राजनीति

क्या दुनिया को संकट से उबारने का कूटनीतिक प्रयत्न है ब्रिक्स नई दिल्ली घोषणा पत्र 2026? 

कमलेश पांडेय

भारत विविधता में एकता बनाए रखने वाला देश है। यह अपने उदारमना विचारों के चलते तमाम नीतिगत विरोधाभासों के बावजूद मतैक्यता स्थापित करने में सफल हो जाता है। अंतर्राष्ट्रीय दृष्टि में “वसुधैव कुटुंबकम्” और “सर्वे भवन्तु सुखिन:” जैसे उदात्त जनसरोकारों के चलते इसकी एक अलग विशिष्ट पहचान बनी हुई है, जिससे सभी देश भारतीय नेतृत्व पर भरोसा जताते आए हैं। यह गुटनिरपेक्षता और रणनीतिक स्वायत्तता का पक्षधर राष्ट्र है। कुछ इन्हीं वजहों से भारतीय संविधान विरोधाभासों का पुलिंदा होते हुए भी राष्ट्र की लोकतांत्रिक प्रतिष्ठा स्थापित व अक्षुण्ण रखने में  सफल हुआ है। 

देखा जाए तो दुनिया के युद्धग्रस्त क्षेत्रों की जनपीड़ा, पश्चिमी देशों के नीतिगत दांवपेंच और दुनिया के अघोषित थानेदारों के होश ठिकाने लगाने के लिए गत 12-13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के क्रम में सर्वसम्मति से जो 45 पन्नों और 140 बिंदुओं वाला “नई दिल्ली घोषणा पत्र” जारी हुआ, उसे “ग्लोबल नॉर्थ” के कुचक्रों से अभिशप्त “ग्लोबल साउथ” की दुनिया को संकट से उबारने का कूटनीतिक प्रयत्न करार दिया गया है, जिससे रूस, चीन, भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के मित्र देश लाभांवित होंगे। 

इस घोषणा-पत्र का मुख्य विषय “सक्षमता, नवाचार, सहयोग और सतत विकास का निर्माण” रखा गया था।

ऐसा इसलिए कि इसमें वैश्विक शासन में सुधार, बहुपक्षवाद को मजबूत करने और विकासशील देशों यानी ‘ग्लोबल साउथ’ की आवाज़ को वैश्विक स्तर पर बुलंद करने का पूरा प्रयत्न दृष्टिगोचर होता है। यह भारत की कूटनीतिक सफलता को भी जगजाहिर करता है।

अंतर्राष्ट्रीय कूटनीतिज्ञों की मानें तो भारत के लिए नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के बहाने अपनी कूटनीतिक सफलता की मिशाल दर मिशाल खड़ी कर दी है, जिससे दुनिया के सभी देशों को प्रेरणा लेनी चाहिए। ऐसा इसलिए कि भारत ने सभी सदस्य देशों द्वारा ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ (New Delhi Declaration) को न केवल सर्वसम्मति से मंजूरी दिलाई, बल्कि संयुक्त बयान भी जारी करवा दिया। इसकी उम्मीद अमेरिका यूरोप तक को नहीं थी। 

यदि इसकी कूटनीतिक सफलताओं को क्रमबद्ध रूप से प्रस्तुत किया जाए तो इसकी पहली कूटनीतिक सफलताओं में आम सहमति का निर्माण सबसे अहम है। जिस तरह से भारत ने पश्चिम एशिया और अन्य भू-राजनीतिक मुद्दों पर अलग-अलग और संवेदनशील विचार रखने वाले देशों (जैसे ईरान, सऊदी अरब और यूएई) के बीच निरंतर चली लंबी बैठकों के बाद आम सहमति कायम की, वह अद्भुत, अकल्पनीय और अविस्मरणीय है। 

दूसरी कूटनीतिक सफलता ग्लोबल साउथ का प्रतिनिधित्व है, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने वैश्विक संस्थाओं में सुधार और ‘ग्लोबल साउथ’ (Global South) की आवाज को जिस मजबूती से मंच पर रखा, उसे सभी देशों ने सराहा। यह भी भारतीय नेतृत्व की उल्लेखनीय उपलब्धि मानी जाती है।

तीसरी कूटनीतिक सफलता रणनीतिक स्वायत्तता और संतुलन है, जिसके दृष्टिगत भारत ने बिना किसी पश्चिमी विरोधी गठबंधन का हिस्सा बने, बहु-ध्रुवीय विश्व (Multipolar World) और व्यावहारिक कूटनीति का एक बेहतरीन उदाहरण पेश किया।

चौथी कूटनीतिक सफलता यह कि आतंकवाद और सुरक्षा पर भारत ने स्पष्ट रुख अपनाया और भू-आर्थिक मंच होने के बावजूद ब्रिक्स ने आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा जैसे भारत के अहम मुद्दों पर एक मजबूत और स्पष्ट संदेश दिया, जिसका सर्वाधिक लाभ भारत को ही होगा। 

# जहां तक ब्रिक्स नई दिल्ली घोषणा पत्र के प्रमुख भू-राजनीतिक आयामों के अंतर्राष्ट्रीय मायने की बात है तो वे निम्नलिखित हैं:- 

