वायुशक्ति की क्षमता को मिली बेमिसाल मजबूती

योगेश कुमार गोयल

            पिछले दिनों फ्रांस से भारत आए पांचों राफेल आखिरकार 10 सितम्बर को औपचारिक रूप से वायुसेना की 17वीं स्क्वाड्रन ‘गोल्डन ऐरो’ में शामिल होकर भारतीय वायुसेना का अहम हिस्सा बन गए हैं और अब किसी भी मोर्चे पर तैनात होने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। इस समय भारत पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ गंभीर सीमा विवाद में उलझा है और ऐसे में दुनिया के बेहतरीन लड़ाकू विमानों राफेल के वायुसेना में शामिल होने से भारत की वायुशक्ति की क्षमता को बेमिसाल मजबूती मिली है। फ्लाईपास्ट के दौरान भारतीय वायुसेना के बाहुबली राफेल ने दुश्मनों को अपनी ताकत का अहसास कराते हुए दिखाया कि वह न केवल तेज गति से उड़ान भरकर दुश्मनों पर टूट सकता है बल्कि कम स्पीड में भी उड़ान भर सकता है। पूर्व वायुसेना प्रमुख बीएस धनोआ के अनुसार राफेल ने वायुसेना को हमारे विरोधियों पर जबरदस्त बढ़त दी है।

            अम्बाला एयरबेस पर राफेल के राजतिलक समारोह में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के अलावा फ्रांसीसी रक्षामंत्री फ्लोरेंस पार्ले, सीडीएस बिपिन रावत, एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया सहित कई बड़े अधिकारी शामिल थे। इस अवसर पर राफेल की विशेषताओं के बारे में फ्रांसीसी रक्षामंत्री फ्लोरेंस पार्ले का कहना था कि राफेल को ‘हवा का झोंका’ कह सकते हैं लेकिन युद्ध के मैदान में इसका मतलब आग बरसाने वाला है। समारोह में राजनाथ सिंह ने चीन से तनाव के दौर में चेतावनी भरे दो टूक शब्दों में कहा कि वायुसेना में राफेल का शामिल होना पूरी दुनिया को एक बड़ा और कड़ा संदेश है, खासकर उनके लिए, जो हमारी सम्प्रभुता पर नजर रखते हैं। उनके मुताबिक चीन से तनाव को देखते हुए राफेल लड़ाकू विमानों को सूचना मिलने पर बेहद कम समय में ही वहां तैनात किया जा सकता है। रक्षामंत्री के अनुसार भारत की जिम्मेदारी उसकी क्षेत्रीय सीमा तक ही सीमित नहीं है बल्कि वह हिंद-प्रशांत और हिंद महासागर क्षेत्र में शांति एवं सुरक्षा के लिए भी प्रतिबद्ध है। ये दोनों क्षेत्र वही हैं, जहां चीन अपनी सैन्य आक्रामकता बढ़ा रहा है।

            राफेल को भारतीय वायुसेना के लिए इसलिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह क्षेत्र में शक्ति संतुलन को बदलने की अद्भुत ताकत रखने वाला लड़ाकू विमान है। दरअसल रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक ऐसी दक्षता और बेजोड़ इलैक्ट्रॉनिक युद्धक प्रणाली वाले विमान किसी भी पड़ोसी देश के पास नहीं हैं। राफेल चीन के बहुचर्चित लड़ाकू विमान जे-20 से भी कई कदम आगे है। पाकिस्तान का एफ-16 भी राफेल के सामने कहीं नहीं ठहरता। रक्षा विशेषज्ञ कहते हैं कि इनकी तुलना राफेल से नहीं की जा सकती क्योंकि राफेल विमान इन लड़ाकू विमानों की तुलना में ज्यादा दक्ष हैं। चीनी जे-20 का मुख्य कार्य स्टील्थ फाइटर का है जबकि राफेल को कई कार्यों में लगाया जा सकता है। हैमर मिसाइलों से लैस राफेल ओमनी-रोल विमान है अर्थात् यह एक बार में कम से कम चार मिशन कर सकता है। जे-20 की बेसिक रेंज 1200 किलोमीटर है, जिसे 2700 किलोमीटर तक बढ़ाया जा सकता है। करीब 35 हजार वजनी जे-20 की लंबाई 20.5 मीटर, ऊंचाई 4.45 मीटर और विंगस्पैन 12.88-13.50 मीटर के बीच है अर्थात् यह राफेल से बड़ा और भारी है। राफेल की लम्बाई 15.3 मीटर और ऊंचाई 5.3 मीटर है जबकि इसके विंग्स की लम्बाई 10.9 मीटर है। राफेल की मारक क्षमता 3700 किलोमीटर तक है। पाकिस्तान के पास मौजूद जेएफ-17 में चीन ने पीएफ-15 मिसाइलें जोड़ी हैं लेकिन फिर भी यह राफेल के मुकाबले में कमजोर है। राफेल का सबसे खतरनाक हथियार है स्कैल्प पीएल-15 एमराम मिसाइल, जो 300 किलोमीटर तक हमला कर सकती है। हालांकि पाकिस्तान के एफ-16 में एमराम मिसाइलें लगी हैं लेकिन वे केवल 100 किलोमीटर तक ही हमला कर सकती हैं।

