लेखक परिचय

डॉ. वेदप्रताप वैदिक

डॉ. वेदप्रताप वैदिक

‘नेटजाल.कॉम‘ के संपादकीय निदेशक, लगभग दर्जनभर प्रमुख अखबारों के लिए नियमित स्तंभ-लेखन तथा भारतीय विदेश नीति परिषद के अध्यक्ष।

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donald-trump-3अमेरिकी चुनाव में कोई राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार हो और वह भारत और हिंदुओं के प्रति इतनी आसक्ति जाहिर करे, जितनी डोनाल्ड ट्रंप ने की है तो हम लोग गदगद हुए बिना नहीं रह सकते। जो भारतीय मूल के हिंदू अमेरिका में रहते हैं, वे तो फूलकर कुप्पा हो जाएंगे। यह कम बड़ी बात नहीं कि ‘रिपब्लिकन हिंदू कोलिशन’ नामक संस्था द्वारा आयोजित सभा में पांच हजार लोग जमा थे। डोनाल्ड ट्रंप अभी तो सिर्फ रिपब्लिकन उम्मीदवार ही हैं। अमेरिकी राष्ट्रपतियों की सभा में भी इतने लोगों को जुटा पाना मुश्किल होता है।

ट्रंप ने भारत, मोदी और हिंदुओं की शान में जो कसीदे काढ़े हैं, आज तक किसी भी विदेशी नेता ने नहीं काढ़े। क्यों काढ़े हैं, ये कसीदे? ट्रंप से पूछो तो वे कहेंगे कि मैं अब से 22 माह पहले भारत गया था और वहां के लोगों से मिलकर सम्मोहित हो गया था। और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी? अरे, वे तो ‘महान व्यक्ति’ हैं। मैं राष्ट्रपति बनने पर उनके चरण-चिन्हों पर चलूंगा। भारत और अमेरिका दुनिया के ‘सर्वश्रेष्ठ’ मित्र होंगे। मैं भारत और हिंदुओं का दीवाना हूं। आतंकवाद के खिलाफ चल रही लड़ाई में मैं पूरी तरह भारत के साथ हूं।

ट्रंप के इन शब्दों की मलाई पर कुछ प्रवासी भारतीय जरुर फिसल सकते हैं लेकिन वे प्रायः डेमोक्रेटिक पार्टी को ही वोट देते हैं। पांच हजार लोग, जो इकट्ठे हुए थे, पता नहीं वे ट्रंप को सुनने आए थे या तीन-चार घंटे के सांस्कृतिक कार्यक्रम में भारतीय फिल्मी सितारों को देखने आए थे। यों भी ट्रंप की इज्जत इतनी पैंदे में बैठ गई है कि यह सभा तो डूबते को तिनके का सहारा बन गई है। औरतों के बारे में ट्रंप की अश्लील हरकतों, टिप्पणियों और राजनीतिक सवालों पर अमर्यादित जवाबों ने उन्हें एक ऐसा उम्मीदवार बना दिया है, जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति के चुनाव में शायद सबसे कम वोट मिलें। भारतीय लहजे में कहें तो उनकी जमानत जब्त हो जाएगी। ऐसे ट्रंप के मुंह से अपनी तारीफ सुनकर कोई गर्व अनुभव कैसे कर सकता है? हिंदुओं और नरेंद्र मोदी का कोई चेला इतना मूर्ख और दुश्चरित्र कैसे हो सकता है? उनसे वह कुछ तो सीखता !

3 Responses to “डोनाल्ड ट्रंप की उलटबासियां”

  1. Himwant

    में एक बात जानता हूँ , भारत के दोनो हाथों मे लड्डू है. नीति के तौर पर डेमोक्रेट पार्टी के राष्ट्रपति भारत-मुखी होते है. केनेडी से ले कर ओबामा तक यह स्पस्ट दिखाई देता रहा है. हिलेरी डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मेदवार है, अगर वे जीतती है तो यह भारत के लिए सुख्द रहेगा. दूसरी और डोनाल्ड ट्र्म्प महोदय है, इनके जितने के भी संभावना है, अगर यह जीते तो रिपब्लिकन पार्टी के होने के बावजूद यह मोदी के बहुत बड़े प्रशंस्क है. आतन्कवाद के विरोधी है. यह भी अच्छा रहेगा.

    तारे बताते है की इस बार काउंटिंग में कुछ विवाद रहेगा. देखे क्या होता है. जो होगा सो अच्छा ही होंगा.

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  2. इंसान

    डोनाल्ड ट्रंप की उलटबासियाँ देखने हेतु मैं यहाँ आ पहुंचा हूँ| संयुक्त राष्ट्र अमरीका के राष्ट्रपति पद के लिए डोनाल्ड ट्रंप का निर्वाचनों में खड़े होना अपने में एक उलटबासी ही है क्योंकि डोनाल्ड ट्रंप में राष्ट्रपति बनने की योग्यता नहीं है और मैं इसमें हिलेरी रोढम क्लिंटन को वोट देने का सन्देश प्रत्यक्ष देखता हूँ| मैं स्वयं राष्ट्रपति हिलेरी रोढम क्लिंटन और भारत के प्रधान मंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी को विश्व शान्ति के लिए दोनों देशों के परस्पर सहयोग में सहभागिता करते देखना चाहता हूँ|

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  3. Himwant

    रूस से अमेरिका के सम्बन्घ ठीक नही. लेकिन अगर डोनाल्ड ट्रम्प विजयी होता है तो रूस-अमेरिका सम्बन्ध बेहतर होने की उम्मीद की जा सकती है.

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