घुसपैठिए और भारतीय सेकुलर

सारे सेकुलर चुप बैठे हैंदेश जल रहा जलने दो।
बंग्लादेशी वोटर अपनेअसम मे इनको रहने दो॥
अरबों  की  आबादी अपनी,   उसपर भी  सीमित संसाधन।
फिर भी हम खुश होकर करते, बंग्लादेशी का अभिनंदन॥
हिंदुस्तान  है  चारागाह,   इनको भी  कुछ   चरने दो।
सारे सेकुलर चुप…………………………………………

जगह जगह ये बम फोड़ेंहर देशद्रोह का काम करें।
कट्टरपंथी इनकी खातिर, हर चौराहा जाम करें॥
हिंसक होकर  आग लगाएँशहीदों का अपमान करें।
राष्ट्रभक्त मुस्लिम को भी, इन कर्मो से बदनाम करें॥
वोटों की इस राजनीति मे, जनता पिसती है पिसने दो।
सारे सेकुलर चुप…………………………………………

पैसठ  वर्षो  पहले हमने,    ऐसा  ही  कुछ  भोगा था।
भारत माँ के टुकड़े करके, इसका एक हल खोजा था॥ 
बँटवारे  का  दंश   झेलकर,   लाखों   कत्लेआम देखकर।
क्या पाया है हमने आखिर, कुछ को सरहद पार भेजकर?
जो  भी ऐसी  बात उठाए,    उसको कम्यूनल  कहने दो।
सारे सेकुलर चुप…………………………………………

दुनियाभर मे  भारत जैसा  सॉफ्ट टार्गेट देश नहीं।
गुंडे, चोर, लुटेरे भी,   संसद  मे   मिल  जाएँ  यहीं॥
खरबों  मे  घोटाले  होते,    भ्रष्टाचार   चरम  पे है।
मंत्री, पीएम, राष्ट्रपति सब, किसी के रहमो करम पे हैं॥
लोकतन्त्र  यदि ऐसा हैतो  इसकी अर्थी  सजने दो।
सारे सेकुलर चुप…………………………………………..

2 thoughts on “घुसपैठिए और भारतीय सेकुलर

  1. सुपर हिट कविता के लिए कवि को धन्यवाद….. सचमुच अब लोकतन्त्र झेला नहीं जाता इसकी अर्थी सजनी ही चाहिए……

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