तलाश रही हूं खुद को

लक्ष्मी जयसवाल

तलाश रही हूं खुद को
कौन हूं ‘मैं’
‘मैं ‘ हूं ‘मैं ‘ या
बस हूं नाम की ‘मैं ‘
वजूद है मेरा कोई या
बिन वजूद की हूं ‘मैं’
तलाश रही हूं खुद को
कौन हूं ‘मैं’
‘मैं ‘ हूं ‘मैं ‘ या
बस हूं नाम की ‘मैं ‘
‘मैं ‘ में हूं कहां ‘मैं ‘
जाने कहां खो गई ‘मैं ‘
खो गई या थी ही नहीं ‘मैं ‘
सपना थी या कोई खिलौना हूं ‘मैं ‘
जो बिन चाभी के चलता है और
अपने मालिक के ढंग में ढलता है
तलाश रही हूं खुद को
कौन हूं ‘मैं’
‘मैं ‘ हूं ‘मैं ‘ या
बस हूं नाम की ‘मैं ‘
अपने होने का मतलब
अब तक न जान पाई हूं
अपने वजूद को
अब भी न पहचान पाई हूं
अपनापन चाहा था जो
अब भी न मिल पाया है
अपने वजूद की तलाश ने
आज फिर मुझे रुलाया है
तलाश रही हूं खुद को
कौन हूं ‘मैं’
‘मैं ‘ हूं ‘मैं ‘ या
बस हूं नाम की ‘मैं ‘

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