गांव को उन्नत, खुशहाल बनाने में जुटे हुए हैं आर.के.सिन्हा

मुरली मनोहर श्रीवास्तव

पटना से महज 55 किलोमीटर दक्षिण कोइलवर पुल से पार करते ही एक गांव है बहियारा। इस इलाके के लोग 1934 में सोन नदी में आयी भयंकर बाढ़ से त्रस्त इस इलाके से बड़े पैमाने पर पलायन कर गए। रह गई तो इस इलाके में भूखमरी, गरीबी और दर्द की आग में पैदा हुई नक्सल ने इस इलाके के विकास को पूरी तरह से बर्बाद कर दिया। बहियारा की उस गरीबी और बेरोजगारी में डूबते को तिनके का सहारा की तरह तारणहार बनकर आए इस मिट्टी के लाल उद्योगपति सह राज्यसभा सांसद आर.के.सिन्हा।

इस गांव के बारे में काफी लंबे समय से सुनने के बाद इसे करीब से जानने और समझने का मौका मिला। कोइलवर से पार करते ही दक्षिण की औऱ 11 किमी की दूरी पर बसा है बहियारा गांव। कभी इस गांव के बारे में सुना था कि संपन्न हुआ करता था। बाद में इस गांव की खूबसूरती को किसी नजर लग गई और यहां बाढ़ की विभिषिका के बाद बहुत सारे लोग पलायन किए तो बहुतों को किसी तरह अपनी जिंदगी इसी मिट्टी में गुजारनी पड़ी। लेकिन अब वो बात नहीं इस गांव के रहने वाले आर.के.सिन्हा ने इस गांव के साथ-साथ आस पास के इलाके की तस्वीर ही बदलकर रख दी है। इस इलाके में एक बार फिर से खुशहाली लौट आयी है।

एक तरफ जहां गांव से लोग शहर और शहर से निकलकर दुनिया का सफर तय कर रहे हैं। वहीं राज्यसभा सांसद आर के सिन्हा ने अपनी मेहनत के बूते अपने उद्योग को इस कदर बढ़ाया की आज की तारीख में लगभग ढाई लाख परिवारों का भरण पोषण कर रहे हैं। उद्योग को विकसित करने के लिए पूरी दुनिया का भ्रमण करने वाले इस शख्सियत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गांव को गोद लेने और उसे विकसित करने की परंपरा को कायम रखा है, तो बिहार के विकास पुरुष मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के विकास की लौ को जलाए रखने में काफी सार्थक साबित हो रहा है। इसका प्रमाण बहियारा सहित आस पास के गांवों में देखने को मिल रहा है। देशी गायों का फार्म हाउस हो, या फिर देश के किसी कोने में उपजाए जाने वाले फसल, सब्जी के साथ-साथ ऑर्गेनिक खाद और खेती के तरीके को सीखने और जानने के लिए यहां दूर-दूर से पहुंच रहे हैं। हमने दो बागों का श्री सिन्हा जी के साथ दौरा किया जिसमें रण बांकुरे वीर कुंवर सिंह के नाम पर 22 बिगहे में फैला वीर कुंवर सिंह बाग तो दूसरा बहुत बड़े भूभाग में अपने पिता जी के नाम पर एस.पी.सिन्हा बाग देखकर कोई भी आम इंसान अचंभित हो जाएगा। किस कदर यहां लोग काम कर रहे हैं। काम के साथ अपनी आर्थिक स्थिति को भी सुधारने में आर के सिन्हा के कृषक कार्य से जुड़े हुए हैं और कामयाब हो रहे हैं। इस इलाके में स्कूल, सिक्युरिटी ट्रेनिंग सेंटर, फार्म हाउस, औषधियुक्त दूध, मधुमक्खी पालन के अलावे सोन नद के किनारे अपने पूर्वजों के नाम पर कई घांटों का निर्माण कराया गया है जो यहां कि खूबसूरती में चार चांद लगा रहे हैं।

गांव का किसान हो किसी जाति-धर्म का हो उसके साथ पंगत में बैठकर ही खाना खाते हैं। इसके अलावे एक-एक व्यक्ति का कुशलक्षेम पूछना और उनके लिए जरुरत की वस्तुओं को उपलब्ध करना इनकी आदतों में शुमार है।

कोई भी व्यक्ति अगर किसी की शिकायत करे तो उसे सुनना इन्हें नागवार गुजरता है। कहते हैं आप अपना काम कीजिए अगले की शिकायत करके आपका विकास रुक जाएगा। बड़ा दिमाग आईडिया सोचता है व्यक्ति पर चर्चा नहीं करता है। इस धरती पर विभिन्न तरह के लोग हैं तो सोचने और समझने की क्षमता भी अलग-अलग ही होगी।

विकसित भारत की परिकल्पना, बिहार के विकास के बिना अधूरा है। भारतीय संविधान के  73वें संशोधन के आलोक त्रिस्तरीय पंचायत राज संस्थाओं को सुदृढ़ करने हेतु बिहार पंचायत राजअधिनियम, 2006 अधिनियमित किया गया है एवं स्थानीय स्वश्वासन में आम लोगों की सहभागिता बढ़ाने, पारदर्शिता लाने, अनुसूचित जातियां, अनुसूचित जनजातियां, समाज के अत्यंत पिछड़े वर्गों तथा महिलाओं की सम्मान जनक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए प्रयास निरंतर जारी है। इनका कहना है जब ग्रामीण क्षेत्रों का विकास होगा तभी शहर और देश का विकास संभव है। बिहार में आर्थिक रुप से अक्षम बच्चों के लिए निःशुल्क आई-आई.टी की पढ़ाई के लिए आर के सिन्हा साल में दो बार परीक्षा आयोजित करवाते हैं और उनके पढ़ाई पर आने वाले सारे खर्च को अपने निजी आमदनी से वहन करते हैं।

भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालय लाभ प्राप्त करने के लिए नहीं बल्कि लोगों के अधिकतम कल्याण के लिए विभिन्न विकास योजनाएं बनाते हैं| कुछ योजनाएं जैसे राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, मनरेगा, भारत निर्माण आदि ग्रामीण भारत के विकास के लिए सरकार द्वारा शुरू किए गए हैं। वहीं बिहार सरकार ने ग्रामीण विकास कार्यक्रमों में लोगों की भागीदारी बढ़ाई है, योजनाओं का विकेन्द्रीकरण, भूमि सुधारों को बेहतर तरीके से लागू करना और ऋण की आसान उपलब्धि करवाकर लोगों के जीवन को बेहतर बनाने का लक्ष्य होता है। इस दौरान काफी समय व्यतित करने का मुझे भी मौका मिला तो हमने देखा कि इतनी दूरियां तय करने वाले इस शख्सियत में कहीं से कोई अभिमान नजर नहीं आता है। दुनिया में अपनी साख को स्थापित करने वाले इस बड़े उद्योगपति सह राज्यसभा सांसद आर के सिन्हा अपने व्यवस्त समय में भी अपने पैतृक गांव में खुद आकर देखते हैं और खड़े होकर काम भी करते हैं। जो आज की युवा पीढ़ी के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं है। 

Leave a Reply

%d bloggers like this: