Thakare yeh chhahate ki Maharastra mein rahne ka adhikar sirf marathi manushyo ke liye hai to yah sara sar galat hai kyoki pratek vyakti ko Bharat mein kahi bhi rahne ka adikar hai.

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  9. Ravindra Nath Yadav,I.R.S.(retd.)

    Like all others leaders Raj Thakre also for sake of their separate identity and lust of power lures some of the people who are ignorant but fond of mischief listen to Thakres.

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  10. Manoj Kumar

    Raaj Thakare and all his followers are mad. They are just like a terrorist.

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  11. RAJ SINH

    राज ठाकरे ,बाल ठाकरे मुद्दा नहीं हैं ,कांग्रेस के पैदा किये हुए अघोषित संतान हैं ,भिन्दरंवाले की तरह .प्रमाण हैं कांग्रेस की टुच्ची राजनीती का .यहीं पर काफी कुछ कहा गया है .नेहरू -गांधी परिवारवाद की सत्ता के लिए किये जाते रहे लगातार देशद्रोही चरित्र का सबूत हैं .

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  12. शिवानंद द्विवेदी

    शिवा नन्द द्विवेदी “सहर

    राज ठाकरे हो या बाल ठाकरे , दोनों अफ़ज़ल गुरु से भी बड़े अपराधी हैं ! पाक से भी नापाक हैं! ये उस बिल के चूहे हैं जो अपनी बिल से निकल कर कुछ बोल नहीं सकते ! इनको पुरे देश के सामने सजा मिले तो भी सजा पुरी नहीं होती है !

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  13. drsatyajit sahu

    यह राजनीती का ही परिणाम है .
    इस प्रकार की राजनीती देस के लिए अच्छी नहीं है
    ऐसे लोग समाज के हित में नहीं है

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  14. bhartiya

    Aise terrorist ke bare me kahi bhi kabhi bhi discussion nahi honi chahiye, who is Raj thakrey? mujhe nahi pata ha mujhe ye malum hai ek terrorist Raj thakrey ke baare me. A person who doesnot respect to hindi language what he can do for India. I request to all Indians people please do not ask about a person who does not believe in Indian culture or who does not respect to Indian culture. mai aur kuch nahi kahana chahata is terrorist ke bare me. Thanks a lot who has created this site and giving me good time to save my country. Jai hind……….

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  15. JAVED USMANI , bilaspur

    जब ऐसे सवाल सामने आये जिनका जबाब देना गैर जरुरी लगे और जबाब देने का मन भी करे तो अपने आप पर ही हँसी आती हैं . श्री राज ठाकरे और श्री बाला साहब ठाकरे भी ऐसे सवाल हैं जिन पर कुछ कहना भी भारतीयता की तौहीन हैं , और ऐसे सवालो पर खामोशी भी भारतीय संस्कृति के खिलाफ इसलिए लगती हैं कि , ऐसी गलती जो देश के सौहाद्र पर चोट हो , उस पर मौन रहने की परंपरा नहीं हैं , महज अपने घर को खुशहाल देखने के लिए पूरी दुनिया में आग लगाने की तमन्ना रखने वालो की जगह किसी भी सभ्य समाज में नहीं होती हैं . इसलिए ठाकरे परिवार अपनी लगायी आग में खुद जल रहा हैं . राज और बालासाहब अपनी नजरो में चाहे , अपने लिए , कितना ऊचा मर्तबा क्यों न रखते हो ? पर दुनिया की निगाहों से गिर चुके हैं , हिंदुस्तान के कोने कोने से उठते आलोचना के स्वरों से यह साफ हो चुका हैं कि बालाजी और राज ठाकरे अपना मुकाम खो चुके हैं . कोई भी आतंक , तभी तक कायम रहता ,हैं जब तक अवाम उसका सामना करने से कतराती हैं , पर जब जनता मोर्चा सम्हाल लेती हैं . तो चाहे कितने बड़े हिटलर क्यों न हो , उन्हें जमीन देखनी ही पड़ती हैं . धीरे धीरे उनकी नजरो में उनकी मुंबई भी , उनके खिलाफ होती जा रही हैं , क्योकि हर एक चाहता हैं कि उसके मुल्क को उसके देशवासियों को नुकसान पहुचाने की नीयत रखने वालो को समुचित दंड मिले . अगर इसके बाबजूद भी समय की आह्ट राज साहब और बालासाहब दरकिनार करके , अपनी हठ पर कायम रहते हैं तो बहुत जल्दी उनका भी शुमार ऐसे लोगो में होने लगेगा जिन्होंने अपनी नादानियो और जिद के चलते वह सब खो दिया जिसके हकदार वे लोग नहीं थे , और गुमनाम हो गये . पर घटना चक्र को देखते हुए लगता नहीं हैं कि दोनों इतिहास से कोई सबक सीखने को तैयार हैं या किसी की नेक सलाह मानने को तैयार हैं , इसलिए अब उनकी चिंता करने की देश को जरुरत ही नहीं रह गयी हैं . क्योकि उन लोगो ने अपनी मंजिल खुद ही बनायी हैं . रहा हिन्दी भाषी और मराठी भाषी का मुद्दा तो , इस सच को सभी जानते हैं कि हमारी राष्ट्र भाषा हिन्दी हैं , और उसको लेकर बबाल करना बेमानी हैं . वैसे भी जिस तरह से पलटी मारने का दोनों का इतिहास रहा हैं उससे साफ हैं कि बहुत जल्दी दोनों पलटी मारने ही वाले हैं . एक हसीन तर्क का साथ कि वे लोग कभी भी उत्तर भारतीयों के खिलाफ कभी भी नहीं रहे हैं क्योकि उनके पूर्वज खुद बिहारी हैं .

