संक्रमण हमेशा साथ तो फिर विकल्प क्या

. जानकार जो बता रहे हैं उसके मुताबिक यह कोरोनावायरस का संक्रमण हमारे जीवन काल का एक अभिन्न हिस्सा बन गया है. विश्व स्वास्थ्य संगठन चाहे प्राइवेट स्तर पर महामारी पर अध्ययन करने वाली संस्थाएं लगभग सभी यह साफ कह भी रही है, अब ऐसे में सवाल उठता है जो बहुत अहम है कि अगर संक्रमण हमारे बीच में हमेशा के लिए मौजूद है तो फिर हमारे जहान को बचाने के लिए विकल्प क्या है? हमारे पास सवाल तो सारी दुनिया के लिए यही है कि जान भी और जहान भी कैसे बचाई जाए और दुनिया भर के लोग अब घरों में बंद होकर उबचुके हैं डिप्रेशन में भी जा रहे हैं आर्थिक परेशानियों का सामना भी कर रहे हैं ऐसे में यह चुनौती और ज्यादा बड़ी हो जाती है कि हमें अब दूसरे विकल्प की तरफ बढ़ना और सोचना जरूरी हो गया है क्या केवल मास्क और 2 गज की दूरी के नियम और सिद्धांत बाजार और व्यापार खोलने पर हमें इस संक्रमण से बचा पाने में सक्षम हैं यकीनन अगर बहुत सारे लोग इसका अनुपालन करें तो इस बीमारी से लगभग बचा जा सकता है लेकिन क्या हिंदुस्तान में इसकी परिकल्पना किया जाना स्वभाविक है सबसे बड़ा जो चिंता का विषय है वह यह है कि वैक्सीनेशन होने के बावजूद भी संक्रमण का खतरा तो कम से कम बना ही रहेगा जान जाए या बच जाए वह बात अलग है वैक्सीन के दोनों डोज लेने वाला व्यक्ति भी दूसरे लोगों को संक्रमित कर सकता है यह जानकारी भी पूरी तरह से स्पष्ट है और जिस तरह से लॉकडाउन लगाए जाने के बाद में संक्रमण में गिरावट दर्ज की जा रही है उससे यह भी बिल्कुल साफ हो गया है कि कहीं ना कहीं लोगों का मिलना जुलना ही इस वायरस के संक्रमण का सबसे बड़ा आधार है ऐसे में बाजार खोलना कितना जोखिम भरा हो सकता है इसका अंदाजा भी साफ तौर पर लगाया जा सकता है लेकिन अब सरकार एक करें भी तो क्या करें और आम आदमी वह भी अब करें ना तो फिर जिए कैसे वायरस चाइना से आया है या प्रकृति से आया है लेकिन एक विडंबना जरूर अपने साथ लाया है कि उसने ना इधर का छोड़ा है और ना उधर का छोड़ा है हालात यह है कि एक कहावत चरितार्थ होती नजर आती है और वह यह कि जबरा मारे भी और रोने भी ना दे खैर यह तो हालात है जो सामने है और इनको समझा जा सकता है लेकिन हम बात कर रहे हैं कि आखिर विकल्प क्या देखिए विकल्प के रूप में अगर हम इसे समझना चाहे तो सबसे पहले हमें अनुशासित शिक्षित और वायरस के प्रति सावधान और सचेत होने की नितांत आवश्यकता है स्वास्थ्य से जुड़ी हुई बहुत सारी संस्थाएं और जानकार यह बता रहे हैं कि वैक्सीनेशन इस वायरस से जीत हासिल करने का सबसे बड़ा मंत्र है जबकि कुछ लोगों का यह कहना भी है कि वायरस तो हमारे बीच में है ही और हमें हो सकता है कि साल दर साल वैक्सीन के बूस्टर भी लेने पड़े ऐसे में जब वैक्सीनेशन को लेकर के भारत में क्या हालात हैं आप अच्छी तरह समझ सकते हैं और अगर हमने इस गति के साथ वैक्सीनेशन किया तो लगभग 3 से 4 साल हमको पूरी आबादी को कवर करने में लग जाएंगे और अगर इस बीच बूस्टर की आवश्यकता पड़ी तो हमारी हालत क्या होगी इसका अंदाजा साफ तौर पर आप अपने ध्यान में लगा सकते हैं बताया जा रहा है कि मई के आखिर तक पीक हिंदुस्तान से अपना काम करके गुजर जाएगा और उसके बाद सरकारें शायद लॉकडाउन खोलने की तरफ बढ़ने लगेंगे लेकिन एक बात जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता मैया की वायरस तो जिंदा रहेगा ही ऐसे में अगर लॉकडाउन खुला और दोबारा भीड़ जमा हुई तो एक बार फिर तीसरी लहर के रूप में