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    Homeसाहित्‍यकविताहिंदी पर है मान मुझे

    हिंदी पर है मान मुझे

    राष्ट्रभाषा हिंदी है हमारी प्यारी
    सरस-मधुर बोली लगे हमें न्यारी।
    हर भाषा पर पड़ जाए जो भारी
    ऐसी निराली मातृभाषा है हमारी।
    गुलाम बन रहे अंग्रेजी के सब आज
    विदेशी भाषा में करने लगे काज।
    अंग्रेजी को कितना भी अपना ले समाज
    पर हिंदी से ही है हमारी लाज।
    निज गौरव अभिमान है यह
    हिंदी पर है मान मुझे।
    फिर से कहती हूँ
    बार-बार सहस्र बार यही दोहराती हूँ
    हिंदी है स्वाभिमान मेरा
    हाँ-हाँ हिंदी पर है मान मुझे।

    ओजस्विनी-सहज-सुगम है हिंदी
    राष्ट्र के मस्तक की है यह बिंदी।
    साहित्य का इसमें असीम सागर है
    ज्ञान की छलकाती जैसे गागर है।
    साहित्यकारों की है यह अमिट पहचान
    सब विषयों का हो रहा इसमें अनुसंधान।
    व्यापकता बहुत इसकी, नहीं कोई शंका
    विदेशों में भी बज रहा आज इसका डंका।
    हिंदी है स्वाभिमान मेरा
    हाँ-हाँ हिंदी पर है मान मुझे।

    फिर क्यों हिंदुस्तानी इससे नाता तोड़ रहे
    इतनी समृद्ध भाषा से मुहँ मोड़ रहे।
    आधुनिकता का चश्मा चढ़ाने को
    समाज में झूठी शान दिखाने को
    अंग्रेजी का चोला ओढ़े हैं।
    पर पारस्परिक संवाद में
    हिंदी में ही सुख-दुःख सुनाते हैं।
    दबी जबान में अकसर हिंदी में ही
    आपस में फुसफुसाते हैं।
    हिंदी है स्वाभिमान मेरा
    हाँ-हाँ हिंदी पर है मान मुझे।

    सिर्फ मातृभाषा या राष्ट्रभाषा नहीं
    यह आत्मीयता की भाषा है।
    मिले इसका उचित दर्जा इसे
    यही हम सबकी अभिलाषा है।
    सिर्फ पखवाड़ा या हिंदी दिवस मनाने से
    नहीं काम चलेगा।
    जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में इसको अपनाकर
    यह लक्ष्य सधेगा।
    महत्ता से इसकी कोई अनजान नहीं
    हिंदी की विदेशों में भी शान काम नहीं
    फिर क्यों कहने में आती लाज तुझे कि
    हिंदी पर है मान मुझे।

    लक्ष्मी अग्रवाल

    लक्ष्मी अग्रवाल
    लक्ष्मी अग्रवाल
    दिल्ली विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक, हिंदी पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा तथा एम.ए. हिंदी करने के बाद महामेधा, आज समाज जैसे समाचार पत्रों व डायमंड मैगज़ीन्स की पत्रिका 'साधना पथ' तथा प्रभात प्रकाशन में कुछ समय कार्य किया। वर्तमान में स्वतंत्र लेखिका एवं कवयित्री के रूप में सामाजिक मुद्दों विशेषकर स्त्री संबंधी विषयों के लेखन में समर्पित।

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