पुलिसकर्मियों के दुख-दर्द को समझने के लिए गाजियाबाद के एसएसपी कलानिधि नैथानी ने की सराहनीय पहल

दीपक कुमार त्यागी
पुलिस चाहे किसी भी राज्य या देश की हो उसका काम बेहद महत्वपूर्ण व जिम्मेदारी वाला होता है। चंद गलत व्यवहार वाले कर्मियों, लापरवाह कर्मियों और भ्रष्टाचारियों की वजह से पुलिस के प्रति पूरे देश में आम लोगों का भाव ऐसा बन चुका है कि वो चाहे कितनी भी निष्ठापूर्वक, ईमानदारी व निष्पक्षता से अपनी जिम्मेदारी का पालन करें, लेकिन फिर भी उनका कोई दिल से आभार व्यक्त करने व हौसलाअफजाई करने के लिए तैयार नहीं होता है, हाँ कुछ अपवादों को छोड़कर लोगों के द्वारा दिखावे व पुलिस से संबंध बनाने के लिए आभार व्यक्त करने की औपचारिकता जरूर हमेशा से पूरी की जाती रहती है। जब तक हमारे समाज में कानून व पुलिस का दिल से सम्मान नहीं होगा, तब तक हमारे प्यारे देश में अपराधों पर लगाम लगाना बहुत कठिन है। हमारी सरकार के नीतिनिर्माताओं को ध्यान देना होगा कि आम लोगों का विश्वास जीतने के लिए आज वर्षों पूराने ढर्रे पर चली आ रही पुलिस व्यवस्था में अमूलचूल परिवर्तन की तत्काल ही बहुत ज्यादा आवश्यकता है। एक पुलिसकर्मी के द्वारा अपनी जिम्मेदारी का सही ढंग से पालन करने के लिए उसको तनाव मुक्त रखने की जिम्मेदारी उसके परिवार से ज्यादा विभाग के आला अधिकारियों की बनती है, लेकिन शायद ही कोई आलाधिकारी कभी एक आम पुलिसकर्मी के दुख-दर्द को समझने के लिए तैयार होता है। जिस तरह के बेहद तनावपूर्ण हालातों व संसाधनों के अभाव में एक जिम्मेदार व ईमानदार पुलिस वाले को लगातार काम करना पड़ता है, वह स्थिति आज के माहौल में बहुत चुनौतीपूर्ण है, स्थिति पर नियंत्रण बनाये रखने के लिए हर पुलिसकर्मी का तनाव मुक्त होना बेहद आवश्यक है। आज भारत को तरक्की की नयी दिशा देने के लिए अपराधों पर लगाम रखकर अपराध मुक्त रखना बेहद आवश्यक है, जिसके लिए पुलिस विभाग के सभी कर्मियों को अपनी जिम्मेदारी का सही ढंग से निर्वाह करने के लिए तनाव मुक्त होना बेहद जरूरी है। क्योंकि यह लोग महत्वपूर्ण जिम्मेदारी का निर्वहन करने के लिए अपना व अपने सभी परिजनों के दुख-दर्द को भूलकर अपनी ड्यूटी का पालन लगातार करते रहते हैं, जिसके चलते कही ना कही ना चाहते हुए भी उनकी कार्यशैली खुद के तनाव में होने के चलते प्रभावित हो जाती है। अफसोसजनक बात यह है कि चंद अपवादों को छोड़कर हर समय आम व खास सभी वर्गों के लोगों की सुरक्षा में तत्पर रहने वाले पुलिसकर्मियों के कष्टों को समय रहते उनका खुद का डिपार्टमेंट भी समझने के लिए तैयार नहीं रहता है, जो एकदम सरासर गलत हैं।
पुलिसकर्मियों को तनाव मुक्त रखने के लिए उत्तर प्रदेश के जिला गाजियाबाद के पुलिस कप्तान ने अपने मातहत सभी पुलिसकर्मियों के दुख-दर्द को समझने के लिए व उनके तनाव को कम करने के उद्देश्य से उनसे मन की बात करने की एक नयी परंपरा शुरुआत की है। पुलिस विभाग को चुस्तदुरुस्त बनाने के लिए अपने स्तर तरह-तरह के सकारात्मक प्रयोगों के लिए मशहूर तेजतर्रार एसएसपी कलानिधि नैथानी ने देश के सभी राज्यों के लिए नजीर बनने वाली एक बहुत ही शानदार सराहनीय व अमल करने योग्य पहल ‘पुलिस कार्मिक सुनवाई सम्मेलन’ की गाजियाबाद में शुरुआत की है। आईपीएस कलानिधि नैथानी ने रविवार 9 अगस्त को सुबह 10 बजे से 12.30 बजे ढ़ाई घंटे तक पुलिसकर्मियों की मन की बात दिल खोलकर सुनी, समस्या सुनकर लगभग 250 शिकायतों में से 200 मामलों का तत्काल दिशानिर्देश जारी करके निस्तारण करवाया, वैसे इस सुनवाई में अधिकांश शिकायतें जनपद के अंदर ट्रांसफर, गैर जनपद ट्रांसफर, प्रमोशन विसंगति, वर्दी संबंधी, मेडिकल, भत्ता, बोनस,  डीए, एरियर, वेतन विसंगति, मेडिकल कंडीशन के आधार पर ट्रांसफर, आवास, परेड़ माफी, महिला प्रकोष्ठ संबंधी, घर के पास ड्यूटी के संदर्भ में व छुट्टी आदि से जुड़ी हुई थी, लेकिन दूरगामी दृष्टिकोण से विचार करें तो कही ना कही इन सभी छोटी-बड़ी समस्याओं के चलते ड्यूटी के वक्त भी एक पुलिसकर्मियों को तनाव में रहना पड़ता है, जिसके चलते उसका अपने काम के प्रति व आम जनता के साथ व्यवहार ठीक नहीं होता है। पुलिसकर्मियों के दुख-दर्द को समझने वाली  एसएसपी कलानिधि नैथानी की यह पहल भविष्य में बहुत ही सकारात्मक साबित हो सकती है।कप्तान के ऐसा लगातार करते रहने से भविष्य में पुलिसकर्मियों का मनोबल बढ़ेगा और उनकी कार्यप्रणाली व आम जनमानस से  व्यवहार बेहतर होगा। कप्तान कलानिधि नैथानी ने नया प्रयोग करते हुए पुलिसकर्मियों की समस्याओं का एक अलग से रजिस्टर बनाने का दिशा निर्देश दिया है, इस रजिस्टर में पुलिसकर्मियों की सभी शिकायतों को दर्ज करके समस्या का निराकरण कराने के लिए संबंधित अधिकारी को जिम्मेदारी दी जायेगी, साथ ही व्यवस्था को बेहतर बनाये रखने के उद्देश्य से कप्तान समय-समय पर इस रजिस्टर का खुद निरीक्षण करके व्यवस्था का रिव्यू भी करते रहेंगे। कप्तान नैथानी ने अभी कुछ दिन पहले ही गाजियाबाद जनपद के सभी पुलिसकर्मियों को जन्मदिन, शादी की सालगिरह, रिश्तेदारों के  शादी समारोह व अन्य आवश्यक पारिवारिक कार्यक्रम आदि पर छुट्टी देने का आदेश देकर 24 घंटे अपनी ड्यूटी के निर्वहन में व्यस्त रहने वाले पुलिसकर्मियों व उनके परिवार को एक बहुत बड़ा भावनात्मक तोहफा दिया था, उनकी यह पहल भी पुलिस की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने में सहयोगी साबित हो सकती है। पुलिसकर्मियों के व्यवहार में  बदलाव लाने के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व उत्तर प्रदेश पुलिस के मुखिया डीजीपी हितेश चंद्र अवस्थी को गाजियाबाद के एसएसपी कलानिधि नैथानी की इन बेहतरीन पहल को पूरे प्रदेश में लागू करके उत्तर प्रदेश में पुलिस व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सकारात्मक प्रयास करके धरातल पर शुरुआत करनी चाहिए, जिससे भविष्य में पुलिसकर्मियों के अच्छे आचरण के चलते लोग भय की जगह दिल से कानून का सम्मान करना शुरू कर सकें।
।। जय हिन्द जय भारत ।।।। मेरा भारत मेरी शान मेरी पहचान ।।

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