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  16. ASIM

    मेरा सिर्फ ये पूछना है सभी लोगों से कि टेरिरिस्ट और एक्टिविस्ट में क्या अंतर है. जहाँ तोड़ फोड़ के वारदात को अंजाम देने वाले शिवसेना को मिडिया एक्टिविस्ट की संज्ञा देती है वही तोड़ फोड़ करने वाले लश्कर ए तय्यावा को टेरिरिस्ट कहती है.

    खिलारियों व कलाकारों का कोई मजहब है तो सिर्फ खेल व कला. तो फिर पाकिस्तानी खिलारियों का भारत में ना खेलने देने का मसला ही नहीं उठाना चाहिए.

    बाल ठाकरे के बाल जनता के इस फैसले के बावजूद खड़े ना हो रहे हो तो. तो गधे की संज्ञा से आप उन्हें नवाज सकते है. जो जनता के फैसले को नहीं समझ सकता उसे राजनीती से सन्यास ले लेना चाहिए. और ये राज राज ठाकरे को भी बता देना चाहिए क्योँ की आखिर मनसे तो शिवसेना का ही फ्रेंचैजी है.

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  17. pragya

    ठाकरे और शिव सैनिकों की मंशा नहीं समझ में आती है …राज ठाकरे तो मुख्यतः बिहार से हैं इनके पूर्वज आकर मुम्बई में बसे ये हाल ही में हमने कहीं पढ़ा .. अब ये क्या करेंगे ? ?क्या महाराष्ट्र हिन्दुस्तान से अलग कोई दूसरा देश है जहाँ उत्तर भारतीय नहीं जा सकते ? क्या संविधान के तहत यह सब कुछ आता है ? क्या देश तोड़ने को भी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता मान लेना कायरता नहीं है . ?सरकार ठाकरे के बयानों को किस आधार पर बर्दाश्त कर रही है ? यह स्थिति भयानक रूप से शोचनीय है . !

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  18. Rajesh Kumar Ahirwar

    महारास्त्र की राजनीत में शिवसेना एंड मनसे का प्रभाव होने से कांग्रेश और भाजपा कहने के आलावा कुछ करना नहीं चाहती है सिर्फ आलोचना के सिवाह यदि यह करना चाहे तो भारत की राजनीत इन्ही दलों के हाँथ में हाँ और इन्हीं के सोच के लोग प्रशासन चला रहें हैं जिन्हें इन छेत्र्वादियों से निपटना हैं राहुल गाँधी सिर्फ दिखावा करते हैं वास्तव में कुछ नहीं इनकी राजनीत को गरीब जनता को समछ्ना तेरी खीर है क्योकी छेत्रवाद या रास्त्रवाद से इस जनता को कुछ हासिल होने वाला नहीं सिवाह जोखम के यदि मराठियों को मुंबई छोन भी दी जाय तो भी यह छेत्रवाद ख़तम होने वाला नहीं है क्योंकि पनोस पनोस में रहने वालों की लाने होती है तो यह तो एक रास्त्र है इसलिए इनके चाहने वालों को यह बात समछ्ना होगी ही की उनको कुछ नहीं मिलेगा सिर्फ प्रतान्ना के औओ इनको उनका साथ छोन्ना ही होगा तो यह अपनाप घर बैठ jaayenge

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  19. shrikant upadhayay

    बाला साहब ठाकरे एवं राज ठाकरे जैसे नेतावो को गद्दार एवं देश द्रोही करार देते हुवे नजर बंद करदेना चाहिए ,यदि इनको महारास्ट्र से इतना ही प्रेम है तो महारास्ट्र के सभी भिखारियों को इनके घर में ले जाकर छोड़ दिया जाये और इनको बताया जाये की ये है तुम्हारा महारास्त्र ये लोग केवल पैसा कमाने के लिए पूंजी पतियों के ऊपर टिप्पड़ी करना जानते है महरासत्रा के असलियत से इनका कोई सरोकार नहीं है ये देश द्रोही है

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  20. jayshree

    साम्प्रदायिकता, मानवता के नाम पर कलंक है ,लेकिन ठाकरे परिवार मुम्बई पर अपना वर्चस्व कायम रखने के लिए
    भाषावाद तथा क्षेत्रवाद को बढ़ावा दे रहा है ……

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  21. Jeet Bhargava

    सबसे पहले में इस बात की और ध्यान दिलाना चाहता हूँ कि उत्तर प्रदेश में वरुण गांधी के कथित भडकाऊ भाषण के लिए ( जो वह खुद कहते हैं कि मैंने ऐसा नहीं कहा, बावजूद ) एक दिन में ही ‘रासुका’ में बंद कर दिया गया. दूसरी और करीब तीन साल से राज ठाकरे मुम्बई में उत्पात मचा रहे हैं उसके बावजूद किसी भी सरकार ने उनका बाल भी बांका नहीं किया. ना राज्य सरकार ने और ना ही केंद्र सरकार ने. जबकि राज्य और केंद्र में कोंग्रेस की ही सरकार है. और यही कोंग्रेसी आए दिन उत्तर भारतीयों के हितैषी होने दम भरते हैं. तो फिर कोंग्रेस की सरकारों ने राज ठाकरे को खुला क्यों छोड़ रखा है? इसी से कोंग्रेस के असली मंतव्य का ‘राजफाश’ होता है. हकीकत ये है कि राज ठाकरे के पीछे उसकी प्रायोजक कोंग्रेस है. जो एक तरफ राज ठाकरे के माध्यम से शिवसेना के मराठी वोटो को काटना चाहती है तो दूसरी तरफ उत्तर भारतीय वोटरों को पिटवा कर उन में राज ठाकरे और शिव सेना का भय पैदा करके अपना वोट बैंक मजबूत करना चाहती है. यानी हिन्दू वोटो में दरार बनाकर कोंग्रेस किसी भी कीमत पर सत्ता में बनी रहना चाहती है.
    यदि आप राज ठाकरे के इस उत्पात पर नजर डालेंगे तो पाएंगे कि उत्तर भारतीयों के खिलाफ विष वमन करने के लिए राज ठाकरे को बाकायदा भड़काया गया है. यह काम हर बार इतने सुनियोजित तरीके से हुआ है कि क्या उत्तर भारतीय और क्या मीडिया सभी एक तरफ़ा सोचकर और सिर्फ राजठाकरे को कोस कर अपने कर्तव्य की इति श्री कर लेते हैं. किसी ने भी राज ठाकरे के आंतक के पीछे के ‘हाथ’ को जानने और समझने -समझाने की कोशिश नहीं की. सबसे पहले मुलायम सिंह और अबू आजमी द्वारा मुम्बई में आम सभा को लेकर उत्पात मचाया गया. फिर लालू और कृपाशंकर सिंह ने भड़काऊ भाषण दिए अभी हाल ही में कोंग्रेसी मुख्यमंत्री आशिक चव्हान ने टेक्सी ड्राइवर सिर्फ मराठी का नारा देकर और फिर पीछे हटकर मामला गरमाया. उसके बाद युवराज राहुल गांधी ने मुम्बई सबकी का नारा देकर फिर मराठी-उत्तर भारतीय राजनीति को हवा दी. आए दिन राज ठाकरे और मराठियों को उकसाने का काम कोंग्रेसी या वही लोग कर रहे हैं जो खुद को सेकुलर कहते हैं. जाहिर है दिन-रात राष्ट्रीय एकता का नारा देने वाली सेकुलर बिरादरी की मंशा क्या है? वह एक तरफ प्रांतवाद तो दूसरी तरफ जातिवाद के नाम पर हिन्दू समाज को विभाजित कर देना चाहती है. ताकि उसके सामने सम्पूर्ण और एक्य हिन्दू समाज का कोइ खतरा ना रहे और अपने निष्ठावान अल्पसंख्यक वोटो के बल पर अपनी मर्जी से सत्ता पर बनी रहे. देश को प्रांतवाद और जातिवाद में बांटने में ही इसका हित है, जिसका औजार बन रहे हैं राजठाकरे जैसे लोग.
    मजे की बात ये है कि उत्तर भारतीयों के खिलाफ बयान देने में राजठाकरे के अलावा और भी लोग हैं. गोवा के कोंग्रेसी मुख्या मंत्री मनोहर पारीकर ने उत्तर भारतीयों को भिखारी तक कहा था. महाराष्ट्र के ही कोंग्रेसी शिक्षा मंत्री सुरेश शेट्टी ने साफ़ शब्दों में कहा था कि ‘इन पानवालो, ठेलावालो,केलेवालो (भैयाओं) को राजनीति में आने से रोकना चाहिए. वरना राजनीति दूषित हो जायेगी’. यही नहीं दिल्ली की कोंग्रेसी मुख्यमंत्री शीला दीक्षित और वहां के राज्यपाल ने भी उत्तर भारतीयों के खिलाफ अपनी वाणी मुखर की थी. असम में भी कोंग्रेस का ही ‘राज’ है और वहा उत्तर भारतीयों को आये दिन हमलो का शिकार होना पड़ता है. वहां हिन्दी फिल्मे तक रिलीज होना दुष्कर हो जाता है. कई बार असम में उत्तर भारतीयों को अपनी जान से हाथ धोना पडा है. यह बात शत प्रतिशत सही है कि राज ठाकरे की करतूते बिलकुल सही नहीं है, लेकिन राज ठाकरे के पीछे खादी ताकतों को पहचानना भी बहुत जरूरी है. लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि ‘सेकुलर राजनीति’ का भोंपू बन गयी मुख्यधारा की मीडिया इसकी खबर लेने और खबर देने की ईमानदार कोशिश करेगी??
    जीत भार्गव,
    डब्लू डब्लू डब्लू . सेकुलर-ड्रामा.ब्लागस्पाट . कॉम

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  22. lakhan j singh

    राजठाकरे ही क्यों बालठाकरे और उद्धव ठाकरे की बात क्यों नहीं की जाये.ठाकरे khandan और भाजपा मिल कर maharstra ko नफरत का केंद्र बना रहे हे.jinha ने तो एक देश तोडा था ठाकरे बंधू तो परदेश ko देश से तोड़ने की कोशिश कर रहे हे. भाजपा तो राष्ट्राय पार्टी हे फिर शिवसेना के साथ उनका गढ़बंधन सुविधा की राजनीती नहीं हे तो kaya हे.laakhan जे singh

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