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    Homeसाहित्‍यकविताफीका-फीका फाग

    फीका-फीका फाग

    बदले-बदले रंग है, फीका-फीका फाग !
    ढपली भी गाने लगी, अब तो बदले राग !!

    फागुन बैठा देखता, खाली हैं चौपाल !
    उतरे-उतरे रंग है, फीके सभी गुलाल !!

    बढ़ती जाए कालिमा, मन-मन में हर साल !
    रंगों से कैसे मलें, इक दूजे के गाल !!

    सूनी-सूनी होलिका, फीका-फीका फाग !
    रहा मनों में हैं नहीं, इक दूजे से राग !!

    स्वार्थ रंगी जब भावना, रही मनों को चीर !
    बोलो सौरभ फाग में, कैसे उड़े अबीर !!

    मन को ऐसे रंग लें, भर दें ऐसा प्यार !
    हर पल हर दिन ही रहे, होली का त्यौहार !!

    फौजी साजन से करे, सजनी एक सवाल !
    भीगी सारी गोरियाँ, मेरे सूने गाल !!

    आओ सजनी मैं रंगूँ, तेरे गोरे गाल !
    अनायास होने लगा, मनवा आज गुलाल !!

    सजनी तेरे सँग रचूँ, ऐसा एक धमाल !
    तुझमे खुद को घोल दूँ, जैसे रंग गुलाल !!

    ✍ डॉo सत्यवान सौरभ

    डॉ. सत्यवान सौरभ
    डॉ. सत्यवान सौरभ
    रिसर्च स्कॉलर इन पोलिटिकल साइंस, दिल्ली यूनिवर्सिटी, कवि,स्वतंत्र पत्रकार एवं स्तंभकार

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