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    Homeराजनीतितुम छेडकर तो देखों,हम बाजी पलटकर दिखा देगें

    तुम छेडकर तो देखों,हम बाजी पलटकर दिखा देगें

    ( भारत चीन संबंधों पर )

    डा. अरविन्द कुमार सिंह

    क्या चीन ने गलवान घाटी पर कब्जा कर लिया है? क्षमा कीजिएगा ये प्रश्न मेरा नहीं है, किसी जिज्ञासु का भी नहीं है। दरअसल ये प्रश्न देश के प्रधानमंत्री से पूछा है, भविष्य मेंप्रधानमंत्री बनने की आकंाक्षा रखने वाले एक व्यक्ति ने।
     प्रश्न के बुनियादी धरातल पर उतरते है। कोई भी व्यक्ति अगर इस प्रश्न का उत्तर दे दे, तो फिर ये कैसे पता चलेगा कि उत्तर प्रमाणिक हैं और प्रश्न पूछने वाला उसे स्वीकार करें। अतः प्रश्न के उत्तर को प्रमाणिक होना, उसकी विश्वसनियता के लिए आवश्यक है। अतः किस व्यक्ति का कथन प्रमाणिक  होगा पहले ये हम देख ले –

    •   सबसे प्रमाणिक उत्तर 16 बिहार रेजिमेंट के कमांडिंग आफिसर एवं सैनिकों का होगा जो घटना स्थल पर मौजूद थे।
    •  स्थल सेनाध्यक्ष – जिनको 16 बिहार रेजिमेंट के कमांडिंग आफिसर ने संर्पूण घटना से वाकिफ कराया होगा।
    • सीडीएस जनरल विपीन रावत -जिनको स्थल सेनाध्यक्ष ने घटना से अवगत कराया होगा ।
    • रक्षामंत्री – जिनको सीडीएस ने संर्पूण जानकारी दी होगी।
    •  प्रधानमंत्री – जिनको रक्षामंत्री ने सबकुछ ब्रीफ किया होगा।

    क्या इनमें से किसी ने देश की जनता को कुछ नहीं बताया है ? जहाॅतक मुझे जानकारी है – स्थल सेनाध्यक्ष, रक्षामंत्री एवं प्रधानमंत्री ने लद्दाख की स्थिति को जनता से स्पष्ट किया है। फिर भीयह कहना , प्रधानमंत्री ने चीन के समक्ष आत्मसम्र्पण कर दिया है। चीन ने लद्दाख में भारत की जमीन पर कब्जा कर लिया है, अपने अधकचरे ज्ञान का प्रर्दशन है।दिलचस्प बात तो यह है। प्रधानमंत्री से स्पष्टीकरण मागने वाले व्यक्ति ने डोकलाम विवाद के समय देश को यह नहीं बताया कि वो चीनी राजदूत से चोरी से क्यों मिले थे? क्या जमाना आ गया है, उल्टा चोर कोतवाल को डाटें?
    यहा एक बात बतलाना मेरे लिए आवश्यक है। भूगोल का अध्यापक होने के नाते मानचित्रों से वाकफियत मेरा पेशा था ( अब मैं अवकाशप्राप्त हूॅ ), लाईन आफ कंट्रोल ( स्व्ब् ) और लाईन आफ एक्चुअल कंट्रोल ( स्।ब् ) को हिन्दी में क्रमशः नियंत्रण रेखा और वास्तविक नियन्त्रण रेखा के नाम से जाना जाता है।

    •  नियंत्रण रेखा ( स्व्ब् ) – यह रेखा दो देशांे के बीच समझौते  के अंर्तगतमान्य सीमा रेखा होती है। वर्तमान में भारत और पाकिस्तान के बीच नियंत्रण रेखा है। आप इसपे तारकी बाड या दीवार बना सकते है।
    •  वास्तविक नियंत्रण रेखा ( स्।ब् ) – इसके अंर्तगत दोनो देशों की अपनी समझ के अनुसार नियंत्रणरेखा होती है। यह दोनो देशों से मान्य नहीं होती। दोनो देश इस नियंत्रणरेखा को स्वीकार नहीं करते। यही झगडे की वजह होती है। ष्हादत का कारण बनती है।

