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    Homeसाहित्‍यकवितासबका देह देवालय है सबकी दुआ और वफा करना

    सबका देह देवालय है सबकी दुआ और वफा करना

    —विनय कुमार विनायक
    सारे मानव भाई है सबके सब एक ही
    सबका देह देवालय है सबकी दुआ और वफा करना!

    हर देवालय में देव बसे हैं एक ही जैसे
    उन्हें खुद से अलग नहीं कोई दूजा पराया समझना!

    सबकी देह से नेह स्नेह कर ले बन्दे
    देह सभी मंदिर है जिसमें एक रब का है आशियाना!

    मंदिर मस्जिद गिरजाघर में बसते
    एक ईश्वरीय शक्ति उनमें कोई भेदभाव नहीं करना!

    सबकी काया के अंदर जो परमपिता बैठे
    उस परमपिता को अलग-अलग खांचे में नहीं बांटना!

    सबके सब एक ही रब के नूर से निखरे
    सब शरीरधारी की सलामती का सदा आशीष मांगना!

    ईश्वर का अस्तित्व देह से भिन्न नहीं होता
    पंचभूत शरीर हीं है मूर्तिमान ईश्वर का ठौर ठिकाना!

    सब जीवित मनुष्य की काया एक ही होती
    उसे हिन्दू मुस्लिम यहूदी ईसाई में क्योंकर बांटना!

    जब ब्रह्मा विष्णु महेश का वर्ण जाति नहीं
    फिर क्यों मानव को ब्राह्मण अंत्यज जाति कहना!

    अल्लाह की औलाद सभी,खुदा भी खुदगर्ज नहीं
    फिर क्यों आदमी को काफ़िर कहकर घृणा फैलाना!

    आठ पहर पांच वक्त पूजा नमाज दिखावा है
    अगर बंद नही होता मजहब के नाम हिंसा करना!
    —विनय कुमार विनायक

    विनय कुमार'विनायक'
    विनय कुमार'विनायक'
    बी. एस्सी. (जीव विज्ञान),एम.ए.(हिन्दी), केन्द्रीय अनुवाद ब्युरो से प्रशिक्षित अनुवादक, हिन्दी में व्याख्याता पात्रता प्रमाण पत्र प्राप्त, पत्र-पत्रिकाओं में कविता लेखन, मिथकीय सांस्कृतिक साहित्य में विशेष रुचि।

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