लेखक परिचय

नरेंद्र भारती

नरेंद्र भारती

जर्नलिस्ट और कोलुंनिस्ट यूनिवर्स न्यूज़ पेपर & रिसेर्च सेंटर डिस्ट्रिक्ट मंडी हिमाचल प्रदेश

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ancientकश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक अपराधों का काला साया फैलता जा रहा है यह बहुत ही घातक व अशुभ संकेत है। विश्वगुरु के नाम से विख्यात भारत संगीन अपराधों के कारण कुख्यात होता जा रहा है। प्रतिदिन अपराधों की इबारतें लिखी जा रही हैं। खून की होली खेली जा रही है, हत्याओं ,बलात्कारों, की घटनाओं में निर्बाध रूप से वृद्धि हो रही हैं। इन अपराधों के कारण चारों तरफ अराजकता का बोलबाला होता जा रहा है। देश में अपराधों का ग्राफ बढ़ता ही जा रहा हैं। गुडगांव में एक पुलिस इन्सपेक्टर व एक जासूस महिला की हत्या ताजा प्रमाण है इससे पहले दिल्ली में एक उद्योगपति की भी गुंडो ने दिन-दहाड़े हत्या कर दी थी। 16 दिसंबर 2012 को दिल्ली में दामिनी गैंग रेप कांड ने तथा 2013 में गुडिया रेप कांड जैसे अपराधों से भारत की विश्वस्तर पर फजीहत हो चुकी है। यह दोनों ऐसे अपराध है जिन्हे सदियो तक नहीं भुलाया जा सकता है। पिछले 60 सालों में अपराधों में बेतहाशा वृद्धि हुई हैं। देश में 1953 में 6 लाख अपराध के मामले हुए जो 2011 तक 23 लाख हो गये । इनमें  286 प्रतिशत की वृद्धि हुई ।1953 में हत्या के 9802 मामले दर्ज हुए जबकि 2011 में यह बढकर 34305 हो गये इनमें 250 प्रतिशत की वृद्धि हुई । बलात्कार के 2487 मामले थे जो  2011 में 24206 हो गये इनमें 873 प्रतिशत की बढोतरी हुई  अपहरण के 5261 मामले थे जो 2011 में 44664 हो गये इनमें 749 प्रतिशत की वृद्धि हुई । लूट के 8407 मामले हुए जबकि 2011 में 24700 दर्ज किए गये इसमें 194 प्रतिशत की वृद्वि हुई ।1953 में 20529 दगें हुए जबकि 2011 में 68500 दगें हुए। इनमें 234 प्रतिशत की वृद्धि हुई। देश मे वर्ष 1988 मे 28771,वर्ष1989 में 31222,वर्ष 1990 में 35045, वर्ष 1991 में 39174, 1992 में 40105, 1993 में 38240, 1994 में 38577, वर्ष 1995 में 37464 वर्ष 1996 में 37671, 1997में 37543,1998 में 38584,1999 में 37170, 2000 में 37399, 2001 में 36202, 2002 में 35290, 2003 में 32716, वर्ष 2004 में 33608,वर्ष 2005 में 32719,वर्ष 2006 में 32481, वर्ष 2007 में 32318, वर्ष 2008 में 32766, वर्ष 2009 में 32369, वर्ष 2010 में 33335, वर्ष 2011 में 34305 इन अपराधों से आत्मा सिहर उठती है कि आज बेखौफ होकर हत्या को अंजाम दिया जा रहा है। सुपारियां लेकर कत्ल करवाए जा रहे है पिछले दिनों दिल्ली में एक उद्योगपति की हत्या होना इसका प्रमाण है कि बेटे ने अपने बाप की कथित सुपारी देकर गुंडो से हत्या करवा दी थी । देश में जिस तरह से अपराधों में लगातार इजाफा हो रहा है इससे कानून व्यवस्था का जनाजा निकलता जा रहा है । देश के प्रत्येक राज्यो में अपराध बढ़ते जा रहे है। महानगरों से लेकर गांव तक अपराधों में बढोतरी बहुत ही चिन्ताजनक है। यह बढ़ोतरी इस बात की द्योतक है कि अपराधियों के मन में पुलिस व कानून व्यवस्था का डर कम होता जा रहा है। तुलनात्मक रुप से देखा जाए तो आज बडे महानगरों व शहरों में ज्यादा अपराध हो रहे हैं । मगर अब छोटे शहरों  में भी इन अपराधों में अप्रत्याशित रुप से वृद्धि हो रही है । सामान्यतया देखा गया है कि पुलिस भी अपराधियों के खिलाफ कोई विशेष अभियान नहीं चलाती है जब कोई बड़ी वारदात होती है तभी पुलिस सक्रिय होती है यदि समय-समय पर रुटिन कार्यवाही होती रहे तो अपराधों पर अकुंश लग सकता है। आज सम्पति के झगड़ों के कारण खून की नदियां बहाई जा रही हैं। परिवार के परिवार खत्म किए जा रहे हैं। आज माफिया के लोगों की वारदातों के कारण जंगलराज जैसे हालात पैदा होते जा रहे है। अपराधी चंद पैसों के लिए लोगों को भेड़-बकरियों की तरह काट रहे हैं। हर तरफ जुर्म ही जुर्म हो रहा है ,पंजाब,उतर प्रदेश ,बिहार,राजस्थान, हरियाणा,महाराष्ट्र ,झारखंड,छतीसगढ, में हर दिन हत्याएं हो रही है ,हिमाचल प्रदेश जैसा शांतिप्रिय राज्य भी अपराधों से अछूता नहीं रहा है । हर गली व चैराहे पर लाशें मिल रही हैं। देश में अपराधियों के गिरोह बने हुए है जो शाम ढलते ही अपना शिकार ढूढने लगते हैं और लूटपाट करने लगते हैं। अपराधों की इस संस्कृति को फलने-फूलने से पहले ही नेस्तनाबूद करना होगा नहीं तो फिर पछताने के अलावा कुछ हासिल नहीं होगा। क्योकि एक बार अपराध की जडें गहरी हो गई तो उन्हे काटना आसान नहीं होगा। बढ़ते अपराधों पर विश्लेषण करना चाहिए। देश में पुलिस की शिथिलता के कारण ही अपराधिक घटनाएं हो रही है। कानून व्यवस्था को मजबूत करना होगा एक अभियान चलाना होगा । समाज को भी इसमें अहम भूमिका निभानी होगी , असमाजिक तत्वों को बेनकाब करना होगा जो समाज को अपराध की दुनिया बनाना चाहते है समाज को एकजुट होकर इन दरिदें अपराधियों को सबक सिखाना चाहिए। देश में अपराध बदस्तूर बढ़ते जा रहे है और अपराधी बेलगाम होते जा रहे है । यदि इस पर शीघ्र संज्ञान न लिया तो हालात बेकाबू हो जाएगें और देश में अराजकता फैल जाएगी। केन्द्र सरकार को कारागर कदम उठाने चाहिए ताकि देश में अमन-चैन रहे और अपराधों पर अकुश लग सके।  अपराधियों को सख्त सजा दी जाए ताकि अपराधों की पुनरावृति न हो सके । और भारत की अस्मिता बरकरार रहे।

 

 

 

2 Responses to “देश में बढते अपराध, बेलगाम होते अपराधी, जिम्मेवार कौन ?”

  1. इक़बाल हिंदुस्तानी

    iqbal hindustani

    System isliye fail ho rha hai kyonki bhrshtachaar sb pr bhaari hai.

    Reply
  2. ोो

    अंग्रेजी पढ़ाना बंद करो, टी.वी. पर फुहड़ विज्ञापन और दु:संस्कृति फैलाने वाले धारावाहिक, विदेशी चैनलों का प्रसारण बंद करो, शराब के ठेके बंद करो, रात में चलने वाले डिस्को पब बंद करो। स्कूलों में संस्कृत की पढ़ाई शुरु करो, वेद-पुराण और उपनिषद शुरु करो, नैतिक शिक्षा का पाठ पढ़ाओ।

    सब सही हो जायेगा….

    खुद पढे़ औरो को भी पढ़ाए

    Reply

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