लव जिहाद और मतान्तरण के बीच में फँसा हिमाचल प्रदेश

love zehadडा० कुलदीप चन्द अग्निहोत्री

लव जिहाद और मतान्तरण को लेकर पिछले कई दिनों से देश भर में बहस चल रही है । यह बहस चलना जरुरी भी है , क्योंकि मतान्तरण के कारण ही देश का एक बार विभाजन हो चुका है और पाकिस्तान का निर्माण हुआ । लव जिहाद भी मतान्तरण का ही एक रुप है । इसे छदम मतान्तरण भी कहा जा सकता है । हिमाचल प्रदेश में यह बीमारी कितनी गंभीर है और कितनी पुरानी है , इसका अन्दाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आज से लगभग पन्द्रह साल पहले सोनिया कांग्रेस की सरकार के ही उस समय मुख्यमंत्री राजा वीरभद्र सिंह ने ही प्रदेश में मतान्तरण को रोकने के लिये मतान्तरण विरोधी बिल विधान सभा से पारित करवाया था । इसके लिये उनको सोनिया गान्धी के ख़ास सिपाहसिलारों का कितना विरोध सहना पड़ा होगा , इसका सहज ही अन्दाज़ा लगाया जा सकता है । इतना ही नहीं सोनिया कांग्रेस के उस समय के महासचिव आस्कर फ़र्नांडीज़ , जो सोनिया गान्धी के ख़ास विश्वासपात्र थे , ने तो बाक़ायदा प्रैस के माध्यम से वीरभद्र सिंह के इस क़दम का विरोध किया था और इसे पार्टी विरोधी क़रार दिया था । वेटिकन का , इस बिल को रुकवाने के लिये बहुत ही दबाव था । कुछ लोग तो यह भी कहते हैं कि सोनिया गान्धी उसी के कारण वीरभद्र सिंह की आज तक विरोधी बनी हुई हैं । तब यह भी चर्चा थी कि उस समय हिमाचल के राज्यपाल सदाशिव कोकजे पर इस बिल पर हस्ताक्षर न करने के लिये देशी विदेशी ईसाई मिशनरियों ने बहुत दबाव बनाया था । पूरा क़िस्सा दोहराने का अभिप्राय केवल इतना ही है कि पन्द्रह साल पहले ही हिमाचल प्रदेश में मिशनरियों का मतान्तरण का धन्धा कितना ख़तरनाक रुप ले रहा होगा कि एक कांग्रेसी मुख्यमंत्री को ही , अपनी पार्टी के हाई कमांड का विरोध सहते हुए भी , मतान्तरण को रोकने के लिये विधेयक बनाना पड़ा ।
अब मामला लव जिहाद का । दरअसल लव जिहाद शब्द का , वैधानिक क्षेत्र में , सबसे पहले इस्तेमाल केरल उच्च न्यायालय ने किया था । न्यायालय ने जो कहा उसका भाव यह था कि कई बार साज़िश के तहत मुसलमान लड़के हिन्दू लड़कियों से प्यार का नाटक रचाते हैं और उन्हें अपने इस साज़िशी प्यार में फाँस कर उनसे शादी कर लेते हैं । शादी से पहले या बाद में उनका मतान्तरण करते हैं । यह पूरी प्रक्रिया लव जिहाद कहलाती है । क्योंकि इस पूरे अभियान में प्यार ग़ायब है । साज़िश करके हिन्दू लड़कियों का मतान्तरण करना ही मक़सद है । यह साज़िश तब और ज़्यादा ख़तरनाक हो जाती है जब इसे बहुत ही सुसंगठित तरीक़े से देशी विदेशी पैसे की मदद से एक आन्दोलन के रुप में गिरोहों द्वारा चलाया जाता है । न्यायालय ने सरकार से आग्रह किया था कि इस प्रकार के आन्दोलन और रैकेट की जाँच की जानी चाहिये ताकि इसे चलाने वाली शक्तियाँ बेनक़ाब हो सकें ।
हिमाचल प्रदेश में लव जिहाद की साज़िश के तौर पर क्या स्थिति है ? यह अपने आप में महत्वपूर्ण प्रश्न है । विश्व हिन्दू परिषद के प्रदेश संगठन मंत्री मनोज कुमार का कहना है कि प्रदेश में ऐसी लड़कियों की फ़ेहरिस्त लम्बी है जिनको मुसलमान लड़कों ने अपने जाल में फँसाया और बाद में उनकी ज़िन्दगी तबाह करके उन्हें छोड़ दिया । उनका यह भी कहना है कि ऐसी लड़कियों की सूची भी बड़ी है जो लापता हैं और परिषद को शक है कि मुसलमान लड़के उन्हें भगा कर उत्तर प्रदेश या अन्य स्थानों पर ले गये हैं । वे अब किस स्थिति में हैं , इसकी किसी को कोई जानकारी नहीं है । वे इन तमाम मसलों को लेकर पिछले दिनों मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से मिल भी चुके हैं ।