पहला, वैश्विक शासन और यूएन सुधार: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में संरचनात्मक बदलाव और सुधारों की मांग की गई, जिसमें भारत और ब्राजील के लिए स्थायी सदस्यता का समर्थन दोहराया गया। ग्लोबल साउथ के हितार्थ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC), अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व व्यापार संगठन (WTO) में सुधार की मांग की गई है। खासकर चीन और रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत और ब्राजील की स्थाई सदस्यता का समर्थन किया है। इससे दुनिया के विकासशील देशों को वैश्विक फैसलों में ज्यादा अधिकार मिलेंगे।

दूसरा, आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख: ब्रिक्स देशों ने आतंकवाद के हर रूप की कड़ी निंदा की है और इसके प्रति जीरो टॉलरेंस की भावना पर बल देते हुए सीमा-पार आतंकवाद, फंडिंग, पनाहगाहों के खिलाफ मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता के साथ साथ आतंक की आर्थिक मदद (Terror Financing) के नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई। इस घोषणा पत्र में किसी का नाम लिए बगैर 22 अप्रैल 2025 के जम्मू कश्मीर (पहलगाम) आतंकी हमले का विशेष रूप से उल्लेख किया गया। साथ ही, आतंकवाद से निपटने में किसी भी प्रकार के दोहरे मानदंडों को खारिज किया गया और स्पष्ट किया गया कि हर तरह का आतंकवाद आपराधिक और अनुचित है। वहीं यह भी दोहराया गया कि आतंकवाद को किसी भी धर्म, राष्ट्रीयता, सभ्यता या जातीय समूह से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। वहीं, युवाओं में बढ़ रहे कट्टरपंथ और चरमपंथ को रोकने के लिए आपसी सहयोग बढ़ाने और साइबर धोखाधड़ी व मनी लॉन्ड्रिंग से निपटने पर जोर दिया गया।

तीसरा, एकतरफा व्यापार और टैरिफ का विरोध: वैश्विक व्यापार को बाधित करने वाले एकतरफा टैरिफ (शुल्क) और गैर-शुल्क उपायों पर गंभीर चिंता जताई गई, जो विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों के खिलाफ हैं। आर्थिक सुरक्षा के दृष्टिगत अमेरिका द्वारा लगाए जा रहे एकतरफा शुल्कों (Tariffs) और प्रतिबंधों पर भी चिंता जताई गई। इससे बचने के लिए आपसी व्यापार में अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने और स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है। साथ ही आपसी व्यापार और शुल्क नीतियां तय करने पर जोर दिया गया। साथ ही डॉलर के प्रभुत्व को तुरंत चुनौती दिए बिना, सदस्य देशों के बीच आपसी व्यापार के लिए स्थानीय (लोकल) मुद्राओं के उपयोग को बढ़ावा देने पर सहमति बनी है। सदस्य देशों ने पश्चिमी देशों द्वारा लगाए जाने वाले एकतरफा आर्थिक प्रतिबंधों और व्यापार में बढ़ते एकतरफा टैरिफ पर गहरी चिंता जताई है।

चौथा, भू-राजनीतिक संघर्ष और शांति: ब्रिक्स देशों की बैठक में पश्चिम एशिया (गाजा और मध्य पूर्व) के संघर्षों पर चर्चा हुई, वाणिज्यिक शिपिंग मार्गों व नाविकों की सुरक्षा का आह्वान किया गया, तथा संकटग्रस्त क्षेत्रों में मानवीय सहायता और कूटनीतिक संवाद पर सहमति बनी। यह तय हुआ कि पश्चिम एशिया में शांति और कूटनीति के जरिए ही आपसी मतभेद दूर किया जाएगा। खासकर ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच पश्चिम एशिया के मुद्दों पर मतभेदों को कूटनीति और संवाद से सुलझाने की अपील की गई। साथ ही आपस में संघर्षों के बजाय शांतिपूर्ण समाधान पर बल दिया गया। पश्चिम एशिया में शांति हेतु मध्य पूर्व (पश्चिम एशिया) के संघर्षों और तनाव को कम करने के लिए ब्रिक्स मंच द्वारा शांति पहल में सक्रिय भूमिका निभाने की बात कही गई है।

पांचवां, तकनीक और नवाचार: ग्लोबल साउथ के हितों को ध्यान में रखते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के गवर्नेंस, वित्तीय जोखिम प्रबंधन, और पर्यावरण व वन्यजीव संरक्षण (जैसे बिग-कैट कंजर्वेशन) पर भारत के नेतृत्व वाली पहलों का समर्थन किया गया। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) के नैतिक और जिम्मेदार उपयोग के लिए वैश्विक दिशा-निर्देश तय करने का प्रस्ताव है। साथ ही डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) और साइबर अपराध से निपटने के लिए भी संयुक्त प्रयासों को बढ़ावा दिया जाएगा।

# भारत की अर्थव्यवस्था पर ब्रिक्स नई दिल्ली घोषणा पत्र का विशिष्ट प्रभाव

जहां तक भारत की अर्थव्यवस्था पर ब्रिक्स नई दिल्ली घोषणा पत्र के विशिष्ट प्रभावों के विश्लेषण की बात है तो