प्रकोप हमारे सामने आएगा तो आखिर किया क्या जाए शायद सबसे पहले तो हमें बाजार को एक दिन छोड़कर खोलने की अनुमति देनी चाहिए और केवल बाजार को ही नहीं बल्कि सरकारी दफ्तरों को भी इसी रूटीन में खोला जाए तो बहुत ज्यादा बेहतर होगा अब दूसरा सवाल है आने वाली भीड़ का तो भीड़ को नियंत्रित करने के लिए भी हम एक उपाय कर सकते हैं इसके साथ साथ हमें लगता है कि हमारी सभ्यता को और मौजूदा मांग को ध्यान में रखते हुए ऑनलाइन व्यापार ऑनलाइन डिलीवरी और बहुत सारी चीजों को ऑनलाइन के माध्यम से बहुत ज्यादा तेजी के साथ प्रोत्साहित करना होगा और यह प्रक्रिया को जल्द से जल्द शहरों के साथ-साथ गांवों तक पहुंचाने की योजना पर काम करने की जरूरत पड़ेगी सरकारी दफ्तरों बैंक बीमा दफ्तरों अन्य दफ्तरों के साथ कंपनी के दफ्तरों और फैक्ट्रियों और उद्योग धंधों को संचालित करने की एक नई नीति की स्थापना किए जाने की अब तत्काल आवश्यकता महसूस होने लगी है क्योंकि कई लोगों का ऐसा मानना है कि जब जब लॉकडाउन खोला जाएगा उसके थोड़े दिनों के अंतराल के बाद फिर वही चुनौती और वही वायरस का प्रकोप हमारे जीवन में देखने को आएगा और हम एक बार फिर लॉकडाउन की तरफ बढ़ते जाएंगे लेकिन क्या लॉकडाउन में जाना समस्या का हल और समाधान है क्या स्थाई रूप से इस वायरस से हम निजात पा सकने में सक्षम हो पाएंगे शायद लॉकडाउन से हम संक्रमण कम कर सकते हैं लेकिन स्थाई समाधान नहीं कर सकते ऐसे में बड़े पैमाने पर सरकारी नीति को बना करके ऐसे सख्त निर्देश बनाए जाएं कि गैर जरूरी काम के लिए कोई भी बाहर ना आ सके बहुत सारे प्रोटोकॉल ऐसे स्थापित किए जाने की अब सख्त आवश्यकता महसूस होने लगी है कि बाजारों में जाकर काम करने वाले व्यक्तियों को यह मानकर पूरी सुरक्षा से लेकर जाने की अनुमति दी जाए जैसे कि वह किसी युद्ध में अपनी जान जोखिम में डालने जा रहा हो और कोई बड़ी बात नहीं है कि हम ऐसी ड्रेस या ऐसे पहनावे की तरफ बहुत जल्द बढ़ जाएं जहां वायरस के खतरे को कम से कम किया जा सके कहा तो यह भी जा रहा है कि कोरोना से संक्रमित हुआ मरीज आगे चलकर किसी अन्य दुविधा में कोरोनावायरस की वजह से फंस सकता है तो ऐसे में सचेत और सावधानी बहुत ज्यादा बढ़ जाती है हिंदुस्तान की लगभग 150 करोड़ की आबादी को कैसे सुरक्षित करने का काम हम कर पाएंगे इस पर एक विशाल समीक्षा नीति दिशा निर्देश और गाइडलाइंस को सख्त से सख्त तौर पर लागू किए जाने की आवश्यकता है और चाहे इसके लिए सरकारों को बड़े से बड़े जुर्माने क्यों ना करना पड़े लेकिन अगर इंसान और इंसान इस सभ्यता को बचाना है तो हमें बहुत जल्द इस पर अपना काम शुरू कर देना चाहिए क्योंकि जहां तक मैं समझ पाया हूं या जो जानकार समझ पाए हैं वह सब के सब एक बात पर पड़े हैं और उनका यह साफ तौर पर कहना है कि वायरस के साथ हमें जीने की आदत डालनी होगी और इससे कोई इनकार नहीं कर सकता यह वायरस कब तक पृथ्वी पर रहेगा कब तक हम लोगों को संक्रमित करता रहेगा और कब तक बेकसूर लोगों को मारता रहेगा यह नहीं कहा जा सकता क्योंकि लॉकडाउन तक सफल हो पाता जब हमें पता होता है कि 19 दिसंबर से 2020 से 31 मई 2021 तक हमें लॉकडाउन रहने की आवश्यकता है और तब तक हम वायरस पर पूरी तरह पकड़ बना लेंगे और इससे निजात मिल जाएगी और हम सुरक्षित होकर अपने व्यापार काम धंधे और अन्य कामों को करने में लग जाएंगे लेकिन ऐसा तो कुछ भी नहीं है किसी के पास इस वायरस के अंत की डेडलाइन नहीं है तो फिर ऐसे में लॉकडाउन पर हम ज्यादा निर्भर क्यों