फिल्म समीक्षा (रिव्यु )– कटप्पा और बाहुबली की गुत्थी सुलझाता है ‘बाहुबली 2

फिल्म का नाम: बाहुबली 2: द कन्क्लूजन

डायरेक्टर: एस एस राजामौली

स्टार कास्ट: प्रभास , राणा दग्गुबत्ती, अनुष्का शेट्टी, तमन्ना भाटिया , सथ्यराज, राम्या कृष्णन ,

अवधि: 2 घंटा 47 मिनट

सर्टिफिकेट: U/A

रेटिंग: 5 स्टार

डायरेक्टर एस एस राजामौली का नाम आते ही ‘मगाधीरा’ और ‘ईगा’ और अब ‘बाहुबली: द बिगिनिंग’ जैसी फिल्में आंख के सामने आ जाती हैं, बाहुबली की भव्यता के बाद पूरे विश्व के लोग सिर्फ इस बात का इंतजार कर रहे थे की आखिरकार ‘बाहुबली 2’ कब रिलीज होगी और ये पता चलेगा की कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा? अब वो घड़ी आ चुकी है, क्या है इस सवाल का राज और कैसी बनी है यह फिल्म आइए फिल्म की समीक्षा करते हैं.

कहानी—
यह कहानी वहीं से शुरू होती है जहां बाहुबली 1 की कहानी खत्म हुई थी, और शिवा उर्फ महेंद्र बाहुबली (प्रभास) को कटप्पा (सत्यराज) ये बताने की कोशिश करता है की आखिरकार महाराजा अमरेंद्र बाहुबली (प्रभास) की हत्या कैसे हुई थी. कहानी फ्लैशबैक में जाती है और उस समय का जिक्र होता है जब महिष्मति के साम्राज्य में अमरेंद्र बाहुबली का राज्याभिषेक होने वाला होता है और लोग खुश थे, लेकिन ये बात भल्लाल देव (राणा दग्गुबत्ती) को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं थी. जिसकी वजह से वो अपने पिता के साथ मिलकर अमरेंद्र बाहुबली को मारने का प्लान बनाता है, जिसमें कटप्पा को आगे रख दिया जाता है और महारानी शिवागामी (राम्या कृष्णन) को भी गलत शलत बोलकर विश्वासघात करता है. साथ ही कहानी में देवसेना (अनुष्का शेट्टी) की एंट्री होती है. कैसे देवसेना से बाहुबली की मुलाकात होती है और यह मुलाकात एक प्रेम में बदलती है. साथ ही भल्लालदेव देवसेना पर भी अपनी कू-दृष्टि रखता है. और अपनी माता के बाहुबली को राजा चुने जाने से क्रोध की आग में जलते हुए भल्लालदेव के हृदय पर यह एक बड़ा आघात होता है कि देवसेना उसे न चुनकर बाहुबली को चुनती है. ऐसे में भल्लालदेव का क्रोध और बढ़ जाता है. वो किसी तरह से बाहुबली को मरवाना चाहता है. लेकिन कटप्पा बाहुबली को मार देता है. आखिर कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा इसके लिए आपको फिल्म देखना होगी. जो आपको फिल्म के पहले हाल्फ के कुछ देर पहले ही पता चल जायेगा.
अब किन परिस्थितियों के अंतर्गत बाहुबली का कत्ल होता है, इसका पता आपको फिल्म देखकर ही लगाना पड़ेगा, क्योंकि ये ऐसा सरप्राइज है जिसे मेकर्स ने 2 साल से छुपा कर रखा है और उसे यहां रिव्यू लिखते वक्त खोल देना, अच्छा काम नहीं होगा लेकिन बस ये बता देना चाहूंगा कि कटप्पा और बाहुबली के जोक को तो आपने सुना होगा पर उस सीन के फि‍ल्मांकन के दौरान आप इमोशनल भी होते हैं. खैर कहानी आगे बढ़ती है, आखिरकार भल्लाल और बाहुबली के बीच प्रचंड युद्ध होता है.

संगीत – फिल्म का संगीत बहुत ही शानदार है फिल्म का संगीत M. M. किरवानी ने दिया है. फिल्म के गाने अभी तक पूरी तरह सामने नहीं आये है. केवल फिल्म के गाने जियो रे बाहुबली का प्रोमो ही सामने आया था. लेकिन यह फिल्म में पूरी तरह आपको काफी बेहतरीन प्रतीत होता है. फिल्म के बाकी गाने भी आपको फिल्म की कहानी के साथ पूरी तरह न्याय करते हुए नजर आते है.फिल्म का संगीत और खासतौर पर बैकग्राउंड स्कोर कमाल का है जो आपको बांधे रखता है. फिल्म के द्वारा फिक्शन की कहानी काफी रीयल लगती है जो की इक्कीसवीं सदी में डायरेक्टर एस एस राजामौली की जीत है. क्लाईमैक्स की जंग के दौरान ताबड़तोड़ एक्शन है जिसकी परिकल्पना कर पाना भी मुश्किल है , तालियों की गड़गड़ाहट थिएटर में गूंजती है.

अभिनय – फिल्म में प्रभास बाहुबली के किरदार में है. वे फिल्म में यवेंद्र बाहुबली और शिवा के किरदार को पूरी तरह जी उठते है. और वही भल्लाल देव के किरदार में राणा डग्गुबाती एक बड़े खलनायक के रूप में सामने आते है. जो क्रूर और निर्दयी है. वही देवसेना बनी अनुष्का फिल्म में दर्शको का ध्यान खींचती है. चाहे वो अपने अभिनय और सुंदरता हो या फिर अपने द्वारा चलाये गए धनुष और तलवारो से. वही सत्यराज, तमन्ना, रमाया कृष्णा और नस्सर अपने अभिनय से बाहुबली में जान डाल देते है.सुपर स्टार सुदीप का किरदार भी काफी दिलचस्प है.

प्रभास ने शारीरिक रूप से बहुत ही बेहतरीन काम किया है, तालियां भी बटोरते हैं साथ ही उनके अपोजिट राणा दग्गुबत्ती का काम भी काबिल ऐ तारीफ है जिनसे आपको घृणा भी होने लगती है साथ-साथ राम्या कृष्णन और अनुष्का शेट्टी के अलग अलग रूप, तमन्नाह भाटिया का पराक्रम, सत्यराज की गुत्थियां और बाकी किरदारों की सहज एक्टिंग है, जो देखने योग्य है.

निर्देशन – फिल्म बाहुबली 2 का निर्देशन एस एस राजामौली ने किया है. जो कि बाहुबली द कन्क्लूजन से दर्शको को किसी अलग दुनिया में ले जाते है. दर्शक फिल्म से अपने आप को जोड़ लेते है. यह फिल्म कहानी के साथ साथ ग्राफिक के लिए आपको याद रहेगी. फिल्म का ग्राफिक आपको हॉलीवुड फिल्म की टक्कर का दिखाई देता है जो आपके दांतो तले आपकी उंगलिया दबाने पर मजबूर कर देगा.

लेकिन नहीं रोक पाए आंसू —

फिल्म में अगर हंसाने वाले सीन हैं तो बाहुबली के दूसरे हिस्से ने रुलाया भी. दम साधे दर्शकों की आंखें कई बार नम हुईं. मां शि‍वगामी का बेटे बाहु को महल से निकालना और कटप्पा का भारी दिल से प्यारे भांजे की पीठ में तलवार घोंपना, जैसे दृश्यों पर कई हाथ आंखें पोंछ रहे थे.

और थमी रही दर्शकों की सांसें—

फिल्मों में कई सीन ऐसे भी हैं जो दर्शकों को हैरान कर देते हैं. और ऐसा बांधते हैं कि पलक झपकाते हुए भी लगता है कि कुछ छूट जाएगा. क्लाइमेक्स ऐसा जानदार है कि हॉलीवुड फिल्मों के छक्के छुड़ा दिए हैं. बाहुबली ने उन लोगों को करारा जवाब दिया है जो बॉलीवुड की फिल्मों को सतही कहकर बस विदेशी फिल्मों का गुणगान करते हैं. फिल्म से एक खास कनेक्शन तब भी महसूस होता है जब इसके पोस्टर्स को आप स्क्रीन पर लाइव होते देखते हैं. बाहुबली का हाथी की सूंड पर चढ़ना, देवसेना का राजसी रूप, बाहु और देवसेना का एक साथ तीरकमान चलाना… जैसे सीन पर्दे पर एक अलग ही कनेक्शन सेट करते हैं.

जानिए आखिर फिल्म को क्यों देख सकते हैं?
अगर यह सवाल हम आपसे पूछे या आप हमसे पूछे तो ये बेमानी होगी. यह एक शानदार फिल्म है. फिल्म की कहानी बहुत ही उम्दा है जो आपको बांधे रखती है साथ ही स्क्रीनप्ले दमदार है. फिल्म का डायरेक्शन लाजवाब है और डायरेक्शन के साथ-साथ वीएफएक्स जबरदस्त है जो आपको 2डी में 3डी का आनंद देता है. और यही कारण है की फिल्म विजुअली काफी रिच है. हर एक सीन में कुछ न कुछ खास जरूर देखने को मिलता है. बहुत ही अद्भुत फिल्मांकन है जिसकी तारीफ जितनी भी की जाए कम है.फिल्म की कहानी,संगीत,कलाकारों का अभिनय और फिल्म में दिखाया गया ग्राफिक अव्वल दर्जे का है. जो आपको एक अलग दुनिया में ले जाता है.भारतीय सिनेमा प्रेमियों को राजामौली को उनके विज़न और लक्ष्य के लिए उन्हें जरूर सल्यूट करना चाहिए। एक बार फिर से उन्होंने ‘बेन-हर’ और ‘टेन कमांडेंट्स’ की याद को ताजा कर दिया है। जी हां, फिल्म में CGI और VFX के इस्तेमाल से क्रिएट किए गए सीन आपको अपनी सीट से बांधकर रखने की ताकत रखते हैं और बाहुबली भी आपको इमोशनल उतार-चढ़ाव में कैद कर पाने में सफल होता है। देवसेना और अमरेंद्र के बीच रोमांस के सीन काफी भव्यता के साथ फिल्माए गए हैं। बाकी किरदारों का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक है। हॉलिवुड ऐक्शन डायरेक्टर पीटर हिन की मेहनत फिल्म में प्रभास के ऐक्शन में नज़र आ रही है और यही इस फिल्म का सबसे मजबूत पक्ष है।

कमजोर कड़ियां
फिल्म को हिंदी में डब किया गया है , जिसकी वजह से रेगुलर लिप सिंक आपको देखने को नहीं मिलता और गाना कोई और होता है पर आर्टिस्ट कुछ और ही तरह से लिप्स हिलाता हुआ दिखाई पड़ता है, हालांकि टीवी पर ऐसी डब की हुई फिल्मों की भरमार है और अब तो आदत भी हो चुकी है, इक्का दुक्का चीजें, इस फिल्म की भव्यता के सामने काफी कम हैं.

रैटिंग – फिल्म को हम पूरे पांच स्टार देंगे. क्योकि फिल्म में एक भी ऐसी खामी नहीं है जो कि फिल्म को आधा स्टार भी काटने देने पर मजबूर करे. हालाँकि फिल्म 2 घंटे 50 मिनिट लम्बी है लेकिन यह लम्बाई फिल्म की कहानी को पूरी तरह दर्शाती है. और पूरा न्याय करती है.

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