यह भारतीय अर्थव्यवस्था और रणनीतिक हितों के लिए कई सकारात्मक और दूरगामी प्रभाव लेकर आया है, जो निम्नलिखित है:-

पहला, स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और वित्तीय लचीलापन: घोषणा पत्र में क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट और स्थानीय मुद्राओं (लोकल-करेंसी सेटलमेंट्स) के उपयोग को बढ़ावा देने पर सहमति बनी है। इससे भारतीय रुपए को वैश्विक स्तर पर व्यापार के लिए अधिक स्वीकार्य बनाने और अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।

दूसरा, वैश्विक संस्थाओं में बढ़ी हुई हिस्सेदारी: रूस और चीन द्वारा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी का समर्थन किया गया है। साथ ही वैश्विक वित्तीय और राजनीतिक मंचों पर ग्लोबल साउथ’ (Global South) की सशक्त आवाज के रूप में भारत का कूटनीतिक और आर्थिक कद मजबूत हुआ है। 

तीसरा, व्यापार सुरक्षा और टैरिफ़ नीतियों का विरोध: ब्रिक्स ने एकतरफा टैरिफ और गैर-टैरिफ उपायों पर गहरी चिंता जताई है जो विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों के विपरीत हैं। इससे भारतीय निर्यातकों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (MSME) को अनुचित व्यापारिक बाधाओं से सुरक्षा मिलने का मार्ग प्रशस्त होगा।

चौथा, तकनीकी सहयोग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI): कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डिजिटल अर्थव्यवस्था, ऊर्जा और सेमीकंडक्टर जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग पर जोर दिया गया है। वहीं भारत के नेतृत्व वाले वित्तीय जोखिम और एआई पहलों को समर्थन मिलने से देश के तकनीकी व डिजिटल स्टार्टअप्स को वैश्विक बाजार मिलने में आसानी होगी।

पांचवां, सुरक्षित व्यापार मार्ग और समुद्री सुरक्षा: पश्चिम एशिया के संघर्षों और समुद्री बाधाओं के बीच सुरक्षित नौवहन और निर्बाध व्यापारिक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर बल दिया गया है। इससे भारतीय उद्योगों को महंगे मालभाड़े, बीमा लागत और ऊर्जा आपूर्ति में होने वाले व्यवधानों से राहत मिलेगी। यह भारत के आर्थिक हितों के अनुकूल है।

# वैश्विक अर्थव्यवस्था पर ब्रिक्स घोषणा पत्र का दूरगामी प्रभाव 

जहां तक वैश्विक अर्थव्यवस्था पर ब्रिक्स घोषणा पत्र के दूरगामी प्रभाव की बात है तो इससे मुखरित 11 प्रमुख निष्कर्ष वैश्विक अर्थव्यवस्था और भू-राजनीति में एक मील का पत्थर साबित होंगे। वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसके दूरगामी प्रभाव होंगे, जो इस प्रकार हैं:- 

एक, संरक्षणवाद और एकतरफ़ा शुल्कों का विरोध: घोषणापत्र ने स्पष्ट रूप से एकतरफा टैरिफ, प्रतिबंधों और संरक्षणवादी नीतियों की निंदा की है, जो पर्यावरण या अन्य नियमों की आड़ में वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित करते हैं। 

दो, आईएमएफ और विश्व बैंक में सुधार: वैश्विक वित्तीय संस्थानों (IMF और World Bank) में विकासशील देशों (Global South) की मतदान हिस्सेदारी और प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के लिए कोटा सुधारों पर जोर दिया गया है।

तीन, स्थानीय मुद्राओं में व्यापार: डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए आपसी व्यापार में सदस्य देशों की स्थानीय मुद्राओं (Local Currencies) के इस्तेमाल और क्रॉस-बेरॉर्ड भुगतान तंत्र (Interoperable Payment Systems) को बढ़ावा देने की बात कही गई है।

चार, एनडीबी (NDB) का विस्तार: न्यू डेवलपमेंट बैंक के माध्यम से बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं को आसान ऋण उपलब्ध कराने के दायरे को और विस्तृत किया जा रहा है।

पांच, बहुध्रुवीय व्यवस्था (Multipolarity): यह घोषणा वैश्विक आर्थिक निर्णय-निर्माण में पश्चिमी देशों के एकाधिकार को चुनौती देती है और एक समावेशी व संतुलित बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था का संकेत देती है। 

स्पष्ट है कि दुनिया को युद्ध नहीं बुद्ध का शांति संदेश देने वाले भारत के दूरदर्शी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विभिन्न युद्धों से संकटग्रस्त दुनिया और उनके दांवपेंच से परेशान अन्य देशों को संकट से उबारने का सटीक कूटनीतिक प्रयत्न किया है। इसलिए ब्रिक्स दिल्ली घोषणा पत्र 2026 की सराहना सभी देश किए हैं और आगे भी इस पर अमल किए बिना किसी के पास कोई दूसरा चारा नहीं बचा है।

कमलेश पांडेय