हैं जिस प्रकार से हम अभी तक बाजारों में जाकर अपना काम करते हैं भीड़ एक साथ जोड़ती है मंदिरों में शादी समारोह में राजनीतिक रैलियों में या किसी भी अन्य प्रकार के सामाजिक गैर सामाजिक कार्यक्रमों में भीड़ का जमा होना और एक साथ लोगों का मौजूद होना इस वायरस के बीच में बेहद बेहद खतरनाक है अब अगर सरकार सोचती यह है कि वह लोगों को जागरूक करके उन्हें दिशा निर्देशों का ज्ञान कराकर इस तरह की भीड़ इस तरह के आयोजनों पर रोक लगा पाने में सक्षम होगी तो शायद वह गलत सोचती है वायरस के बीच में इंसान इंसान और जिंदगी को बचाने के लिए सरकारों को बेहद सख्त होना ही पड़ेगा और जो लोग समझ सकते हैं समझदार हैं जागरूक हैं उन्हें भी इन गाइडलाइंस का पूरी कड़ाई के साथ पालन करना पड़ेगा तब हम इस वायरस के साथ जिंदा रहते हुए चांदी और जहान भी बचा पाने की दिशा में बढ़ते हुए दिखाई देंगे अन्यथा हालात यह होंगे कि यह वायरस धीरे-धीरे करके हमारी इंसानी जमात में इस तरह पैड बना लेगा कि हर साल इस वायरस की चपेट में आकर लोग काल कनित होते रहेंगे और हम मजबूरी में अपने घरों में कैद होने को इसी तरह मजबूत बने रहे तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए सरकार को इस वायरस की भयावहता इसके दूरगामी परिणाम और इससे जुड़ी हुई हर एक सच्चाई को इन्वेस्टिगेट करके अपनी जनता के साथ में खुले विचारों के साथ खुले मन के साथ शेयर करना ही होगा यह सोच कर कि जनता के बीच में मैसेज आएगा तो पैनिक बढ़ेगा बढ़ेगी या उससे किसी प्रकार की जनहानि होने की संभावना है यह अगर सरकार सोचती रही तो पैनिक बड़े ना पड़े लेकिन इंसान की जान खतरे में ज्यादा तेजी के साथ पढ़ती रहेगी क्योंकि जानकारों का यह भी मानना है कि जो कुछ भी वायरस से जुड़ी हुई चीजें हैं उनको अगर ठीक तरीके से सरकार अपना आधार बनाकर जनता के बीच जाएं तो शायद जनता इस वायरस के साथ करने लगे और उसको यह समझ आ जाएगी अब जीवन के जीने के आधार में मूलभूत परिवर्तन होने जा रहा है और यह मूलभूत आधार परिवर्तन करके ही अब जान और जहां दोनों को बचाया जा सकता है इस पूरे कार्यकाल में समय जरूर लगेगा हम लोगों को सचेत सावधान करने और जागरूक करने में कामयाब देर से ही क्यों ना हो लेकिन होंगे जरूर और यह आंतोंगत्वा सरकारों को आम आदमी को जान और जान दोनों बचाने के लिए करना ही पड़ेगा इससे पहले कि बहुत देर हो जाए और हम समझ भी ना पाए और वायरस हमारे समाज हमारे देश में हमारे गांव की आबादी में अपनी बहुत ज्यादा हद तक पैठ बना ले और हमारे पास लॉकडाउन के अलावा कोई विकल्प ही ना बचे उससे पहले हमें और सरकार दोनों को सतर्क और सावधान हो जाने की बहुत ज्यादा जरूरत है और अंत मैं जब हम इस निष्कर्ष पर पहुंचते हैं तो यकीनन हमारे सामने एक ही निजोर सामने आता है कि वायरस तो अब जाएगा नहीं वायरस तो हमारे बीच में हमारे बिन बुलाए मेहमान की तरह रहेगा ही रहेगा अब हमें उस बिन बुलाए मेहमान को इग्नोर कैसे करना है उसे अनदेखा करते हुए हमें आगे कैसे पढ़ना है उससे बचने के लिए हमें किन किन उपायों को करना जरूरी है हम कैसे अपनी जान जिंदगी को संचालन करने वाले उद्योग धंधे व्यापार और अर्थव्यवस्था को संभाल सकते हैं इस पर हमें एक सूत्र में बंधकर बहुत अनुशासित होकर अपने जीवन को संचालित करने की दिशा में पढ़ना पड़ेगा अब उठाकर सर कहीं भी घूमने चले गए कहीं भी कुछ भी कर लिया कहीं भी ठोक दिया कहीं भी पानी पी लिया कहीं भी हमने जो है भीड़ लगा ली कहीं भी हमने कुछ भी कर दिया यह सब चला तो हमारे देश में इंसान कम और मकान ज्यादा नजर आएंगे साफ कह देता हूं इसमें बुरा मानने वाली बात नहीं है यह सच्चाई है और इसे जितनी जल्दी जिस हद तक आप स्वीकार कर लेंगे उतनी आप इंसान और इंसान की जान और जहान बचाने में कामयाब रहेंगे वायरस की ना प्रकृति बदलेगी और ना ही वायरस अपना स्वरूप बदलेगा बल्कि वायरस और ज्यादा घातक होगा और हो सकता है कि वैक्सीन लेने के बाद भी वायरस अपने आप को इतना मजबूत कर ले कि आपको फिर द्वार एक नई वैक्सीन की खोज करनी पड़ जाए ऐसे में हालात कितने कष्टकारी हैं कितने डरावने हैं इसका एहसास दुनिया की आबादी और सरकारों को है या नहीं यह तो नहीं पता लेकिन हाल फिलहाल एशिया में बहुत सारे देश ऐसे हैं जिन्हें अच्छी तरह से पता है कि हालात बहुत ज्यादा खराब नहीं है और वायरस थोड़े दिन में काबू आ जाएगा या वैक्सीन लेने के बाद में इस वायरस से हमेशा के लिए छुट्टी मिल जाएगी देखिए अब इस वायरस को पकड़ने की कोशिश करते हैं यह वायरस का जन्म हुआ था चाइना के बुहान शहर से और कहा जाता है कि यह बुहान बायोलॉजी तो चाइना ने कैसे कंट्रोल किया अब एक छोटा सा फंडा समझ यह मान कर चलिए 235000 की आबादी वाला चाइना का एक शहर है और वहां 15 लोगों से संक्रमित पाए जाते हैं तो वह चाइना 235000 वाली आबादी के पूरे के पूरे शहर को बहुत सख्ती के साथ लव डाउन कर देता है उसके बाद लॉकडाउन किए हुए शहर के हर नागरिक का दो या तीन बार rt-pcr जांच की जाती है और जब तक संतुष्ट नहीं हो जाता चाइना तब तक लॉकडाउन नहीं खोला जाता है यानी चाइना इस वायरस को लेकर सचेत और सावधान है और छोटी सी छोटी गलती भी इस वायरस के दौरान करना नहीं चाहता यही तकनीक दुनिया के हर देश को अपनानी पड़ेगी लगातार आर्टिफिशियल जांच होती रहनी चाहिए रेंडम ली और वेरलैंडर ली जांच बेहद आवश्यक है और जैसे ही मामला सामने आता है वैसे ही हमें तत्काल चाइना की तरह ही इस पर सख्ती से अमल करने की और तत्परता के साथ कोशिश करने की जरूरत है यानी हर उस देश को जिसे वायरस से अपने नागरिकों को बचाना है उसे चाइना की तकनीक पर काम करना पड़ेगा और चाइना की तकनीक सीधी और साफ और स्पष्ट है कि उसे एक वी संक्रमित व्यक्ति समाज के बीच में बर्दाश्त नहीं है और इसके लिए उसकी सरकार उसका सिस्टम उसका प्रशासन के चिकित्सक उसकी आर्मी उसका पुलिस मुस्तैद है और पूरी बारीकी के साथ में पूरी जिम्मेदारी के साथ में वह अपना कर्तव्य पालन कर रहे हैं और वहां के नागरिक भी अपने सरकार की बताई हुई गाइडलाइंस के मुताबिक उनके दिशा-निर्देशों के तहत अपने आप को डाल चुके हैं यानी को पूरी तरह से कोविड-19 की अनदेखी नहीं कर सकते और उनका पालन करना उनकी मजबूरी है क्योंकि उनकी जान को ले करके यह वायरस मुझे बीच में भी मौजूद है लेकिन उसका कारण है वहां की सरकार और उनका प्रशासन बहुत तेजी के साथ में अपने कर्तव्य की तरफ संवेदनशील है अगर हमारे देश और दुनिया की अन्य सरकारें भी इस तरह की संवेदनशीलता दिखाएं और तत्परता गंभीरता दिखाए तो शायद वायरस के ऊपर कंट्रोल कर के हमें वायरस के साथ जीने की आदत चल सकती है यानी हम विकल्प के तौर पर इस वायरस से बचने और पटाने का तरीका निजात कर के अनुशासित होकर जान और जान दोनों को बचा पाने में सुरक्षित हो सकते हैं और अगर हम तब भी नहीं समझे तो फिर हमारे सामने लॉकडाउन के अलावा दूसरा कोई विकल्प रह नहीं जाएगा और लव डाउन हम कब तक कर सकते हैं यह आप अच्छी तरह जानते हैं

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