लेखक परिचय

शैलेन्द्र चौहान

शैलेन्द्र चौहान

कविता, कहानी, आलोचना के साथ पत्रकारिता भी। तीन कविता संग्रह ; 'नौ रुपये बीस पैसे के लिए'(1983), श्वेतपत्र (2002) एवं, 'ईश्वर की चौखट पर '(2004) में प्रकाशित। एक कहानी संग्रह; नहीं यह कोई कहानी नहीं (1996) तथा एक संस्मरणात्मक उपन्यास पाँव जमीन पर (2010) में प्रकाशित। धरती' नामक अनियतकालिक पत्रिका का संपादन। मूलतः इंजीनियर। फिलहाल जयपुर में स्थायी निवास एवं स्वतंत्र पत्रकार।

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शैलेंद्र चौहान

यह कतई आश्चर्यजनक नहीं है कि बाबाओं की सबसे ज्यादा शक्तियाँ और चमत्कार भारत में ही पाये जाते हैं। लेकिन मजेदार बात यह है कि इनकी इतनी शक्तियों और चमत्कारों के बावजूद भारत, विश्व में सैकड़ों सालों से गुलाम रहे देशों में तीसरा देश कहलाता है। गरीबी, गंदगी, अनुशासनहीनता, लालच, भ्रष्टाचार, अंधभक्ति जैसी समस्याओं से जूझ रहा है किन्तु ये बाबा आज तक देश का कल्याण नहीं कर पाए। यदि आप यकीन कर सकें तो वास्तविकता यह है कि किसी बाबा में कोई शक्ति नहीं, कोई चमत्कार नहीं। आप अपने को टटोलें तो पायेंगे कि शक्ति तो आप में है, चमत्कार तो आप में है। बेवजह ही आप बाबाओं के चक्कर में पड़े थे। इस देश में पाखंडी व ढोंगी बाबाओं का जमावड़ा हो गया है कि जिधर देखो उधर ये पाखंडी डेरा जमाये हुए हैं। कोई सैक्सी फिल्में बना रहा है तो कोई पूरा सैक्स रेकेट ही चला रहा है। कहीं ये देखने को आ रहा है कि अपनी उम्र से आधी से भी कम उम्र की लड़कियों को बाबा अपने प्रेमजाल में फंसा रहे हैं। उन्हें अनुष्ठान करा रहे हैं और हमबिस्तर कर रहे हैं, रेप कर रहे हैं। अब समझ जाईये कि किस कृपा की मांग कर रहे थे आप  इनसे? अच्छा होता आप अपने आप पर कृपा करते। इनसे दूर रहकर अपनी शक्ति को पहचानते। प्रकृति तथा ब्रह्माण्ड के अचूक, तर्कसम्मत एवं वैज्ञानिक नियमों की पहचान करते। आप अज्ञानता, बेबसी एवं भय के कारण ही तो बाबाओं, ज्योतिषियों, तांत्रिकों या अन्य पाखंडी गुरूओं के पीछे भागते हैं  फिर चाहे आपका विश्वास कमजोर रहा हो या दृढ़। वैज्ञानिक विश्लेषण एवं तर्क के सम्पर्क में आ सकते तो आपकी आँखें हमेशा के लिए खुल जातीं। ये फालतू, बेवजह की भागदौड़ हमेशा के लिए बंद हो जाती।

आज माहौल ही लोगों ने कुछ ऐसा बना दिया है कि बाबाओं का दोष छुप जा रहा है। बाबा के आसपास दस-बीस चेला-चेली दौड़ रहे हैं, फूलों से शानदार सजावट कर दी गई है। जनता मदहोश है, उसे लगता है कि ऐसा करके वे पुण्य कमा रहे हैं। एक बाबा प्रवचन देता है, कहता है मैंने एक स्वप्न देखा, सपना, ड्रीम, नाइटमेयर। भैया नाइटमेअर मतलब तो दुस्वप्न होता है। लेकिन पब्लिक की आंखें बंद हैं। बाबा बता रहा है, भक्त आत्मसात कर रहे हैं। सिंहासन पर बैठा बाबा कमाई कर रहा है। नए जमाने के इस बाबा के क्या कहने। इसे बैठने के लिए भव्य सिंहासन चाहिए। घूमने के लिए लंबी गाड़ी और ए-ग्रेड बाबा है तो हेलिकॉप्टर से कम में काम नहीं चलता। आश्रम तो ऐसे बनवा रखे हैं कि शहंशाह भी शर्म के मारे जमीन में गड़ जाएं। एक दौर था कि साधु-संत मायावी प्रलोभनों से दूर रहकर समाज को संस्कारित व धार्मिक बनाने में अपनी महती भूमिका निभाते थे। स्वयं सात्विक-सरल जीवन जीते थे। काम, क्रोध, मद लोभ को त्याग कर खुद का जीवन दूसरों के हितार्थ होम कर देते थे। आज जिन साधु-संतों को हम देख रहे हैं, इनकी लीला अपरम्पार है। सर्व गुण संपन्न इन कथित साधु संतों का न तो कोई चरित्र होता है न ही इनमें कोई त्यागआए दिन इनकी काली करतूतें सार्वजनिक हो रही हैं। इसके बावजूद पहले की तरह ही आज भी इस महा विकसित दौर में  साधु-संतों के प्रति जनता में श्रद्धाभाव है, जिसका फायदा उठाकर बड़ी संख्या में छद्म वेशधारी, साधु-बाबाओं की जमात में शामिल हो लिए हैं।

आज संत(?) रामपाल चर्चा में हैं, हिसार जिले के बरवाला में स्वयंभू गुरु रामपाल के आश्रम में प्रवेश करने गए पुलिस बल को भारी विरोध का सामना करना पड़ा। जेसीबी मशीनों से आश्रम को तोड़ कर उसमें घुसने गई पुलिस उस वक्त अवाक रह गई जब संत समर्थकों ने वहां जमा जमा बच्चों, महिलाओं और युवकों का ढाल के रूप में इस्तेमाल शुरू कर दिया। परिसर से पुलिस पर जम कर पथराव हुआ। कुछ समय पूर्व बापू आसाराम   ने अपने गुरुकुल में पढ़ने वाली एक किशोरी का सुनियोजित तरीके से रेप किया। यदा कदा खबरें आती रही हैं फलां बाबा के लोगों ने यहां जमीन पर कब्जा कर लिया, वहां अवैध रूप से आश्रम बना डाला। लेकिन उनपर कोई ध्यान नहीं देता। न जनता, न सरकार। भाई, ये बाबा हैं या भूमाफिया?  यह बताना मुश्किल है।

बंगलौर के परमहंस नित्यानंद के कथित सेक्स विडियो ने 2010 में सनसनी फैला दी थी। इसके बाद नित्यानंद सुर्ख़ियों में आ गए। वे दुनिया के कई देशों में नित्यानंद ध्यानपीठ चलाते हैं। दक्षिण भारत के एक टेलीविज़न चैनल ने इस वीडियो का प्रसारण किया था जिसमें एक साधु जैसे दिखने वाले व्यक्ति को दो महिलाओं के साथ अश्लील अवस्था में दिखाया गया था। इसके बाद स्थानीय लोगों ने नित्यानंद ध्यानपीठ पर हमला कर दिया और तोड़फोड़ की। काञ्ची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती को नवंबर 2004 में एक हत्या के सिलसिले में गिरफ़्तार किया गया था। पर आठ साल बाद भी ये मामला पुडुचेरी की एक अदालत में घिसट रहा है। केरल के अमृत चैतन्य उर्फ़ संतोष माधवन को नाबालिग़ लड़कियों के साथ यौन दुर्व्यवहार करने के लिए एक अदालत ने 2009 में 16 साल की सज़ा सुनाई थी। कश्मीर में श्रीनगर से 42 वर्षीय गुलज़ार बट को पुलिस ने बलात्कार के आरोप में मई 2013 में गिरफ़्तार किया। उन पर आरोप था कि उन्होंने बडगाम के अपने मज़हबी ठिकाने खानसाहेब में कई लड़कियों का यौन शोषण किया। पुलिस ने बताया कि सैयद गुलज़ार के स्कूल में 500 छात्राएँ पढ़ती हैं और वो स्कूल में काम करने वाली महिलाओं के ज़रिए लड़कियों को बहला फुसला कर उनसे यौन संबंध बनाते थे।

कुछ समय पूर्व प्रतापगढ़ में कृपालु महाराज के आश्रम में भगदड़ मची। आश्रम के लोगों का कहना था कि जो इतने लोग मरे इसमें हमारी कोई जिम्मेदारी नहीं, ईश्वर की मर्जी है। चलिए ये भी हो लेकिन बाबा जी तो ईश्वर के काफी करीब हैं। दिन-रात ईश्वर से साक्षात्कार करते हैं, साक्षात प्रभु के दर्शन करते हैं। तो फिर ईश्वर ने उन्हें क्यों नहीं बताया कि बाबा, कल तुम्हारे आश्रम में भगदड़ मचेगी, लोग मरेंगेभाई, मत करो श्राद्ध, या करो भी तो चुपचाप, अकेले। अपने करीबियों को याद करने के लिए मजमा लगाने की क्या जरूरत?  अपने आप को ईश्वर बताने वाला यह कैसा बाबा है जिसे यह नहीं पता कि थोड़ी देर में यहां 64 महिलाएं और बच्चे कुचल कर मरने वाले हैं? ईश्वर के करीब हो तो ईश्वर की मर्जी भी पता होगी! उत्तर प्रदेश में पाखंडी साधुओं की संख्या में खासा इजाफा हुआ है। राज्य में कई साधु-संत अपनी विवादित भाषा शैली और आचरण के कारण चर्चा में रहे, भक्त बनकर मंदिर स्थापित करने और लोगों को प्रवचन देने वाले चित्रकूट के बाबा, इच्छाधारी संत स्वामी भीमानंद महाराज  उर्फ शिवमूरत द्विवेदी के काले कारनामों को चिट्‌ठा जब उजागर हुआ तो ऐसे साधु संतों को लेकर कुछ बहस छिड़ी।

राजधानी लखनऊ के बाबा भूतनाथ को मरे कई साल हो गए हैं, लेकिन आज भी उनके द्वारा हथियाई गई ज़मीन पर बनी भव्य भूतनाथ मार्केट उनके नाम को जीवित रखे हुए है। लखनऊ के इंदिरागनर में जहां पर भूतनाथ मार्केट बनी है इस ज़मीन की क़ीमत करोड़ों रुपए है। बाबा भूतनाथ करिश्माई तांत्रिक के रूप में अपनी छाप बनाए हुए थे, वे तरह-तरह के केमिकल के प्रयोग से लोगों को बेवकूफ बनाने में सिद्वहस्त थे। उनके गुरुभाई रहे बाबा भैरोनाथ को उनकी करतूतों पर काफी नाराज़गी रहती थी। संत ज्ञानेश्वर के तो नाम के आगे ही संत लगा था और पीछे ज्ञानेश्वर। लेकिन उनके शौक निराले थे, भूमाफिया के रूप में संत ज्ञानेश्वर का नाम पुलिस रिकॉर्ड में भले ही नहीं था, लेकिन दूसरों की ज़मीन हथियाने की आदत ने उन्हें मौत की गोद में सुला दिया। ख़ूबसूरत महिला कमांडो के संरक्षण में चलने वाले संत ज्ञानेश्वर ने बाराबंकी से लेकर इलाहाबाद तक में अपना साम्राज्य फैला रखा था। उनके आश्रम में कई वीआईपी लोगों का आना-जाना था। संत ज्ञानेश्वर पर आरोप था कि वह अपने आश्रम में आने वाले अतिथियों को आश्रम में रहने वाली लड़कियां पेश करते थे। जब छापा मारा गया तो उनके आश्रम से कई आधुनिक हथियार भी पुलिस ने बरामद किए। भाजपा के टिकट से दो बार सांसद रह चुके सच्चिदानंद हरि उर्फ साक्षी महाराज की गिनती भाजपा के दबंग नेताओं में होती थी। साक्षी महाराज पर ज़मीन हथियाने और यौन उत्पीड़न के आरोप समय-समय पर लगते रहे। 27 मार्च 2009 को साक्षी महाराज के आश्रम से एक 24 वर्षीय युवती लक्ष्मी का शव बरामद हुआ तो हड़कंप मच गया। आश्रम के रूप में साक्षी महाराज के पास अच्छी खासी संपदा एकत्र है।

समाज में ऐसे ढोंगियों की संख्या हजारों में है जिनकी काली करतूतें यदा कदा जाहिर होती ही रहती हैं लेकिन तब भी लोगों का उनसे मोहभंग नहीं होता। वे उनके चंगुल में फंसते ही रहते हैं। मजे की बात यह कि लोग अब ईश्वर की जय नहीं बोलते बल्कि बाबा की जय बोलते हैं। लगता है ईश्वर की शक्ति अब क्षीण हो गई है। अब उन्हें ईश्वर की जरूरत नहीं रही। उन्हें तो बस बाबा की कृपा चाहिए क्योंकि बाबा स्वयं ईश्वर है या फिर ईश्वर का असली दलाल। वह सिफारिश कर देगा तो परमात्मा आँख बंद कर उसकी बात मान आपका काम कर देगा। जब ऐसे बाबा पैदा हो गए हैं तो धर्मप्राण व्यक्तियों को  ईश्वर की कोई जरूरत ही नहीं है। आखिर जो आपको भ्रमित कर दे, वही आपका भगवान है फिर वह बाबा हो या नेता।

बाबा को भगवान बना देने में लोगों की अंधभक्ति ही काम करती है। जो बाबा स्वयं अपनी ही भलाई में लगा हुआ है वह किसी और का भला कैसे कर सकता है? जो खुद लालच से उबर नहीं सकता वह औरों को क्या शिक्षा दे सकता है? जो आम आदमी और खास आदमी में फर्क करता है, वह क्या भेद मिटाएगा? यह समझने की जरूरत है। हमारा अवचेतन मन हमारे विश्वास पर कार्य करता है, तर्क पर नहीं। इसलिए आप किसी भी बाबा, पाखंडी गुरू या साधक के पास चले जाएँ, किसी भी मंदिर, गुरूद्वारे, मज़ार पर चले जाएँ, यह निश्चित मान लीजिये आपका इनके पास जाना ही आपके अवचेतन मन को प्रभावित करता है।  कबीर के शब्दों में –“बहुत मिले मोहि नेमी, धर्मी, प्रात करे असनाना।
आतम-छाँड़ि पषानै पूजै, तिनका थोथा ज्ञाना। साँची कही तो मारन धावै, झूठे जग पतियाना, साधो, देखो जग बौराना 

संपर्क : संपर्क : 34 /242, सैक्टर-3, प्रतापनगर, जयपुर-302033 (राजस्थान)
मो. 07838897877 

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