मै भी हूं तन्हा,तुम भी हो तन्हा


मैं भी हूं तन्हा,तुम भी हो तन्हा।
चले उस जगह,जहा दोनों हो तन्हा।।

सूरज भी है तन्हा,चांद भी है तन्हा।
करते है सफर आसमां में वे तन्हा।।

चलो तन्हाई को रुकसत करे हम दोनों।
घर बसाए कहीं चलकर हम दोनों तन्हा।।

मेरी जान भी तन्हा,तेरा जहां भी तन्हा।
छोड़ कर चल देंगे,इस जहां को तन्हा।।

लेकर न जाएंगे कुछ भी इस जहां से हम।
बस सो जाएंगे दो गज जमीं पर हम तन्हा।।

मेरी औकात है तन्हा,तेरी बिसात है तन्हा।
इस मुकद्दर में लिखा है,हम रहेगें सदा तन्हा।।

कल थे हम तन्हा,आज भी है दोनों तन्हा।
कब तक चलेगा ये सिलसिला होने का तन्हा।।

आर के रस्तोगी

Leave a Reply

29 queries in 0.364
%d bloggers like this: