लेखक परिचय

सतीश सिंह

सतीश सिंह

श्री सतीश सिंह वर्तमान में स्टेट बैंक समूह में एक अधिकारी के रुप में दिल्ली में कार्यरत हैं और विगत दो वर्षों से स्वतंत्र लेखन कर रहे हैं। 1995 से जून 2000 तक मुख्यधारा की पत्रकारिता में भी इनकी सक्रिय भागीदारी रही है। श्री सिंह दैनिक हिन्दुस्तान, हिन्दुस्तान टाइम्स, दैनिक जागरण इत्यादि अख़बारों के लिए काम कर चुके हैं।

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सदियों से मैं खुशियों की तस्वीर होली हूँ .
अमराई की खुशबू हूँ, सबके दिल की धड़कन हूँ .
रंगों का त्यौहार हूँ
जो रंगों से कतराए
उसके लिए शैतान हूँ
जीवन के सफ़र में मैं बरगद की छावं हूँ
अमराई की खुशबू हूँ, सबके दिल की धड़कन हूँ .
फागुन की मेहरबानियाँ
कछुए भी खरगोश हो गए
जनमानस फाग गाकर
मस्ती के रंग में सराबोर हो गए
मैं ही महुआ हूँ, मैं ही पलाश हूँ

अमराई की खुशबू हूँ , सबके दिल की धड़कन हूँ .
मैंने ख़ुशी बांटी है
अपने हाथों दिल खोलकर
मेरे दर से न कोई खाली लौटे
फरदीन हो या समर
मैं फागुन की आखों का अंजन हूँ
अमराई की खुशबू हूँ, सबके दिल की धड़कन हूँ .
तिजारत करने बैठे हैं
कुछ लोग भूलकर मेरा मान
इस धरा पर ऐसा कौन है
जो खरीद सके मेरा स्वाभिमान
सत्य, अहिंसा, भाईचारा, ख़ुशी की फसल हूँ
अमराई की खुशबू हूँ, सबके दिल की धड़कन हूँ

One Response to “मैं होली हूँ – सतीश सिंह”

  1. nirmla.kapila

    आपको भी होली की हार्दिक शुभकामनायें। सत्य, अहिंसा, भाईचारा, ख़ुशी की फसल हूँ
    अमराई की खुशबू हूँ, सबके दिल की धड़कन हूँ
    बहुत सुन्दर रचना है बधाई

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