More
    Homeमहिला-जगतकितनी सेफ हैं प्रेगनेंसी रोकने वाली गोलियां       

    कितनी सेफ हैं प्रेगनेंसी रोकने वाली गोलियां       

         आज के समय में परिवार बढ़ाने यानि कि बच्चों के जन्म के बारे में तय करने के लिए आपको मानसिक और शारीरिक और आर्थिक सभी प्रकार से तैयार होने की आवश्यकता होती हैं| क्योंकि बात सिर्फ एक बच्चे को जन्म देने की नहीं होती, बल्कि एक स्वस्थ बच्चे को जन्म देने की होती हैं | साथ ही बच्चे के लिए सही पालन पोषण और सही पढ़ाई लिखाई के साथ ही बाकी कितनी ही जिम्मेदारियां होती हैं जिनके बारे में एक बार अच्छी तरह से सोच समझ लेना बहुत जरूरी होता हैं | इसलिए जब तक आप इन सभी परिस्थितियों के बारे में तैयार न हो जाऐं, तब तक परिवार नियोजन के लिए महिला और पुरुष दोनों को  ही गर्भनिरोधक इस्तेमाल करें |यह तरीका आपको पर्याप्त समय देगा और जब आप हर प्रकार से एक बच्चे को जन्म देने के लिए तैयार हो जाएं, तब गर्भनिरोधक का इस्तेमाल करना बंद कर दें |

          महिलाओं द्वारा परिवार नियोजन के लिए सबसे ज्यादा गर्भनिरोधक गोलियों को ही इस्तेमाल किया जाता हैं, वहीं पुरुष गर्भनिरोधक कंडोम का इस्तेमाल करते हैं |
    ये दोनों ही गर्भनिरोधक पूरी दुनिया में उपयोग किए जाते हैं |भारत एक ऐसा देश हैं जो कि जनसंख्या के मामले में दुनिया का दुसरा सबसे बड़ा देश हैं, इसलिए भारत सरकारों के द्वारा काफी समय से गर्भनिरोधक के इस्तेमाल करने के लिए जागरूकता अभियान चलाए जाते रहे हैं, जो कि महिलाओं के अच्छे स्वास्थ्य और बच्चों के बीच सही अंतर और छोटे परिवार के महत्व को बढ़ावा देने के लिए होते हैं |
          गर्भनिरोधक के रूप में कंडोम के बाद सबसे ज्यादा गोलियों का ही उपयोग किया जाता हैं |ये गर्भनिरोधक गोलियां अनचाहे गर्भ से तो बचा सकती हैं लेकिन  STDs  से सुरक्षा नहीं कर सकती |
    गर्भनिरोधक गोलियां इस्तेमाल करने से महिलाएं अपने स्वास्थ्य को लेकर आत्मनिर्भर बन जाती हैं|इसलिए इन गोलियों का इस्तेमाल महिलाएं सालों से करती आ रहीं हैं, और यही इन गोलियों की खूबी हैं |इस सब के बावजूद भी इन गर्भनिरोधक गोलियों के बारे में बहुत सारी बातें हैं जो हम सब नहीं जानते |आज इस लेख के द्वारा हम आपके लिए वही सब जरूरी बातें जो आपके लिए जानना जरूरी है| 

    गर्भनिरोधक गोलियां कैसे काम करतीं हैं? 
      
     इस बात को समझने से पहले हमें यह समझना ज़रूरी है कि एक महिला का शरीर प्रेगनेंसी के लिए किस तरह काम करता हैं| महिलाओं के शरीर में दो ओवरीज़ होती हैं| हर महीने बारी बारी से एक एक ओवरी एक एग निकालती हैं, और यही एग जब पुरुष के स्पर्म से मिलता है | तब एक बच्चे का जन्म होता हैं |
    इस पूरी प्रक्रिया में महिला के शरीर के हार्मोन्स की बहुत अहम भूमिका होती हैं | गर्भनिरोधक गोलियां इन हार्मोन्स में ही बदलाव करतीं हैं , और एग को स्पर्म से मिलने से रोक कर बच्चे के जन्म की संभावना यानि प्रेगनेंसी को रोकती हैं |

    गर्भनिरोधक गोलियां मुख्यतः दो प्रकार की होती हैं कंबाइंड ओरल पिल्स (Combined Oral Pils) 
    और प्रोजेस्टीन ओन्ली पिल्स (Progestin Only Birth Control Pils Or Mini Pils) 
    |महिला के शरीर के दो मुख्य हार्मोन्स ही गर्भावस्था के लिए जिम्मेदार होते हैं प्रोजेस्ट्रोन और एस्ट्रोजन| कंबाइंड ओरल पिल्स में ये दोनों ही हार्मोन्स होते हैं | जबकि प्रोजेस्ट्रोन ओनली पिल्स में सिर्फ प्रोजेस्ट्रोन हार्मोन्स होता हैं| प्रोजेस्ट्रोन ओनली पिल्स को ‘मिनी पिल्स’ के नाम से भी जाना जाता हैं |

    मिनी पिल्स की खासियत क्या हैं? 

