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    तीसरी लहर कितना बरपाएगी कहर, कहना मुश्किल

    आज हमारा मुल्क कोविड-19 की दूसरी लहर झेल रहा है। कोविड-19 की दूसरी लहर ने‌ समूचे ‌मुल्क में तबाही मचाई है।‌ आज भयानक अदृश्य विषाणु की दूसरी लहर अपने चरम पर पहुंच चुकी है। पिछले कुछ दिनों में संक्रमण के मामलों में गिरावट को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि हमारा मुल्क दूसरी लहर की गिरफ्त से बाहर आ रहा है।‌ लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 20 मई को कुछ डीएम और फील्ड अफसरों के साथ मीटिंग बुलाई थी। जिसमें आने वाली संभावित तीसरी लहर को लेकर चिंता प्रकट की थी। इसके साथ भारत सरकार के प्रधान सलाहकार के. विजय राघवन ने अपना वक्तव्य जारी कर कहा था कि दूसरी लहर के शांत पड़ने के पांच से छह माह के भीतर तीसरी लहर अपनी दस्तक दे सकती है। तीसरी लहर से बचने के लिए हमें अभी से युद्ध स्तर पर तैयारियां करनी निहायत तौर पर जरूरी है।

    लेकिन अब अचानक यह खबर सामने आई है कि तीसरी लहर बच्चों के लिए खतरनाक नहीं रहने वाली है।‌ बता दें कि केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने तीसरी लहर की आशंका को बेबुनियाद करार दिया है। इसके पीछे के कारणों का जिक्र करते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि अभी तक तीसरी लहर बच्चों के लिए घातक रहने वाली है, इस बारे में हमें कोई ठोस वैज्ञानिक संकेत नहीं मिले हैं।‌ हालांकि कुछ दिन पहले चेताया गया था कि तीसरी लहर से संक्रमित होने वालों में 50 फीसदी बच्चे रहेंगे।‌ बाकायदा भारतीय केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय बल्कि कई विदेशी महामारी विशेषज्ञों ने भी इसे लेकर सचेत किया था। इसके चलते केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों को सतर्कता बरतने और एहतियाती कदम उठाने का निर्देश भी दिया था।

    ऐसे में तीसरी लहर की आशंका पर लगते विराम के बीच अब कई सवालों का उठना लाजिमी हैं कि क्या बच्चे खुद को तीसरी लहर से महफूज महसूस करें? क्या उनके ऊपर से खतरा पूरी तरह टल चुका है? क्या अब बच्चों का टीकाकरण किया जाना जरूरी नहीं रह गया हैं? आखिर सरकारों ने एहतियातन जरूरी कदम उठाए थे, उनका क्या, क्या वे आगे भी जारी रहेंगे? ये ऐसे सवाल हैं जो आज न केवल राज्य सरकारों, बच्चों, बुजुर्गों बल्कि हर उस इंसान के मस्तिष्क की उपज बने हुए हैं, जो कोविड-19 विषाणु से किसी-न-किसी रूप से प्रभावित रहा हैं। आज कहने को हम कुछ भी कहें, लेकिन यह जाहिर है कि केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने तीसरी लहर के खतरे को बेबुनियाद करार दिया है। इससे राज्यों द्वारा उठाएं जा रहे हैं एहतियाती कदमों में शिथिलता का आना स्वाभाविक लगता है।

    बता दें कि कई राज्यों ने तीसरी लहर की आशंका के चलते एहतियाती कदम उठाए थे। जहां जनसंख्या की दृष्टि से सबसे बड़े राज्य उत्तरप्रदेश का सवाल है, वहां प्रदेश की योगी सरकार 12 साल तक के बच्चे के अभिभावकों को कोविड-19 वैक्सीन लगाने में प्राथमिकता देने जा रही है। इसके लिए सरकार ने टीकाकरण केन्द्र पर अभिभावक बूथ बनाने का निर्णय लिया है। ताकि बच्चों में कोरोना प्रसार की आशंका पर विराम लगाया जा सके। अगर महाराष्ट्र की बात करें, तो राज्य में सरकार कोविड केयर वॉर्ड तैयार करने में जुटी हुई है। राज्य में टास्कफोर्स गठित करने के साथ-साथ बच्चों के लिए क्रेच नेटवर्क तैयार करने की भी योजना बनाई जा रही है, जिसके द्वारा उन माता-पिता के बारे में जानकारी जुटाई जाएगी, जो कोरोना संक्रमित होकर अस्पताल में भर्ती है।‌ यदि हम इसी जद्दोजहद में हरियाणा सरकार की बात करें, तो हरियाणा सरकार ने राज्य में संजीवनी परियोजना लॉन्च की है। वहीं उत्तराखंड सरकार की भी तीसरी लहर के मद्देनजर तैयारियां जोरों पर चल रही हैं।‌ इसके तहत हरिद्वार और हल्द्वानी में कोरोना संक्रमित बच्चों के लिए अलग से 25-25 आईसीयू बेड तैयार करने की योजना है। देश की राजधानी दिल्ली का जहां तक सवाल है, वहां पर तीसरी लहर के खतरे से निपटने के लिए भागीरथ प्रयास जारी है। बेड, ऑक्सीजन और अन्य चिकित्सा सुविधाएं जुटाने के लिए टास्कफोर्स गठित करने का फैसला किया है। दिल्ली सरकार बच्चों के टीकाकरण पर भी ज्यादा जोर दे रही है। मुख्यमंत्री ने बच्चों के टीकाकरण के लिए अमेरिकी वैक्सीन फाइजर का टीका लगाने की बात कही है। इसके लिए केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि वह फाइजर निर्माता से बात करे। बता दें कि अमेरिका वैक्सीन फाइजर 15 वर्ष से ऊपर आयु वालों के लिए बेहद प्रभावी और कारगर है।

    दरअसल, कई जानकारों का मानना है कि पहली लहर ने बुजुर्गों पर अटैक किया था। जबकि दूसरी लहर ने युवा आबादी को अपनी चपेट में लिया है। ऐसे में तीसरी लहर में कोरोना बच्चों को‌ अपना शिकार बनाएगा।‌ यह भी सच्चाई है कि कोरोना की दूसरी लहर के भयानक रूप की कल्पना किसी ने नहीं की थी। कभी सुनने में आ रहा है कि तीसरी लहर बच्चों के लिए बेहद घातक रहने वाली है, तो कभी यह भी सुनने में आ रहा है कि दूसरी लहर की भांति कहर नहीं बरपाएगी। ऐसी असमंजस भरी स्थिति में कुछ भी निष्कर्ष निकालना बेहद जोखिम भरा रहने वाला है। इसमें कोई दोराय नहीं है। ऐसे में तीसरी लहर कब आएगी?कितना कहर बरपाएगी? इस संदर्भ में कुछ भी कहना फिलहाल जल्दबाजी होगी।

    अली खान
    अली खान
    स्वतंत्र लेखक एवं स्तंभकार जैसलमेर, राजस्थान मो. न. 8290375253

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