पत्रकारिता और दीनदयाल उपाध्याय

पुस्‍तक समीक्षक – डॉ. मनोज चतुर्वेदी

दीनदयाल उपाध्याय एक विचारक, प्रचारक, विस्तारक, राष्ट्रषि, संपादक, पत्रकार अर्थशास्त्री, समाजसेवी, एक प्रखर वक्ता, शिक्षाविद तथा अपूर्व संगठनकर्ता थे। उन्होंने अहोरात्र भारत माता की सेवा करते-करते अपने जीवन को होम कर दिया। दीनदयाल जी ने लेखन तथा संपादन की शिक्षा, आज के महाविद्यालयों-विश्वविद्यालयों से नहीं लिया था। उन्होंने ‘आर्गेनाइजर’ में ‘पॉलिटिकल डायरी’ तथा ‘पांचजन्य’ में ‘विचार विथि’ नाम से नियमित स्तंभों का लेखन किया। उन्होंने भारतीय सभ्यता-संस्कृति पर होने वाले प्रहारों से व्यथित होकर लेखनी को चुना। वे लेखकों के लेखक तथा संपादकों के संपादक थे। जिनके मार्गदर्शन में मा. अटलबिहारी वाजपेयी, राजीव लोचन अग्निहोत्री, देवेन्द्र स्वरूप तथा भानुप्रताप शुक्ल ने पत्रकारिता के क, ख और ग को सीखा।

 

आज जहां पत्रकारिता मिशन, प्रोफेशन से चलकर कमीशन में बदल गयी है। ऐसे समय में दीनदयाल उपाध्याय और पत्रकारिता पुस्तक का महत्व और बढ़ जाता है। आज जहां ‘पेड न्यूजों’ की चारों तरफ भरमार हैं समाचार-विचार पर विज्ञापन तथा कमीशन रूपी बाजार का बोलबाला है ऐसे समय मूल्यपरक पत्रकारिता हेतु दीनदयाल जी की प्रासंगिकगा और बढ़ जाती है।

 

यद्यपि यह पुस्तक तो ठीक-ठाक है पर इसमें और भी लेखकों को स्थान देने की आवश्यकता थी। जब नानाजी देशमुख के निवेदन पर पुस्तक की भूमिका संपूर्णानंद ने लिखी तो इस बात का अंदाज लगाया जा सकता है कि दीनदयाल जी जनसंघ के माध्यम से राष्ट्र जीवन की परंपरा का संरक्षण करना चाहते थे। इन्हीं बातों का ध्यान रखकर बाबुजी (संपूर्णानंद जी) ने पुस्तक की भूमिका लिखी।

 

यह पुस्तक पत्रकारों, शोधार्थियों तथा प्रबुध्दजनों के लिए पठनीय व संग’हणीय है। पुस्तक की छपाई, भाषा शैली तथा आवरण पृष्ठ बहुत ही आकर्षक हैं जो पाठकों को पढ़ने के लिए बार-बार बाध्य कर देती है। कुल मिलाकर दीनदयाल जी ने जब ‘भारतीय अर्थनीति विकास की एक दिशा’ पुस्तक लिखी तो लोगों को बहुत आश्चर्य हुआ कि यह व्यक्ति अर्थनीति में भी सिध्दहस्त है। साधारण ट्रेन से यात्रा करते हुए पढ़ना-लिखना इनका अध्यव्यवसाय था जिन्होंने दीनदयाल को पत्रकार-संपादक दीनदयाल बना दिया।

 

पुस्तक : पत्रकारिता और दीनदयाल उपाध्याय

संपादक : डॉ. महेशचंद्र शर्मा

प्रकाशक : दीनदयाल, समग’ भारतीय जनता पार्टी, 11, अशोक रोड, नई दिल्ली

संस्करण : फरवरी, 2011

मूल्य : 30 रूपये

पृष्ठ : 96

 

2 thoughts on “पत्रकारिता और दीनदयाल उपाध्याय

  1. प्रकाश पुंज महामना पंडित दीनदयाल जी को श्रद्धा पुष्प अर्पण करता हूँ.

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