    हमने अभी बात की, कि मिनी पिल्स में सिर्फ एक ही हार्मोन होता हैं ‘प्रोजेस्टीन’, जो कि प्रोजेस्ट्रोन हार्मोन्स का आर्टीफीशीयल रूप होता हैं |जिन महिलाओं ने कुछ ही समय पहले बच्चे को जन्म दिया हैं और उनका बच्चा उनके दूध पर ही निर्भर हो| ऐसी महिलाएँ अगर एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रोन दोनों ही हार्मोन्स वाली गोलियां लेती हैं तो उन्हें कुछ साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं, जैसे उल्टी, जी मिचलाना आदि | इसलिए ऐसी महिलाओं को मिनी पिल्स लेने की सलाह दी जाती हैं | नियमित रूप से लिए जाने पर ये पिल्स 95% तक असरदार होती हैं | लेकिन इनका असर कंबाइंड ओरल पिल्स से कम होता हैं | 

    गर्भनिरोधक गोलियां लेनी कब शुरू करना चाहिए? 

    किसी प्रकार की भी दवाईयां लेने से पहले डाॅक्टर की सलाह जरूरी लेनी चाहिए|इसी तरह गर्भनिरोधक गोलियां भी डॉक्टर की सलाह लेकर ही शुरू करें | इन गोलियों को लेने का  दिन का एक समय निश्चित कर लें, और हर रोज़ उसी समय पर एक गोली लें|सुबह या शाम एक निश्चित समय पर एक गोली बिना किसी गेप के कोर्स पूरा होने तक लें |

    ये गोलियां कितने समय में असर करना शुरू कर देती हैं? 

    गर्भनिरोधक गोलियां लेने से पहले महिलाओं के मन में यह सवाल भी होता हैं कि ये गर्भनिरोधक गोलियां कितने समय में असर करने लगेंगी| डॉक्टर बताते हैं कि वैसे तो ये गोलियां पहले महीने से ही असर करना शुरू कर देतीं हैं लेकिन पहले महीने में प्रिकोशन के लिए कंडोम का इस्तेमाल भी करते रहना चाहिए| अगले महीने से पूरी तरह से इन पिल्स पर निर्भर रहा जा सकता हैं |

    इन पिल्स के कोई साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं क्या? 

    हाँ, कभी कभी इन पिल्स को लेने के बाद कुछ महिलाओं में कुछ साइड इफेक्ट्स को देखा गया है, जैसे
    मितली या जी मिचलाना
    वज़न बढ़ना
    ब्रेस्ट में सूजन
    पीरियड्स के दौरान खून के थक्के आना
    मूड खराब रहना

    किन महिलाओं को ये गर्भनिरोधक गोलियां नहीं लेना चाहिए? 

    वैसे तो ये गर्भनिरोधक गोलियां सभी महिलाएँ ले सकती हैं, लेकिन कुछ महिलाएँ जिनकी उम्र 35 वर्ष से अधिक हैं, और कुछ महिलाएँ जो कि धूम्रपान करतीं हैं,  या जिन महिलाओं को इनमें से कोई स्वास्थ्य संबंधी समस्या हो उन्हें गर्भनिरोधक गोलियां नहीं लेना चाहिए-

    हाथ पैर और फेंफड़ों में खून के थक्के जमने की शिकायत हो
    दिल या लीवर संबंधित समस्या हो
    ब्रेस्ट या गर्भाशय का कैंसर हो
    हाई ब्लड प्रेशर की समस्या हो
    माइग्रेन की शिकायत हो

    उम्मीद है कि गर्भनिरोधक गोलियों से संबंधित बहुत सारे सवालों के जवाब आपको मिल गए होंगे| इसके अलावा यदि कोई और भी सवाल आपके मन में हैं तो हमें लिखें, हम आपके सभी सवालों के जवाब आपको देने की कोशिश करेंगे |

    स्वाती सक्सेना
    स्वाती सक्सेना
    डिजिटल मार्केटर, पाठक और शिक्षार्थी

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here

    * Copy This Password *

    * Type Or Paste Password Here *

    12,308 Spam Comments Blocked so far by Spam Free Wordpress

    Captcha verification failed!
    CAPTCHA user score failed. Please contact us!

    Must Read