लेखक परिचय

डा. राधेश्याम द्विवेदी

डा. राधेश्याम द्विवेदी

Library & Information Officer A.S.I. Agra

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डा. राधेश्याम द्विवेदी
इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यूं तो कभी विवादों से मुक्त नहीं रही लेकिन भारत के चुनाव आयोग ने हमेशा इसे सुरक्षित और सही माना.भारत की जनता भी चुनाव आयोग से सहमत है. यदा-कदा राजनेता चुनावों में ईवीएम के ख़िलाफ़ बोलते रहे हैं लेकिन किसी बड़ी राष्ट्रीय पार्टी ने इसके ख़िलाफ़ कोई बड़ा कदम नहीं उठाया है. हर ईवीएम के दो हिस्से होते हैं. एक हिस्सा होता है बैलेटिंग यूनिट जो कि जो मतदाताओं के लिए होता है. दूसरा होता है कंट्रोल यूनिट जो कि पोलिंग अफ़सरों के लिए होता है. ईवीएम के दोंनो हिस्से एक पांच मीटर लंबे तार से जुड़े रहते हैं. बैलेट यूनिट ऐसी जगह रखी होती जहाँ कोई वोटर को वोट डालते समय देख ना सके.इसके अलावा संवेदनशील पोलिंग बूथ पर वोटिंग का सीधा प्रसारण होता है जो कि कहीं से भी देखा जा सकता है. ईवीएम पर 16-16 की चार यूनिटें लगाकर अधिकतम 64 प्रत्याशी तक दर्शाए जा सकते हैं. किसी लोकसभा क्षेत्र में 64 से ज़्यादा प्रत्याशी होने पर चुनाव आयोग कागज़ के बैलट का इस्तेमाल करने के लिए बाध्य है.चुनाव आयोग ये दावा कभी नहीं करता की इस मशीन के अंदर मौजूद सॉफ़्टवेयर के साथ छेड़ छाड़ नहीं की जा सकती. लेकिन चुनाव आयोग ये दावा ज़रूर करता है कि छेड़-छाड़ करने के लिए ईवीएम किसी के हाथ में नहीं लग सकतीं.
सुरक्षा के इंतज़ाम:- वोटिंग के पहले और बाद में हर मशीन को कड़ी निगरानी में कैद रखा जाता है. वोट डलने के बाद शाम को कई लोगों की मौजूदगी में पोलिंग अफ़सर इस मशीन को सील बंद करता है. हर वोटिंग मशीन को एक खास कागज़ से सील जाता है. ये कागज़ करंसी नोट की तरह ही खास तौर पर बने होते हैं. करंसी नोट की ही तरह हर कागज़ के ऊपर एक ख़ास नंबर होता है. हर मशीन के परिणाम वाले हिस्से में एक छेद होता है जिसे धागे के मदद से बंद किया जाता है और उसके बाद उसे कागज़ और गर्म लाख से एक ख़ास पीतल की सील लगा कर बंद किया जाता है.सील करने के बाद हर पोलिंग मशीन को सुरक्षा के घेरे में मतगणना केंद्र तक लाया जाता है.मतगणना केन्द्रों पर हर मशीन कड़े पहरे में रखा जाता है.
उत्तर प्रदेश में हो रहे निकाय चुनाव के दौरान एक बार फिर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम पर सवाल उठे हैं. कानपुर और मेरठ में कुछ मतदाताओं ने ऐसी शिकायत की है कि किसी भी पार्टी को वोट देने के लिए बटन दबाने पर वोट कथित तौर पर भाजपा को जाता है.इस कथित गड़बड़ी को लेकर कानपुर और मेरठ में मतदाताओं ने प्रदर्शन भी किया. राज्य चुनाव आयोग ने इसे महज अफवाह बताया है, लेकिन उत्तर प्रदेश की विपक्षी पार्टियों ने इसे लेकर सरकार पर हमला बोला.
पार्षद की झूठ पकड़ में आयी:-यूपी निकाय चुनाव के परिणाम आने के बाद EVM पर सवाल उठाने वाली सहारनपुर से पार्षद प्रत्याशी शबाना की पोल खुल गई है. उसने आरोप लगाया था कि उसे एक भी वोट नहीं मिला है. इस बात पर सवाल उठे कि आखिर उसका और उसके परिवार का वोट कहां गया? शबाना और उसके पति इकराम ने मीडिया में जब यह सवाल उठाया, तो इसके बाद यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी इस बयान को अपने ट्विटर हैंडल से रिट्वीट कर हवा दे दी. सच तो यह है कि सहारनपुर जिले से वार्ड नंबर-54 पर पार्षद के पद पर चुनाव लड़ रही शबाना को जीरो वोट नहीं, बल्कि 87 वोट मिले हैं. उत्तर प्रदेश इलेक्शन कमिशन की वेबसाइट में यह पूरा आंकड़ा दर्ज है. उसकी झूठ सीधे पकड़ में आ गयी है.
बहुजन समाज पार्टी का आरोप भी बनावटी:-उत्तर प्रदेश के निकाय चुनावों में बीजेपी के बाद दूसरे नंबर की पार्टी बनकर उभरी बहुजन समाज पार्टी (BSP) की मुखिया मायावती ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) से छेड़छाड़ का आरोप लगाया है। माया इससे पहले 2014 के आम चुनाव के दौरान भी EVM में गड़बड़ी का आरोप लगा चुकी हैं. निकाय चुनाव के परिणामों की बाबत पूछे जाने पर मायावती ने बीजेपी को चुनौती देते हुए कहा कि यदि 2019 के लोकसभा चुनाव बैलट पेपर पर होते हैं तो उनकी पार्टी सफाया कर देगी। मेरठ और अलीगढ़ में यह गड़बड़ी क्यों नहीं हुई जहां बीएसपी उम्मीदवार विजयी रहा है ? सच तो यह है कि ये जनता को भ्रम में डालकर पार्टियां अपनी साख इस बहाने बचाकर अपने समर्थकों का मनोबल बनाने के लिए करती है, पर यह सब पार्टियों की सोची समझी रणनीति होती है. इस कुप्रचार से उनके वोटर विखरने से बच जाते हैं.
केंद्रीय मंत्री की सफाई :-केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह का यह बयान उत्तर प्रदेश निकाय चुनाव के बाद विपक्षी दलों द्वारा इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) से छेड़छाड़ का आरोप लगाने पर तंज करते हुए आया. इसका कारण बताते हुए उन्होंने कहा, ‘हर दिन बीतने के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता का ग्राफ बढ़ता जा रहा है, इसलिए ईवीएम मशीनें उनके (विपक्ष) के पक्ष में कभी नहीं जाने वाली हैं.’ गुजरात चुनाव को लेकर जितेंद्र सिंह ने कहा कि कांग्रेस जमीनी हकीकत को समझने में चूक रही है, ऐसे में वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए जितना असम्मानजनक भाषा का इस्तेमाल कर रही है, उससे भाजपा को फायदा होने जा रहा है.
चुनाव आयोग की और सावधानी :- यूपी के निकाय चुनावों में बीजेपी की जीत के बाद कई विपक्षी दलों ने ईवीएम में गड़बड़ी का आरोप लगाया है। चुनाव आयोग इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) में गड़बड़ी के आरोपों के बाद यह फैसला लिया है कि वह गुजरात की प्रत्येक 182 विधानसाभाओं के किसी एक पोलिंग स्टेशन पर अचानक किसी मशीन का वोट काउंट और वोटर वैरिएबल पेपर ट्रेल (वीवीपैट) की स्लिप की गिनती करेगा।

 

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