केजरीवाल ने कांग्रेस की क़ब्र खोद दी है अब दफ़नाना बाक़ी है!

-इक़बाल हिंदुस्तानी- arvind

 

समाज में जागरूकता लाये बिना व्यवस्था में परिवर्तन कैसे होगा? अरविंद केजरीवाल ने एक साल के अंदर पहले आम आदमी पार्टी बनाकर, उसके बाद दिल्ली में 28 सीटें जीतकर और अब आप की सरकार का सीएम बनकर कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की 25 नवंबर 2012 की उस चुनौती का मुंहतोड़ जवाब दे दिया है जिसमें उन्होंने कहा था कि अरविंद पहले म्यूनिसिपल कॉरपोरेटर ही बनकर दिखा दें। ऐसे ही पूर्व सीएम शीला दीक्षित ने 22 सितंबर 2013 को कहा था कि आप जैसे दल मानसूनी कीड़ों की तरह की होती हैं, ये आती हैं, पैसे बनाती हैं और गायब हो जाती हैं। ये इसलिये नहीं टिक पाती क्योंकि इनके पास दृष्टि नहीं होती। ऐसे ही भाजपा नेत्री सुषमा स्वराज ने 2 दिसंबर 2013 को कहा था कि जनता आप को वोट देकर अपना मत ख़राब नहीं करना चाहती। बीजेपी के एक्स प्रेसीडेंट नितिन गडकरी ने 2 दिसंबर 13 को कहा था कि आप कांग्रेस की बी टीम है।

इसने हालिया स्टिंग ऑपरेशन के बाद अपनी विश्वसनीयता खो दी है। दोनों बड़े दलों के इतने धुरंधर नेताओें के चुनाव नतीजे आने से पहले के ये बयान उनका खोखलापन बताने के लिये काफी हैं। बाद में हालांकि राहुल गांधी ने यह स्वीकार किया कि जिस तरह से आप ने बड़ी संख्या में लोगों को जोड़ा, उस तरह से परंपरागत पार्टियां नहीं कर पाईं। ऐसे ही कांग्रेस सांसद प्रिया दत्त ने माना कि आप ने शासन का हिस्सा बनने और व्यवस्था में बदलाव के लिये आम आदमी के लिये मंच तैयार किया है। आपको यहां यह भी याद दिला दें कि आप की सरकार बनने से पहले केवल 28 सीटें जीतने से ही दो बड़े काम लोकपाल का संसद में पास होना और भाजपा का 32 विधायकों के साथ सबसे बड़ा दल होने के बावजूद अन्य विधायकों को तोड़कर सरकार बनाने का प्रयास ना करना।

इतना ही नहीं कांग्रेस ने बिना सपोर्ट मांगे ही आप को बिना शर्त समर्थन देने का ऐलान यह सोचकर किया था कि इससे दो बातें होंगी। एक- आप अगर उसके सपोर्ट से सरकार नहीं बनाती है और दोबारा चुनाव होता है तो वह जनता से कहेगी कि आप की ज़िद की वजह से जनता पर चुनाव का बोझ पड़ा है। साथ ही कांग्रेस ने सोचा था कि वह जनता में यह भी जोर-शोर से प्रचार करेगी कि आप ने जो लुभावने वादे किये थे, वे पूरे करना उसके बस की बात नहीं है। इसीलिये वह बिना शर्त दिये जा रहे समर्थन से भी सरकार बनाने को आगे नहीं आई। दूसरे विकल्प की संभावना कांग्रेस को बहुत कम थी कि अगर आप उसके सपोर्ट से सरकार बनाने को राज़ी हो भी जाती है तो वह अपने वादे तब भी पूरे नहीं कर पायेगी और ऐसे में आप की सरकार मौका देखकर गिराकर जनता से चुनाव में कहा जा सकता है कि लोक-लुभावने वादे करना और बात है सरकार बनाकर उनको पूरा करना और बात है।

