लेखक परिचय

अनिल अनूप

अनिल अनूप

लेखक स्‍वतंत्र टिप्‍पणीकार व ब्लॉगर हैं।

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-अनिल अनूप
सेक्स शब्द सुनते ही आम आदमी थोड़ा शर्मा जाता है, क्यों शर्मा जाता है? क्योंकि हमारे समाज ने हमें यही सिखाया है। सेक्स शब्द से शादी और पति-पत्नी जुड़ चुके हैं और इससे इतर हटकर शायद आप नहीं सोच पाते। अगर सोचते भी हैं तो कहीं न कहीं आपके मन में एक अपराधबोध होता है। लेकिन दुनिया में ऐसे कई लोग हैं जो इसे लेकर बेहद खुले विचार रखते हैं या यूं कह लीजिए कि इनके अपने बिल्कुल अलग सेक्स ट्रेडिशन हैं।
फ्री सेक्स माने क्या? किससे फ्री, कब से फ्री, कबतक फ्री, कहाँ से फ्री…
भारत में तो मंदिरों की दीवारों पर भी यौन-क्रियाओं को योगासन की भाँति चित्रित किया गया है।दुनिया का पहला यौनशास्त्र महर्षि वात्स्यायन ने लिखा।इससे यौन-क्रिया की प्रतिष्ठा और उसके गहरे ज्ञान का अंदाजा लगता है।
देवी-देवताओं की मूर्तियाँ भी इसका प्रमाण हैं जो अनावश्यक वस्त्रों से युक्त नहीं होतीं।इसी का एक्सटेंशन है कोख पर नारी या माता का अधिकार।
सवाल उठता है कि किन परिस्थितियों में और कब से भारत में नारी ‘सेकंड सेक्स’बनी? कुछ हिस्सों में पति की मौत पर जौहर करने लगी तो कुछ अन्य हिस्सों में पति की चिंता पर जलायी जाने लगी और यहाँ तक कि बाजार में खरीद-बिक्री का सामान बन गई?
जिस समाज में सीताराम-राधेश्याम-गौरीशंकर-अं जनीपुत्र कहने की परंपरा हो वहाँ इतनी क्रूरता निश्चय ही कुछ विकट परिस्थितियों में और बाहरी दबाव में जन्मी होगी।इसलिए हिन्दू समाज में नारी के संवैधानिक अधिकारों का वैसा विरोध नहीं है जैसा मुस्लिम समाज में शाहबानों या तीन तलाक मामले में दिखता है।
इसी संदर्भ में इस बात की भी पड़ताल होनी चाहिए कि वामपंथी नेता कविता कृष्णन के ‘फ्री सेक्स’ पर बयान के क्या निहितार्थ हैं।
आखिर फ्री से मतलब क्या है?
परिवार से, लाज -लिहाज से, समाज से, घर-मकान से, शादी के बंधन से…
एक या कुछेक तक सीमित रहने से, धन या बिना धन के आदान-प्रदान के जब जिससे हो जाए मन से या जबरदस्ती…
प्रजनन की जिम्मेदारी से, प्रजनन हो भी तो बाल-बच्चे पालने से…
सिर्फ एक बात की तरफ ध्यान दिलाना जरूरी है कि युवाओं की आबादी के प्रतिशत को
बढ़ाने का तर्क देकर यूरोपीय सरकारें सीरियाई शरणार्थियों द्वारा बलात्कार को भी माला की तरह पहनने को राजी हैं।मीडिया और पुलिस दोनों को ‘गो साॅफ्ट ऑन रेप बाई मुस्लिम माइग्रेंट्स’ का अनऑफिशल आदेश मिला हुआ है।
मेरिटल रेप आज भारत में एक चर्चा का विषय है क्यूंकि सरकार पर इससे संबन्धित कानून बनाने का दबाव है l
यह एक प्रकार से महिलाओं को उनके वैवाहिक जीवन में यौन सुरक्षा देने का मुद्दा हैl
सबसे पहले तो बता दूँ कि यह शब्द पश्चिमी जगत से भारत में आया है
वो पश्चिमी जगत जहां कभी स्त्री को गुलाम से अधिक नहीं समझा गया l
वो पश्चिमी जगत जो एक संभ्रांत घराने की महिला मैरी को इसलिए चरित्रहीन घोषित कर देना चाहता था क्यूंकि वो एक महिला को धर्म-गुरु स्वीकार नहीं कर सकते थे खैर ! समय बदला उसी पश्चिमी जगत में आधुनिक पूंजीवाद का उदय हुआ और फिर वो लोग महिला स्वतन्त्रता का नारा देने लगे l
ताकि महिलाओं को घरों से निकाल कर सार्वजनिक किया जा सके
नग्नता और अश्लीलता का प्रयोग बाजारी लाभ के लिए किया जाने लगा l
तो ये है उस पश्चिमी जगत की वास्तविकता जहां से यह मेरिटल रेप शब्द हमारे देश में पहुंचा है जिसमें एक महिला को यह अधिकार होता है कि वो अपने पति से विवाह के भीतर रहते हुए भी पति को यौन सम्बन्धों से इंकार कर सकती है l
वैसे मैं इस बात से कतई इंकार नहीं करूंगा कि आज लोगों का वैवाहिक जीवन विवाह के मूल आदर्शों से बहुत दूर जा चुका l
एक समय आने के बाद सभी अपने-अपने कैरियर में व्यस्त हो जाते हैं और सबके कार्यक्षेत्र भी अलग-अलग हो जाते हैं
इसलिए अच्छे मित्रों से भी रेगुलर कांटैक्ट नहीं रह पाता
ऐसे में आपका जीवन साथी ही एक ऐसा मित्र होता है जिससे आप अपनी हर बात, हर खुशी, हर तकलीफ साझा कर सकते हैं उस पर विश्वास कर सकते हैं और वो हर समय आपके लिए उपलब्ध होता है
समस्या तो इस बात की है जब शादियाँ वर-वधू के गुणों के आधार पर नहीं बल्कि किसी की सुंदरता दहेज सैलरी संपत्ति इन आधारों पर होती है ऐसे में गुणों का मिलना कुछ असंभव सा हो जाता है और यहीं से समस्याएँ शुरू होती हैं ऐसे में इस समस्या का समाधान क्या है ?
विवाह जैसी पवित्र संस्थाओं में जो भ्रष्टाचार हमने घुसा दिया है उसे समाप्त करना या फिर विवाह जैसी संस्थाओं को ही समाप्त कर देना ?
यदि आपका हाथ गंदा है और आपको भोजन करना है तो आप हाथ धोएंगे और फिर भोजन करेंगे
या फिर क्यूंकि हाथ गंदा है इसलिए जानवर की तरह थाली पर मुंह मरने लगेंगे ?
वैवाहिक जीवन की समस्याओं को ठीक करने के बजाय
मेरिटल रेप या फ्री सेक्स जैसे सलाह देना कुछ ऐसा ही है l
आज हम आपको दुनिया भर के ऐसे ही कई सेक्स ट्रेडिशन के बारे में बताने जा रहे हैं और इनकी लिस्ट में भारत भी शामिल है…
न्यू गुइएना के समबियन जनजाति 7 साल की उम्र में पहुंचते ही अपने लड़के-लड़कियों को करीब 10 सालों के लिए अलग कर देते और इस दौरान उन्हें शरीर के कई हिस्सों पर पियर्सिंग करवानी पड़ती है साथ ही उन्हें ट्राइब के सबसे ताकतवर योद्धा का सीमेन पीना पड़ता है!
पापुआ के ट्रोब्रीयाएंडर जनजाति के बच्चे बेहद कम उम्र से ही सेक्सुअल एक्टिविटी में हिस्सा लेने लगते हैं। ये इललीगल है यार!
प्रशांत महासागर में स्थित मंगाया टापू पर छोटे लड़के महिलाओं के साथ सेक्स करते हैं ताकी वो एक्सपीरियंस ले सकें और बाद में जाकर अपनी पार्टनर्स को सैटिसफाई कर सकें।
ऑस्ट्रिया में एक ऐसा रिचुअल डांस होता है जिसमें औरतें अपने आर्म पिट में सेब के टुकड़े रखकर नाचती है और उन्हें जो मर्द पसंद आता है उसे दे देती हैं, वो आदमी बाद में उसे खाते हैं।
कंबोडिया की क्रेयुंग जनजाति लड़कियों के लिए लव हट बनाती है। इन झोपड़ियों में हर रात अलग-अलग लड़के रुकते हैं और ये सिलसिला तब तक चलता रहता है जब तक लड़की को अपना मनपसंद लड़का नहीं मिल जाता।
प्राचीन ग्रीस में संभ्रांत घरों के आदमी लड़कों के साथ शारीरिक सम्बन्ध बनाया करते थे और ये बेहद आम बात थी।
नेपाल में एक ऐसी जनजाति भी है जहां घर के सभी भाइयों की शादी एक ही लड़की से कर दी जाती है। ऐसा इसलिए ताकि बहुत सारे बच्चे न हों और बंटवारे से बचा जा सके।
वेस्ट अफ्रीका के वूडाबी जनजाति हर साल एक ऐसा फ़ेस्टिवल मनाती है जहां आदमी अपने चहरों को एक जैसा रंग लेते हैं और फिर दूसरी औरतों को बेवकूफ बनाने की कोशिश करते हैं।
मिस्र में ये मान्यता थी कि वहां जो नील नदी बहती है उसका कारण देवता का इजेकुलेशन था। इस मान्यता को मानते हुए वहां एक फेस्टिवल भी मनाया जाता था जिसमें सभी आदमी नील नदी के पास या पब्लिक में मास्टरबेट करते थे।
इंडोनेशिया में पोन सेलिब्रेशन के दौरान लोग दूसरी औरत/ मर्द के साथ सेक्स करते हैं और उनका मानना है कि अगर वो साल भर 7 फेस्टिवल्स के दौरान एक ही व्यक्ति के साथ सेक्स करते हैं तो उनकी हर इच्छा पूरी हो जाएगी।
छत्तीसगढ़ की मूरिया जनजाति सेक्स को लेकर बहुत खुले विचार रखती है। यहां युवा अलग-अलग साथियों के साथ सम्बन्ध बनाते हैं और इस दौरान उन्हें किसी के साथ भावनात्मक रूप से जुड़ने की मनाही होती है।

 

4 Responses to “प्राचीन सेक्स परम्पराओं से जन्मी फ्री सेक्स ट्रेडिशन”

  1. इंसान

    अनिल अनूप जी, दरिद्रता की मार के कारण अपनी संस्कृति भूल चुके आधे-अधूरे सपनों के साथ वैश्विकता की ओर दौड़ लगाते भारतीयों को जो दिखता है वह बिकता है| कोई अचम्भा नहीं कि कभी आप भविष्य में अपने प्रस्तुत लेख द्वारा दुनिया भर के नए नए परोसे सेक्स ट्रेडिशन को प्रचलित देख रुष्ट और कुपित मन प्राचीन भारतीय परम्पराओं में लौट जाने को व्याकुल होंगे!

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    • अनिल अनूप

      भाई इंसान जी
      वर्तमान परिवेश की ओर देखने से कब तक कतरायेंगे आप?
      क्षमा सहित यह प्रश्न है मेरा

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      • इंसान

        यदि आपको अपने साथ लेकर चलूँ तो आपको कतराते नहीं बल्कि हथियार डालते देखता हूँ और यदि आपकी युवावस्था में आपको फ्री सेक्स का समर्थक अथवा प्रचारक कहूँ तो भारतीय परंपरा से हट कर नरक में जाते देख मैं आपको सावधान करता हूँ| कांग्रेस-राज को मिटा लोग अपनी अलौकिक संस्कृति की ओर लौट हिंदुत्व के आचरण का अनुसरण करना चाहते हैं| मैं नहीं चाहता आपका लेख उनकी राह का रोड़ा बने!

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  2. प्रदीप डे

    भारत में आम व्यक्ति से सेक्स के बारे में चर्चा करने पर न ही शर्माता है और न ही मन में अपराधबोध रखता है बल्कि इस विषय पर भारतीय व्यक्ति मर्यादित हो जाता है ।
    आप क्या चाहते है आप सेक्स की बात करे और व्यक्ति चड्डी खोल कर खड़ा हो जाए ?

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