लेखक परिचय

बीनू भटनागर

बीनू भटनागर

मनोविज्ञान में एमए की डिग्री हासिल करनेवाली व हिन्दी में रुचि रखने वाली बीनू जी ने रचनात्मक लेखन जीवन में बहुत देर से आरंभ किया, 52 वर्ष की उम्र के बाद कुछ पत्रिकाओं मे जैसे सरिता, गृहलक्ष्मी, जान्हवी और माधुरी सहित कुछ ग़ैर व्यवसायी पत्रिकाओं मे कई कवितायें और लेख प्रकाशित हो चुके हैं। लेखों के विषय सामाजिक, सांसकृतिक, मनोवैज्ञानिक, सामयिक, साहित्यिक धार्मिक, अंधविश्वास और आध्यात्मिकता से जुडे हैं।

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ये त्योहारों का मौसम है

गणपति वंदन और विसर्जन

नव-रात्रि मे देवी पूजन,

संसकृति संगीत धर्म का संगम,

कंहीं बांगला साज़ बजेगा,

रामलीला का मंचन होगा,

कंहीं डाँडिया रास रचेगा।

विजय दशमी की धूम मचेगी,

बुराई की अंगार जलेगी,

रावण के परिवार के पुतले,

धूं धूं धूं धूं करके जलेंगे।

सुहागने करवा चौथ करेंगी,

मायें अहोई मां को पूजेंगी,

धनतेरस धन वर्षा होगी,

नरका चौदस महास्नान करेंगे,

फिर दीपाली की ज्योति जलेगी,

लक्ष्मी पूजन,आरती वंदन,

गोवर्धन पूजा भी होगी,

भाई दूज मे भाई बहन

का स्नेह बंधेगा,

एक के बाद एक त्योहार,

ये इस मोसम की सौगात ।

 

 

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