कांग्रेस को यह भी आशंका थी कि आप को सपोर्ट देकर सरकार बनवाई गयी तो वह कांग्रेस के प्रति कुछ नरम हो सकती है जबकि इस दौरान भाजपा ने कांग्रेस या आप के कुछ विधायक तोड़ लिये तो वह उसके घोटालों और भ्रष्टाचार की जांच कराकर लोकसभा चुनाव में और अधिक नुकसान पहुंचा सकती है। कांग्रेस यह भी मान कर चल रही थी कि आप को सपोर्ट कर के सरकार बनवाने से जनता की नाराज़गी उससे तो कम हो सकती है लेकिन नाकाम होने पर मतदाता आप से ख़फ़ा हो जायेगा। वह यह भी दिखाना चाहती थी कि आप सत्ता में आने को उतावली है और कल तक जिस कांग्रेस को भ्रष्ट बता रही थी देखो आज उसके सहारे ही सरकार बनाने को तैयार हो गयी। ये सारी चालें केजरीवाल की टीम और उनकी आप भी समझ रही थी लिहाज़ा उन्होंने बदले हुए राजनीतिक हालात का हल जनता से राय लेकर निकाला ताकि यह पता लगे कि आप जनता की राय को ही सर्वोपरि मानती है।

आप नेताओं ने यह भी साफ कर दिया है कि आप कांग्रेस की शर्तों पर नहीं अपने एजेंडे पर सरकार चलायेगी क्योंकि उन्होंने कांग्रेस से सपोर्ट मांगा नहीं बल्कि आप को बिना शर्त कांग्रेस ने आप के एजेंडे पर ही सपोर्ट दिया है। अब कांग्रेस के लिये एक तरफ कुआं दूसरी तरफ खाई वाली पोज़िशन हो चुकी है क्योंकि आप ने ऐलान कर दिया है कि कांग्रेस और भाजपा के भ्रष्ट नेताओं को जेल भेजा जायेगा और शीला दीक्षित सरकार के कार्यकाल के सभी घोटालों की जांच कराई जायेगी।

अब तक जो कुछ हुआ उससे कांग्रेस की कब्र तो आप ने खोद ही दी है, अब अगर आप सरकार अपने वायदों में से कुछ भी पूरे करने में कामयाब हो जाती है जो कि वह हर हाल में हो ही जायेगी तो कांग्रेस को यूपी बिहार और तमिलनाडु की तरह सदा के लिये दफन करके ही दम लेगी और साथ ही विपक्ष में राजनीति करने वाली भाजपा को भी आप से बेहतर और आम आदमी समर्थक छवि बनाकर जनहित के ठोस काम नैतिकता और ईमानदारी के साथ करने होंगे, वर्ना आप के लिये दिल्ली ही नहीं पूरे देश में मैदान खाली पड़ा होगा जहां वह लोकसभा चुनाव में सभी परंपरागत दलों का नाक में दम कर के रखेगी।

बिजली पानी  और जनलोकपाल के साथ ही आप को समाज में भी जनजागरण अभियान चलाना होगा वर्ना कांग्रेसी पृष्ठभूमि के उसके विधायक विनोद बिन्नी की तरह उसको कदम कदम पर सिस्टम बदलने में बाधाओं का सामना करना पड़ेगा जिससे उसके विरोधी उसके दावों को अव्यावहारिक बताकर उसकी खिल्ली उड़ाने को तैयार बैठें हैं। मिसाल के तौर पुलिस, उद्योगपति, व्यापारी, पत्रकार, शिक्षक, वकील, इंजीनियर और डाक्टर आदि जिस पेशे में देखो आपको भ्रष्टाचार खूब फलता-फूलता मिलेगा। भ्रष्टाचार के समंदर की सफाई उसकी तली यानी नीचे से करनी होगी और इसके लिये समाज को नैतिकता के प्रति जागरूक करना होगा जिससे मतदाताओं को जाति और धर्म जैसे मुद्दों से हटाकर नैतिकता और चरित्र के एजेंडे पर लाया जा सके। लोकतंत्र के परिपक्व होने के बाद ही लोग सुविधाओं और अधिकारों के प्रति जागरूक होकर  भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ते हैं।

अभी लोगों को यह तक अहसास नहीं है कि साफ सुथरा और जवाबदेह शासन-प्रशासन उनका संवैधानिक हक है लेकिन इसके लिये उनको खुद भी ईमानदार बनना होगा। आपको याद होगा सिमेंट, स्कूटर और टेलिफोन की बुकिंग में कितना लेनदेन चलता था आज ये चीज़ें खुले बाज़ार में आराम से उपलब्ध हैं तो कोई रिश्वत नहीं देनी पड़ती। रेलवे का टिकट आरक्षण नेट पर आने और हर हाथ में मोबाइल फोन आने से अब आपको सुविधा शुल्क दिये बिना दोनों सरकारी सुविधायें तकनीक के कारण आसानी से भ्रष्टाचार से मुक्ति दिला चुकी हैं। थाने में जिस दिन रपट ईमेल से जाने लगेगी उस दिन आपको पुलिस एफआईआर के भ्रष्टाचार से भी आज़ादी मिल जायेगी। मानव नियंत्रित व्यवस्था में आवश्यक वस्तुएं या तो वास्तव में ज़रूरत से कम होती हैं या फिर उनका बनावटी अभाव पैदा करके ब्लैक का बाज़ार बनाया जाता है।

ऐसे ही टैक्स और रजिस्ट्री स्टाम्प अधिक दरें रखने या अधिकारियों के विवेक पर छोड़ने से भ्रष्टाचार को पर लगते हैं। सच यह है कि समाज का हर वर्ग कमोबेश भ्रष्टाचार में डूबा है क्योंकि हमने पद, पैसा और ताकत़ को ही सब कुछ मान लिया है इसलिये धर्म, कानून और समाज का डर ख़त्म हो जाने से बच्चों को शुरू से ही नैतिकता, मानवीयता और समानता का सबक सिखाने की ज़रूरत भी उतनी है, जितनी पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था बनाने की है।

कलेजा चाहिये दुश्मन से दुश्मनी के लिये, जो बेअमल है वो बदला किसी से क्या लेगा।

5 thoughts on “केजरीवाल ने कांग्रेस की क़ब्र खोद दी है अब दफ़नाना बाक़ी है!

  1. अच्छा लेख. निष्पक्ष विवेचन. एक महीने के बाद एक बार और पूर्वाग्रह विहीन और निष्पक्ष विवेचन कि अपेक्षा है.

  2. कुछ समय बाद पता चलेगा कि आप का कांग्रेस के प्रति क्या रुख रहता है? केजरीवाल के तेवर कुछ तो ढीले पड़ने लग गएँ हैं,थोड़े दिन में सत्ता कि कुर्सी की गर्मी क्या गुल खिलायेगी,पता चलेगा.

    1. अगरअरविन्द केजरीवाल के रामलीला मैदान में दिए गए भाषण के बाद भी किसी को लगता है कि उनके तेवर ढीले पड़ रहे हैं,तो मैं यही कहूंगा कि इस वक्तव्य देने वाले ने उनका भाषण या तो सुना नहीं या सूनने के बाद भी पूर्वाग्रह के चलते उसपर ध्यान नहीं दिया.

  3. हम लोकतंत्र से “आई.एन.जी.ओ.तंत्र” एवं “मीडियातंत्र” की और तेजी से बढ़ रहे है. आआपा का उदय इस बात का स्पस्ट संकेत है.

    1. अति उत्तम विवेचना….

      केजरीवाल अभी तक तो सही काम कर रहे हैं… आगे वो जनता और राज्यकर्मियों को किस सामजस्य के साथ खुश रख पाते हैं तथा राज्य कि आर्थिक स्थिति को भी सम्भाल पाते हैं देखना होगा..

      कुर्सी कि गर्मी कब अपना रंग (केजरीवाल के अलावा “आप” के अन्य विधायको और अन्य मंत्रियों) दिखाती है यह भी विचारणीय होगा…

      आर त्यागी

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