इसमें कोई शक नहीं कि हिमाचल के ऊपरी इलाक़ों में ईसाई मिशनरियां विभिन्न नामों से मतान्तरण के काम में लगी हुई हैं । कुल्लु, किन्नौर ख़ास कर उनके निशाने पर हैं । मिशनरियों ने अनेक आकर्षक नामों से प्रदेश में ग़ैर सरकारी संगठन भी पंजीकृत करवा रखे हैं और उनके माध्यम से भी छद्म रुप से मतान्तरण के धन्धे कर रही हैं । ध्यान रहे अपने प्रधानमंत्रित्व काल के अंतिम दिनों में मनमोहन सिंह ने भी कहा था कि अनेक ग़ैर सरकारी संगठन विदेशी पैसे के बलबूते राष्ट्रविरोधी कामों में लगे हुये हैं । पर्वतीय क्षेत्र और ख़ास कर सीमान्त क्षेत्र इन मिशनरियों के निशाने पर हैं । अब्राहम की संतानों ने पाँच छह सौ साल में कश्मीर को पूरी तरह मतान्तरित कर लिया और वहाँ जो स्थिति है वह किसी से छिपी नहीं है । उसी तर्ज़ पर ईसाई मिशनरियां लद्दाख , लाहुल स्पिति और और किन्नौर पर निशाना साध रही है । यह किसी से छिपा नहीं है कि पिछले साठ साल में लद्दाख में बहुत बड़ी संख्या में भगवान बुद्ध के बचनों में आस्था रखने वाले लोग मुसलमान या ईसाई हो गये हैं । हिमाचल प्रदेश का ऊपरी हिस्सा यदि इस चपेट में आ जाता है तो हिमालयी सीमान्त की यह पूरी पट्टी ख़तरा पैदा कर देगी । हिमाचल सरकार को अभी से चेतना चाहिये । ताज्जुब तो इस बात का है कि पिछले पन्द्रह साल में प्रदेश में ईसाई मज़हब में चले जाने वाले लोगों की संख्या तो बहुत बड़ी है लेकिन प्रदेश में लागू मतान्तरण विरोधी क़ानून होने के बाबजूद एक भी केस पूरे हिमाचल में कहीं दर्ज नहीं हुआ । हिमाचल प्रदेश सरकार को ,पूर्व में मध्य प्रदेश के नियोगी कमीशन की तर्ज़ पर ईसाई मिशनरियों की गतिविधियों और मतान्तरण के लिये अपनाई जाने वाली तकनीकों की जाँच के लिये किसी प्रतिष्ठा प्राप्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक आयोग स्थापित करना चाहिये ।
एक अन्तिम बात और । मान लीजिए कोई हिन्दू लड़की लव जिहाद के आन्दोलन से जुड़े हुये किसी मुसलमान लड़के के चक्र में फँस कर मुसलमान बन जाती है । लेकिन अब वह वापिस अपनी परम्परागत आस्था और विरासत के अपने घर आना चाहती है । वह फिर से हिन्दू होना चाहती है । वह घर वापिसी चाहती है । उसको इसका अधिकार है या नहीं ? आश्चर्य है कि सेक्युलर होने का दमा भरने वाली तमाम पार्टियाँ उस की इस घर वापिसी को ही मतान्तरण बता रही हैं और उसका संसद के भीतर और बाहर डट कर विरोध कर रहीं हैं । विश्वास किया जाना चाहिये कि हिमाचल प्रदेश सरकार ऐसा नहीं करेगी ।

0 thoughts on “लव जिहाद और मतान्तरण के बीच में फँसा हिमाचल प्रदेश

  1. समें कोई शक नहीं की धर्मान्तरण या मतांतरण एक राष्ट्रव्यापी चिंतन का विषय है. तथाकथित धर्मनिरपेक्ष व्यक्ति किसी हिन्दू के अन्य धर्म में धर्मान्तरण को गंभीर नहीं मानते मगर जब कोई अन्य धर्म का व्यक्ति हिन्दू बनता है तो इन बुद्धजीवियों /धर्मनिरपेक्ष प्राणियों को आसमान टूटता नजर आता है, जरूरी है इस विषय पर राष्ट्रीय परिप्रेक्ष में बहस हो,

Leave a Reply

%d bloggers like this: