मैं होली हूँ – सतीश सिंह

सदियों से मैं खुशियों की तस्वीर होली हूँ .
अमराई की खुशबू हूँ, सबके दिल की धड़कन हूँ .
रंगों का त्यौहार हूँ
जो रंगों से कतराए
उसके लिए शैतान हूँ
जीवन के सफ़र में मैं बरगद की छावं हूँ
अमराई की खुशबू हूँ, सबके दिल की धड़कन हूँ .
फागुन की मेहरबानियाँ
कछुए भी खरगोश हो गए
जनमानस फाग गाकर
मस्ती के रंग में सराबोर हो गए
मैं ही महुआ हूँ, मैं ही पलाश हूँ

अमराई की खुशबू हूँ , सबके दिल की धड़कन हूँ .
मैंने ख़ुशी बांटी है
अपने हाथों दिल खोलकर
मेरे दर से न कोई खाली लौटे
फरदीन हो या समर
मैं फागुन की आखों का अंजन हूँ
अमराई की खुशबू हूँ, सबके दिल की धड़कन हूँ .
तिजारत करने बैठे हैं
कुछ लोग भूलकर मेरा मान
इस धरा पर ऐसा कौन है
जो खरीद सके मेरा स्वाभिमान
सत्य, अहिंसा, भाईचारा, ख़ुशी की फसल हूँ
अमराई की खुशबू हूँ, सबके दिल की धड़कन हूँ

1 thought on “मैं होली हूँ – सतीश सिंह

  1. आपको भी होली की हार्दिक शुभकामनायें। सत्य, अहिंसा, भाईचारा, ख़ुशी की फसल हूँ
    अमराई की खुशबू हूँ, सबके दिल की धड़कन हूँ
    बहुत सुन्दर रचना है बधाई

Leave a Reply

%d bloggers like this: