माता पिता गुरु ईश्वर इंसान व इंसानियत पर आस्था हो

—विनय कुमार विनायक
जीवों की सृष्टि प्राकृतिक नैसर्गिक क्रिया है
जबकि नामकरण धर्माचरण व संस्कारवरण
आरोपित बाह्य विशेषण थोप दिया गया है!

अन्य जीव जन्तुओं की तरह मनुष्य भी
बेनाम बिना धर्म बिना संस्कार के जन्म लेते
किन्तु समस्त मानव जाति की खासियत है
कि मानव बिना नाम बिना धर्म के नहीं रहते!

पूरी दुनिया में जन्म लेते ही शिशु को दिए जाते
एक नाम एक जाति एक धर्माचरण एक पहचान
और वो सबकुछ जो जन्म से साथ नहीं थे उनके!

नाम जो जन्म के साथ नही आया, दूसरों ने दिया
उसपे आत्ममुग्ध हो गुमान कर आत्मचेतना से दूर गया
धर्म मजहब जो रब से नही मिला दूसरों से पाया
उसपर गुरूर करके आत्मवत् जीवों का जीना दूभर किया!

फिर तो लड़ाई आरंभ हो गई उन्हीं बाह्य चीजों के लिए
संज्ञा मिली संस्कृत की तो मानव संस्कृतिवादी हो जाते,
राम राम जैसे/रावण रावण जैसे/विभीषण विभीषण जैसे
कृष्ण कृष्ण जैसे/कंश कंश जैसे/दुर्योधन दुर्योधन के जैसे!

अगर नाम हो गौतम महावीर नानक गोविन्द शिवा का
तो सत्य अहिंसा शान्ति शौर्य देशभक्ति का मिला जज्बा,
अगर संज्ञा मिली अरबी फारसी तुर्की तो सुन्नी व सिया,
महमूद गजनवी मुहम्मद गोरी तैमूर बाबर औरंगजेब सा!

अगर नाम मिले रोमन यूरोपियन तो मसीही मसीहा,
फिर कुछ भी फर्क नही पड़ता है कि कोई भारतीय हो
या मध्य एशियाई खून या कि रोम यूनान ब्रिटेन का!

जब तुम्हारे राम नाम के कारण से तुम्हें कोई गाली देते,
तो भी तुम त्यागी राम सा अर्जित स्वर्ण लंका लौटा देते,
जब रावण बोल पुकारता कोई तुम अहंवश डंका बजा देते,
विभीषण जयचंद नाम से लोग भातृद्रोही की शंका करते!

जब तुम्हारे कृष्ण नाम को बदनाम करेगा कोई
उम्मीद है तुम गीता ज्ञान सुनाओगे, विश्वरुप दिखाओगे,
जब कंश दुर्योधन दुशासन नाम से पुकारे जाओगे
तो आशंका है इंच भर भूमि खातिर द्वंद्व युद्ध मचाओगे!

भले राम कृष्ण हनुमान शबरी के वंशज हो तुम
किन्तु नाम तुम्हारा महमूद गजनवी मुहम्मद गोरी
खिलजी तैमूर बाबर औरंगजेब रख दिया किसी ने
फिर तो तुम्हारा आदर्श वे ही होंगे पाकिस्तानी जैसे!

अस्तु नामकरण हो देशधर्म और संस्कृति के हिसाब से,
जीव दया अहिंसा करुणा भाव जगे मानवता विकास से,
पशुता की निशानी मिटे सात्विक सहिष्णु हो मिजाज से,
शिक्षा दीक्षा संस्कार मिले स्वदेशी सभ्यता के रिवाज से!

ब्रह्मचर्य गृहस्थ वानप्रस्थ संन्यास आश्रम व्यवस्था हो,
हिंसा बलात्कार भाव मिटे पराई नारी के प्रति श्रद्धा हो,
माता पिता गुरु ईश्वर इंसान व इंसानियत पर आस्था हो,
मानव हो मानव बनो खुद जिओ जीव जन्तु को जीने दो!
—विनय कुमार विनायक

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