    क्या है गलवान का घटनाक्रम – गलवान में पहाडियों की चोटियों का नामकरण किया गया है सेना के द्वारा। फिंगर वन, टू, थ्री …….. एट। भारत अपना वास्तविक नियंत्रण रेखा फिंगर एट तक मानता है। दूसरी तरफ चीन अपना वास्तविक नियंत्रण रेखा फिंगर फोर तक माानता है।दोनो देश समझौते के अन्र्तगत अपने अपने वास्तविक नियंत्रण रेखा तक पेट्रोलिंग करते हैं। अब यह स्थिति खतरनाक है। कभी भी टकराहट हो सकती हैं। गोली चल सकती है। लाशे गिर सकती है। इस स्थिति को बचाने के लिए 1996 में दोनो देशों ने एक समझौता किया।
    क्या है 1996 का समझौता – जिस समय यह समझौता हुआ उस समय रक्षामंत्री मुलायम सिंह यादव थे। जो क्रांगेस की सहायता से सरकार चला रहे थे। समझौेते के प्रारूप के अनुसार चीन भारत के वास्तविक नियंत्रण रेखा फिंगर एट से पीछे अपने इलाके में दो किलोमीटर तक कोई भी स्थाई या अस्थाई निर्माण नहीं करेगा और ना ही सेना का जमावडा। उसी प्रकार भारत चीन के वास्तविक नियंत्रण रेखा फिंगर फोर के पीछे अपने इलाके में दो किलोमीटर तक कोई भी स्थाई या अस्थाई निर्माण नहीं करेगा और ना ही सेना का जमावडा। साथ ही दोनो देशों की वायु सेना के लिए यह प्रतिबंध क्षेत्र दस किलोमीटर निद्र्धारित किया गया। साथ ही इस इलाके में फिंगर फोर से एट तक हथियारों का प्रयोग न करने पर सहमति बनी। सैनिको के निहत्थे होने का मुख्य कारण यही था घटना वाले दिन।
    फिर क्या हुआ पन्द्रह जून की रात को – 16 बिहार रेजीमेंट के  कर्नल संतोष बाबू को इनपुट मिला की चीन ने फिंगर एट पर अपने कुछ अस्थाई निर्माण कर लिया है। टेंट लगा लिए हैं और निगरानी के लिए वाच टावर खडा कर लिया है। यह पूर्व समझौते का उल्लंघन था। चीन दो किलोमीटर आगे आकर निर्माण कर लिया था, और सेना का जमावडा कर रहा था। जीरो ग्राउन्ड पर कर्नल संतोष ने पाया बात बिल्कुल सही है। बातचीत में बातचीत बढी और इसी बीच एक चीनी सैनिक ने कर्नल साहब को धक्का दिया। भारतिय सैनिको ने तम्बू में आग लगायी, बाच टावर को गिरा दिया और बैंकअप बुला लिया। बैक अप में सिख रेजीमेंट के घातक कमांडो पहुॅचे। भारत के बीस और चीन के 135 सैनिक हताहत हुए। कई चीनी सैनिको की गर्दने और रीढ की हड्डिया तोड दिया घातक कमांडो ने और एक चीनी आफिसर को बन्दी बना लिया।
    भारतीय सेना ने इसकी संर्पूण जानकारी देश को दी। स्थिति तनावपूर्ण बन चुकी थी। भारतिय सेना का कहना था। चीन समझौते का पालन करे । दो किलोमीटर पीछे जाय। स्थाई और अस्थाई निर्माणेा को ध्वस्थ करे। साथ ही सेना का जमावणा फिंगर एट से हटाएं।
    भारत की सुरक्षात्मक कार्यवाही

    •  पूर्वी लद्दाख में भारत ने तीन डिवीजन सेना उतार दी। लगभग पैतालिस हजार सैनिक। पहाडी लडाई में भारत चीन के बीच 1ः12 का अनुपात है। अर्थात एक भारतीय सैनिक को कट्रोल करने के लिए लगभग बारह चीनी सैनिको की आवश्यकता पडेगी। इस अनुपात से चीन को उस इलाके में पाॅच लाख सैनिकों की आवश्यकता पडेगीं।
    •  चीनी ऐपों को बन्द कर भारत ने चीन को आर्थिक चोट दी।
    •  उधर अमेरिका ने यूरोप से अपने जलपोत हटाकर द. चीन सागर में युद्धाभ्यास प्रारम्भ कर दिया।

    क्या कर रहा है चीन आपत्तिजनक

    •  फिंगर एट पर अस्थाई निर्माण।
    •  भारतीय सेना को फिंगर एट तक पेट्रोलिंग से रोकना।
    • फिंगर एट से पीछे दो किलोमीटर के दायरे में सेना जमावणा करना।

    भारतीय सेना और नेतृत्व के दबाव के कारण अब चीन अपने पूर्ववर्ती स्ािानो पर वापस जा रहा है। इस पूरे खेल में चीन ने अपने सैनिकों को गवाया और अपना आर्थिक नुकसान करा बैठा। इतना ही नहीं पूरी दुनिया में अलग थलग पड गया।
    और अन्त में अपने ही देश से सवाल पूछने वालों से विनम्र निवेदन है। कृप्या कुछ सवाल चीन से भी पूछे। क्यों तोडा 1996 का समझौता? परम्परागत हथियारों से क्यों किया हमला ? अगर हमसे कोई खतरा नही ंतो फिंगर एट पर निर्माण क्यों किया ? दो किलोमीटर के दायरे में सैन्य जमावडा क्यों किया ?
    याद रख्खें यह 1962 का भारत नहीं हैं। अगर इस बार छेडा,तो तिब्बत और आक्साई चीन लेने के बाद ही हम रूकेगें और चीन को पूरी दुनिया में पंचाइत करने के लिए कोई राष्ट्र नहीं मिलेगा। हमे अच्छी तरह पता है। राष्ट्र जबतक जिन्दा है तभीतक हमारा वजूद जिन्दा है। हम प्रश्न नहीं किया करते, उत्तर देना जानते हैं। हमे भरोसा है सेना पर, हमे भरोसा है अपने देश की सरकार पर। तुम छेडकर तो देखों,हम बाजी पलटकर दिखा देगें । अगर इतिहास ही बनाना चाहते हो तो हम इतिहास भी बनाकर दिखा देंगे।
    ( सेना की जानकारियों के आधार पर )

    डा. अरविन्द कुमार सिंह
    डा. अरविन्द कुमार सिंह
    उदय प्रताप कालेज, वाराणसी में , 1991 से भूगोल प्रवक्ता के पद पर अद्यतन कार्यरत। 1995 में नेशनल कैडेट कोर में कमीशन। मेजर रैंक से 2012 में अवकाशप्राप्त। 2002 एवं 2003 में एनसीसी के राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित। 2006 में उत्तर प्रदेश के सर्वश्रेष्ठ एनसीसी अधिकारी के रूप में पुरस्कृत। विभिन्न प्रत्रपत्रिकाओं में समसामयिक लेखन। आकाशवाणी वाराणसी में रेडियोवार्ताकार।

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