            भारतीय वायुसेना के पास मिराज-2000, सुखोई-30 एमकेआई जैसे आधुनिक विमान भी हैं लेकिन वे तीसरी या चौथी पीढ़ी के विमान हैं जबकि राफेल 4.5 जनरेशन का लड़ाकू विमान है, जिसमें आधुनिक हथियारों के प्रयोग के साथ बेहतर सेंसर की भी अत्याधुनिक सुविधा है। वर्ष 2016 में भारत-फ्रांस के बीच 36 राफेल की खरीद के लिए 59 हजार करोड़ रुपये का सौदा हुआ था, जिनमें से 5 राफेल 29 जुलाई को भारत पहुंच गए थे जबकि चार राफेल की अगली खेप के अगले माह आने की संभावना है। सौदे के मुताबिक 2022 तक भारत को सभी 36 राफेल मिल जाएंगे, जिनमें से पहले 18 राफेल अम्बाला एयरबेस में जबकि शेष 18 पूर्वोत्तर के हाशिमारा एयरबेस में तैनात किए जाएंगे। हालांकि पड़ोसी देशों की चुनौतियों का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए अभी वायुसेना को अभी ऐसे ही और राफेल विमानों की जरूरत है। सेवानिवृत्त एयर चीफ मार्शल अरूप साहा कहते हैं कि राफेल हवाई क्षेत्र में शक्ति के मामले में वायुसेना की क्षमताओं को बढ़ाने जा रहा है लेकिन देश को कम से कम 126 राफेल विमानों की जरूरत है, जिनकी कल्पना पहले की गई थी। पूर्व वायुसेना प्रमुख फली होमी मेजर का भी मानना है कि 36 राफेल विमान भारत की हवाई ताकत को तो बढ़ाएंगे लेकिन कम से कम दो और स्क्वाड्रन होने से देश की वायु प्रभुत्व क्षमता काफी मजबूत होगी।

            हवा से हवा तथा हवा से जमीन पर मिसाइल हमलों के लिए बहुआयामी भूमिकाएं निभाने के लिए राफेल को भारतीय वायुसेना की जरूरतों के हिसाब से परिष्कृत किया गया है। यह हवाई हमला, वायु वर्चस्व, जमीनी समर्थन, भारी हमला, परमाणु प्रतिरोध इत्यादि कई प्रकार के कार्य बखूबी करने में सक्षम है। इसमें उन्नत हथियार, उच्च तकनीक सेंसर, लक्ष्य का पता लगाने और ट्रैकिंग के लिए बेहतर रडार और प्रभावशाली पेलोड ले जाने की क्षमता है। परमाणु बम गिराने की ताकत से लैस राफेल में इजरायल हेलमेट-माउंटेड डिस्प्ले, रडार चेतावनी रिसीवर, लो बैंड जैमर, दस घंटे की उड़ान डाटा रिकॉर्डिंग, इन्फ्रारेड खोज और ट्रैकिंग प्रणाली शामिल हैं। कई शक्तिशाली हथियारों को ले जाने में सक्षम राफेल विमान उल्का बीवीआर एयर-टू-एयर मिसाइल (बीवीआरएएएम) की अगली पीढ़ी है, जिसे एयर-टू-एयर कॉम्बैट में क्रांति लाने के लिए डिजाइन किया गया है। राफेल की सबसे बड़ी विशेषता है कि इसमें ऑक्सीजन जनरेशन सिस्टम लगा होने के कारण लिक्विड ऑक्सीजन भरने की जरूरत नहीं पड़ती। अत्यंत घातक हथियारों से लैस ये विमान यूरोपीय मिसाइल निर्माता ‘एमबीडीए’ द्वारा निर्मित दृश्य सीमा से परे हवा से हवा में मार करने वाली मीटिअर मिसाइल के अलावा स्कैल्प क्रूज मिसाइल से भी लैस हैं। राफेल में बहुत ऊंचाई वाले एयरबेस से भी उड़ान भरने की क्षमता है। लेह जैसी जगहों और काफी ठंडे मौसम में भी यह तेजी से कार्य कर सकता है। इसकी विजिबिलिटी 360 डिग्री है, जिसके चलते यह ऊपर-नीचे, अगल-बगल अर्थात् हर तरफ निगरानी रखने में सक्षम है।

            राफेल में बैठे पायलट द्वारा दुश्मन की लोकेशन को देखकर बटन दबा देने के बाद बाकी काम इसमें लगे कम्प्यूटर करते हैं। मल्टीमोड रडार से लैस राफेल हवाई टोही, ग्राउंड सपोर्ट, इन-डेप्थ स्ट्राइक, एंटी-शर्प स्ट्राइक और परमाणु अभियानों को अंजाम देने में निपुण है। इसमें लगी मीटिअर मिसाइल सौ किलोमीटर दूर उड़ रहे दुश्मन के लड़ाकू विमान को भी पलभर में मार गिराने में सक्षम हैं। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी मिसाइल चीन-पाकिस्तान सहित समस्त एशिया में किसी भी देश के पास नहीं हैं। यह एक बार में दो हजार समुद्री मील तक उड़ सकता है। हवा से हवा में यह 150 किलोमीटर तक मिसाइल दाग सकता है और हवा से जमीन तक इसकी मारक क्षमता 300 किलोमीटर है। बहरहाल, पाकिस्तान और चीन की ओर से देश की सीमाओं की सुरक्षा को लगातार मिल रही चुनौती के मद्देनजर राफेल भारतीय वायुसेना को अभेद्य ताकत प्रदान करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

Leave a Reply

%d bloggers like this: