इंसानियत की खातिर जिन्होंने कभी सिद्धांतों व विचारधारा से नहीं किया था समझोता

दीपक कुमार त्यागी

भारतीय राजनीति में बिना किसी संवैधानिक पद को हासिल किये बिना भी आम-जनमानस के दिलोदिमाग में जगह बनाने वाले विरले ही लोग रहे हैं। आम जनमानस की सशक्त आवाज कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव त्यागी का व्यक्तित्व कुछ ऐसा ही रहा है। उन्होंने जीवन भर विचारधारा, रिश्ते-नाते, आपसी संबंधों व मानवता को महत्व देकर शान से अपनी जिंदगी को जीने का कार्य किया था। राजीव त्यागी को सार्वजनिक जीवन में जो भी राजनीतिक व सामाजिक रूप छोटी या बड़ी जिम्मेदारी मिली, उन्होंने उसका बहुत ही ईमानदारी व शानदार ढंग से हमेशा निर्वहन किया। सर्वशक्तिमान ईश्वर की विचित्र माया देखों की अपने अंतिम समय तक भी राजीव त्यागी एक वीर योद्धा की तरह न्यूज चैनल की डिवेट पर बैठकर कांग्रेस पार्टी का दमदार ढंग से पक्ष रख रहे थे, कांग्रेस पार्टी के लिए राष्ट्रीय प्रवक्ता की जिम्मेदारी निभाते हुए ही अचानक राजीव त्यागी का हृदयाघात होने के चलते 12 अगस्त 2020 को निधन हो गया था। जीवन में गांधीवादी विचारधारा को मानने के चलते राजीव त्यागी ने कांग्रेस पार्टी को अपना तन मन धन व अंत में अनमोल जीवन भी समर्पित कर दिया था, जीवन के अंतिम समय में वह पार्टी के लिए जिम्मेदारी निभाते हुए चंद क्षणों में ही दुनिया से चले गये थे। हालांकि अब कांग्रेस पार्टी की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह आजीवन उनको याद रखें और उनकी जयंती व पुण्यतिथि पर उनको ससम्मान याद करें, यही कांग्रेस पार्टी की तरफ से उनको सच्ची श्रद्धांजलि होगी। हाल ही में 12 अगस्त को इस महान कर्मयोगी इंसान राजीव त्यागी की प्रथम पुण्यतिथि थी, इस अवसर पर हम उनको कोटि-कोटि नमन करते हुए विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं और उनके सार्वजनिक जीवन से जुड़े कुछ पहलुओं को जानने का प्रयास करते हैं।

राजीव त्यागी का जन्म मूल रूप से बिजनौर जनपद के नजीबाबाद तहसील के गांव हरेवली निवासी एक मध्यवर्गीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी परिवार में 29 सितंबर 1967 को जनपद मेरठ में हुआ था, राजीव त्यागी की प्रारंभिक से लेकर इंटरमीडिएट तक की शिक्षा पिता वाई. वी. त्यागी के सरकारी नौकरी में होने के चलते केन्द्रीय विद्यालय मेरठ व हरिद्वार में हुई थी, उन्होंने ग्रेजुएशन दो पार्ट में हरिद्वार व मेरठ के कॉलेज से किया था, वह हरिद्वार में कॉलेज के छात्रसंघ के सचिव भी रहे, इसके बाद वह पढ़ने के लिए गाजियाबाद आ गये, जहां उन्होंने शहर के प्रतिष्ठित कॉलेज से एमबीए किया और वह उस कॉलेज की छात्रसंघ के अध्यक्ष भी रहे। उसके पश्चात उन्होंने देश की विभिन्न जानीमानी कम्पनियों में नौकरी करके परिवार का जीवनयापन करते हुए राजनीति की शुरुआत करके विभिन्न राजनैतिक व सामाजिक दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन करना शुरू कर दिया था।

राजीव त्यागी जीवन भर कभी भी आज के समय के राजनेताओं की तरह पद या सत्तालोलुप नहीं रहे, वह कभी राजनीति में पद हासिल करने के पीछे नहीं भागे, उन्होंने हमेशा सकारात्मक कर्म करने पर ध्यान देते हुए जीवन भर सामजिक दायित्वों को निर्वहन करने का कार्य किया। हालांकि राजनीतिक जीवन में चाटूकारिता ना करने की वजह से राजीव त्यागी को उनका तय सम्मान कभी नहीं मिल पाया। आज के व्यवसायिक दौर में भी उन्होंने हमेशा राजनीति में सुचिता के सिद्धांतों को जीवित रखकर पूर्ण निष्ठा व ईमानदारी से कार्य किया। राजीव त्यागी ने अधिकांश दलों के राजनेताओं की तरह जीवन में राजनीति को कभी व्यापार नहीं माना था, उन्होंने राजनीति को हमेशा मानव सेवा का सबसे सशक्त माध्यम मानकर कार्य किया। उनकी सबसे बड़ी खूबी यह थी की वह बेहद खामोशी के साथ इंसान व इंसानियत की मदद करते थे, कभी भी आज के राजनेताओं की तरह वह अपने द्वारा किये गये सामाजिक कार्यों का सार्वजनिक रूप से ढ़िंढ़ोरा नहीं पीटते थे, वह हमेशा रहीम का यह दोहा सुनाते थे-

“देनहार कोउ और है , भेजत सो दिन रैन ।
लोग भरम हम पै धरैं, याते नीचे नैन ॥

जिसका भावार्थ है कि – हम कहाँ किसी को कुछ देते हैं। देने वाला तो दूसरा ही है, जो दिन-रात भेजता रहता है इन हाथों से दिलाने के लिए। लोगों को व्यर्थ ही भरम हो गया है कि रहीम दान देता है। मेरे नेत्र इसलिए नीचे को झुके रहते हैं कि माँगने वाले को यह भान न हो कि उसे कौन दे रहा है, और दान लेकर उसे दीनता का अहसास न हो।”

इसलिए राजीव त्यागी सार्वजनिक जीवन में कभी भी दिखावे पर विश्वास नहीं रखते थे, लेकिन ईश्वर को कुछ ओर ही मंजूर था आमजनमानस की बेहद सशक्त आवाज वाले इस महायोद्धा का 12 अगस्त 2020 को आकस्मिक निधन हो गया था, लेकिन ईश्वर की इच्छा पर कभी भी किसी का कोई नियंत्रण नहीं चलता है, उस सर्वव्यापी सर्वशक्तिमान का निर्णय सर्वमान्य होता है। लेकिन फिर भी ना जानें क्यों बार-बार एक बात मन को कटोचती रहती है कि जिस राजनीति में कदम-कदम पर छल-कपट, झूठ-प्रपंच कूट-कूट कर भरा हो, जहाँ आजकल इंसान व इंसानियत के हितों के नाम पर आयेदिन जमकर धरातल पर नौटंकी तो होती है, लेकिन वास्तव में जनहित से दूर-दूर तक कोई रिश्ता-नाता सरोकार नहीं होता है, उस राजनीति के माहौल में एक बेहद बेहतरीन सच्चे इंसान व संत महात्मा की तरह सनातन धर्म की परंपराओं के अनुसार बेहद सात्विक और संयमित जीवनयापन करने वाली महान पुण्यात्मा को आखिर ईश्वर ने अपने पास इतनी जल्दी क्यों बुला लिया। जो व्यक्ति हर समय अपने आसपास सबका ध्यान रखने का प्रयास करता रहता हो, आखिर उसको ईश्वर को इतनी जल्दी अपने पास नहीं बुलाना चाहिए था, क्योंकि लोगों को उसके सहयोग की बेहद जरूरत थी। मेरा मन अक्सर यह सोच कर व्यथित हो जाता है कि जिस सच्चे व बेहद शानदार इंसान को प्रभु ने खुद ही जनसेवा का सबसे सशक्त माध्यम बनाकर धरा पर भेजा था, आखिर उसको इतनी जल्दी बहुत कम उम्र में हम लोगों के बीच से छीनकर सर्वशक्तिमान प्रभु ने वापस अपने पास क्यों बुला लिया। वैसे राजीव त्यागी का मिलनसार शानदार व्यवहार, स्पष्टवादिता, ईमानदारी व उनके द्वारा अक्सर बिना किसी दिखावे के मानव सेवा के लिए किये जाने वाले कार्यों को देखकर यह लगता है कि राजीव त्यागी की देश की राजनीति व समाज को बहुत ज्यादा जरूरत थी, लेकिन ईश्वर ने हम से उस बेहतरीन इंसान को बहुत जल्द अचानक ही छीन लिया। जो भी व्यक्ति राजीव त्यागी से जीवन में एकबार भी मिल लिया उनमें से अधिकांश का भी मन एक वर्ष बाद आज तक भी यह स्वीकार नहीं करता है कि राजीव त्यागी अब इस दुनिया में नहीं रहे हैं। राजीव त्यागी जी ने अपने व्यक्तित्व से आम जनमानस के दिलोदिमाग पर ऐसी अमिट छाप छोड़ी है कि वह हमेशा के लिए अजर-अमर हो गये हैं। हालांकि अब तो केवल डिजिटल दुनिया में उनकी दबंग कड़कड़ाती आवाज व लोगों के जहन में उन से जुड़ी अनमोल यादें ही शेष रह गयी हैं। लेकिन आज के राजनीतिक दौर में राजीव त्यागी के दुनिया से चले जाने के बाद आज उनकी इंसान व इंसानियत के सेवाभाव वाली विचारधारा को जिंदा रखना बहुत बड़ी चुनौती है।मैं अपनी चंद पंक्तियों के माध्यम से उन्हें अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ-

“वक्त ने देखें हैं सितारे बहुत कम तुम जैसे,
जीते है सबके लिए लोग कम हैं तुम जैसे,
हालात जो हैं मेरे चमन के आजकल यारों,
वक्त की जरूरत है तुम्हें जिंदा रखें आज यारों।।”

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