More
    Homeसाहित्‍यकवितामैं हूँ अराजक

    मैं हूँ अराजक

    रोज यही बस खबर दिख रही

    टी .वी .और अखबारों में,

    मेरे देश की बेटी लुटती

    आश्रम और गलियारों में |

     

    कुछ लोग मुझे कहते हैं अराजक

    जब आवाज उठाता हूँ

    उनकी भाषा में दिया जवाब

    सत्ता का लोभी कहलाता हूँ|

     

    पहले राजा अँधा था

    अब गूंगा बहरा आया हैं,

    हर बहन बेटी ने

    खुद को लाचार पाया हैं |

     

    क्या मै अब इंसाफ माँगू

    चुने हुए सरदारो से,

    उस पापी को क्या सजा मिलेगी

    न्याय के दरबारों से ?

     

    कोई बहन बेटी जब दिल्ली की

    सड़को पर लूट जाती हैं,

    उसके लिए न्याय मांगना

    अराजकता कहलाती हैं |

     

    मै शर्मिंदा हूँ खुद से

    क्यों अब तक मै चुप बैठा था ?

    मेरा मन कृन्दन करता हैं

    क्या मेरा कर्तव्य नहीं बनता था ?

    धृतराष्ट्र जैसा अँधा बनकर

    मै नहीं जी सकता हूँ ,

    अब कोई बन जाए द्रोपदी

    मै नहीं सह सकता हूँ |

     

    कुलदीप प्रजापति

    कुलदीप प्रजापति
    कुलदीप प्रजापति
    कुलदीप प्रजापति जन्म 10 दिसंबर 1992 , राजस्थान के कोटा जिले में धाकड़खेड़ी गॉव में हुआ | वर्ष 2011 चार्टेड अकाउंटेंट की सी.पी.टी. परीक्षा उत्तीर्ण की और अब हिंदी साहित्य मैं रूचि के चलते हिंदी विभाग हैदराबाद विश्वविद्याल में समाकलित स्नात्तकोत्तर अध्ययनरत हैं |

    1 COMMENT

    1. हम लूटते बाजारों में ,
      राजा मौज मनाता विदेशी दरबारों में.
      हमें तार तार कर रखा है भ्रष्ट और बेईमानों ने ,
      पर उन्ही की मौज है इस मयखाने में .
      रोटी के बदले बड़ी बड़ी बाते हैं.
      कोई नहींदेखता कि इनके कितने सूने दिन और कितनी लम्बी राते है.
      अगर आवाज उठाओ तो अराजक कहलाते हो
      जयदा जोर लगाए तो बलपूयर्बक कुचले जाते हो.
      प्रचार तंत्र इनके हाथों में है,
      आवाज तुंहारी दब कर रह जाती है,केवल आह और कराह बनकर.

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here

    * Copy This Password *

    * Type Or Paste Password Here *

    11,639 Spam Comments Blocked so far by Spam Free Wordpress

    Captcha verification failed!
    CAPTCHA user score failed. Please contact us!

    Must Read