लेखक परिचय

शादाब जाफर 'शादाब'

शादाब जाफर 'शादाब'

लेखक स्‍वतंत्र टिप्‍पणीकार हैं।

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में उस से प्यार करने का अलग अन्दाज रखता हॅू।
लबो को बन्द रखता हूॅ नजर से बात करता हॅू॥

प्यार कब, क्यो और कैसे होता है ठीक ठीक आज तक कोई नही बता सका। प्यार अन्धॉ होता है, प्यार दिवाना होता है, प्यार पागल होता है बरसो से सुनते चले आये है। दरअसल प्यार एक बहुत ही प्यारा बहुत ही धीमा जहर है। यू तो प्यार ऑखो के रास्ते दिल में उतरता है पर कई बार ये परवान चढ़ने में थोडा वक्त लेता है। प्यार का इजहार पहले कौन करे महीनो इसी में बीत जाते है। दो प्यार करने वाले सामने वाले की ओर से पहल का इन्तेजार करते रहते है। दिलो में प्यार होने के बावजूद पहले आप पहले आप में कोई तीसरा बाजी मार ले जाता है। शर्म, झिझक और संकोच के कारण कभी कभी प्यार जुबा पर नही आ पाता। और ऐसा प्यार दिल ही दिल में दम तोड देता है।
आज प्यार का इजहार करने के कई साधन है मोबाईल, ग्रीटिग कार्ड, इन्टरनेट चेटिग, रेस्टोरेन्ट, पिकनिक पाईंट आदि। पुराने जमाने में प्यार करने वालो पर किस कदर पहरे, सख्ती थी आज प्यार करने वालो को प्यार करने की खुली आजादी है। पुराने दौर में ज्यादातर हिन्दी फिल्मो में दिल ही दिल में प्यार करने वाली और हीरो के प्यार का इजहार करने पर शर्मा कर मुॅह में ऊगली के संग रूपट्टा दबाती हीरोईन दूर पेड की आड में छुपी हुई हीरो को देखकर मद मद मुस्कुराती भला कौन भूल पाया है। आज कल की फिल्मो में मारधाड नंगेपन के अलावा कुछ नजर नही आता। एक वो दौर था जब प्रेम पर आधारित फिल्मे बनती थी। लैला मजनू,हीर राझा,सोनी महीवाल,मुगले आजम ,अनारकली,पाकिजा, पे्रमरोग, बाबी, ताज महल, लव स्टोरी, एक दूजे के लिए,बरसात की एक रात, बहू बेगम, साहब बीवी और गुलाम, मेरे महबूब, मेरे हुजूर, पालकी, आरजू, कभी कभी, आदि बेशुर फिल्मो ने हमारे दिलो में पाक मौहब्बत का जज्बा पैदा किया। प्यार क्या होता है क्यो होता है इन फिल्मो ने सच्चे प्यार करने वालो को एक बहुत ही अच्छी गाईड लाईन दी। सच्ची और पाक मौहब्बत की नींव हमारे समाज में डाली।
लेकिन आज भी प्यार का इजहार करने शादी का प्रस्ताव रखने के लिये आमतौर पर युवको को ही क्यो पहल करनी पडती है। समाज से लडने के लिये प्यार का इजहार करने के लिये युवतिया आगे क्यो नही आ पाती,प्यार का इजहार करने और शादी का प्रस्ताव रखने में क्यो हिचकिचाती है। शायद युवतिया में ये हीन भावना रहती है की कही उन के पहले पहले प्यार को कोई ठुकरा न दे। लडकिया अपने मनपसन्द सपनो के राजकुमार को प्रपोज करने से यू भी हिचकिचाती है की यदि उस की एक ना ने उसके सारे सपने चूर चूर कर दिये तो क्या होगा। इस से ये ही अच्छा है की वो उस के द्वारा प्रपोज किये जाने का इन्तेजार करे। यदि ये सोचकर युवतिया प्यार का इजहार करने का विशोषाधिकार युवको को देती है तो ये निहायत ही बेवकूफी भरी बात है। किसी लडकी का किसी लडके को प्यार में पहले प्रपोज करना यह दिखाता है की उस के अन्दर आत्मविश्वास की कोई कमी नही है और वो परिणाम की चिन्ता किये बगैर अपने दिल की बात कह सकती है। अपनी जिन्दगी से सम्बन्धित फैसले करने की उस में हिम्मत है। क्यो कि सदियो पहले राजकुमारिया स्वयंवर के जरिये अपनी पसंद का राजकुमार चुनती थी यानी युवतियो को पहले प्रपोज करना चाहिये आखिर उन्हे भी तो हक है अपनी पसन्द का राजकुमार चुनने का बताने का, देखने का।
एक बात यहा यह भी जरूरी है कि प्यार की बुनियाद कभी भी झूठ पर नही रखनी चाहिये। विवाह और प्यार दोनो ही बडे पवित्र और नाजुक रिश्ते है विवाह जैसे स्थाई जन्म जन्मान्तर के रिश्ते की नीव यदि आप झूठ पर रखेगे तो रिश्ता बहुत जल्द टूट जायेगा। प्यार में ये बिल्कुल नही होना चाहिये तू नही और सही, और नही और सही। आप का दिल जिस पर आ गया उस को पाने के लिये थोडा इन्तेजार थोडा दर्द थोडी तडप तो सहन करनी ही चाहिये। उस प्यार का मजा ही क्या जिस में तडप जुदाई बैचेनी इन्तेजार ना हो। लेकिन ये इन्तेजार इतना लम्बा भी नही होना चाहिये की आप उस की हा सुनने के लिये उस के प्यार के इजहार के इन्तेजार में राहो पर पल्के बिछाये रहे और पोंस्टमैन आप को उस की शादी का कार्ड दे जाये। इस लिये अपने प्यार को प्रपोज करने में देर न करे जब मौका मिले आई पी एल मैच में युवराज की तरह छक्का जड दे और अपने सपनो के राजकुमार या राजकुमारी से कहे “क्या आप मुझ से शादी करोगे?”

2 Responses to “प्यार करे तो इजहार भी करे”

  1. jitendra kushwah

    mai ek ladaki se pyar karata hun vo bhi mughe देखा karati hai lekin mai usase ijahar nahi kar pa raha hu mughe kya karana chahiye vo meri padosan hai.

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