मेरी ग़ल्ती में छिपा है मेरा इंसां होना…..

इक़बाल हिंदुस्तानी

हर किसी के लिये जो आदमी अच्छा होगा,

इसका मतलब है वो सच कहने से डरता होगा।

 

मेरे आमाल ही मालिक हैं मेरी क़िस्मत के,

उसको लिखना था जो क़िस्मत में लिक्खा होगा।

 

सिर्फ़ चेहरे को नहीं दिल को भी पढ़ना सीखो,

वर्ना एक रोज़ भयंकर सा धमाका होगा।

 

मेरी ग़ल्ती में छिपा है मेरा इंसा होना,

वो जो ग़ल्ती ना करे कोई फ़रिश्ता होगा।

 

सोच रहबर की बदल देखना इक दिन वर्ना,

फिर नई शक्ल में कोई नया ‘टाडा’ होगा।

 

सारे सुखचैन अमीरों के हवाले कर दो,

अपने हिस्से में जो आयेगा दिलासा होगा।

 

दुश्मनी समझो अगर कुछ भी शिकायत ना रहे,

दोस्ती होगी तो हर हाल में शिकवा होगा।

 

है तमन्ना मेरी उस शख़्स से यारी कर लूं,

उसके दुश्मन हैं बहुत आदमी अच्छा होगा।।

 

नोट-आमालः कर्म, रहबरः नेता, टाडाः आतंकविरोधी कानून, दिलासाः

आश्वासन, शिकवाः शिकायत।

 

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